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क्या एक बार फिर निशाने पर हैं सुरक्षाबल ?

पुलवामा में शिविर पर हमला

खुफिया एजेंसियों का यह अलर्ट सेना, अर्धसैनिक बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए कान खड़े करने वाला है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की शह पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर बड़े हमले का षड्यंत्र रचा जा रहा है। पाकिस्तान पहले भी अपने हरकतों से यह जाहिर कर चुका है कि पड़ोसी देश भारत के प्रति उसके इरादे नापाक हैं। तकरीबन साल भर पहले 14 फरवरी को पुलमावा में सड़क मार्ग से गुजर रहे केंद्रीय रिजर्व बल के काफिले पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी गुट में फिदायीन हमला किया था जिसमें 40 जवानों की शहादत हुई थी। इसके बाद भी आतंकियों ने सेना और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाने की हरकतें की हैं लेकिन सुरक्षाबलों की चौकस और चौकन्ना निगाहों ने आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेरा है फिर भी घाटी में सुरक्षाबलों को हर वक्त, हर जगह सतर्क रहने की जरूरत है।





सच्चाई यह है कि पाकिस्तान लंबे समय से अपनी धरती पर आतंक की फसल उगा कर उसे भारत की सीमा में दाखिल कराने की जुगत में रहा है। उसके कारनामे हमेशा ही भारत में अराजकता पैदा करने के रहे हैं। सीमा के उस पार बालाकोट जैसे आतंकी ठिकाने उसने फिर से सक्रिय कर लिए हैं। नियंत्रण रेखा (LoC) के पास वह अपने यहां प्रशिक्षित आतंकियों का जमावड़ा बढ़ा रहा है। अलावा इसके जम्मू-कश्मीर घाटी में भी वह स्थानीय आतंकियों को अपने तरीके से उकसा कर अराजकता पैदा करता रहता है। ऐसे में सुरक्षाबलों को अपनी सुरक्षा के लिए खास एहतियात बरतने तथा रणनीति बनाने की जरूरत है। सेना के वर्चस्व वाला पाकिस्तान घाटी में हालात बिगाड़ने के लिए कुछ भी कर सकता है। यहां तक की भारतीय सेना व सुरक्षाबलों को निशाने बनाने से भी वह नहीं चूकेगा। इस बात का खुलासा पकड़े गए तमाम आतंकियों से हुआ है। सच यह है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 हटने के बाद और अब कहीं पीओके भारत का हिस्सा न बन जाए। इस डर वह बेहद परेशान है। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह कश्मीर मामले में क्या करे।

हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि सीमा और घाटी में बदली हुई परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बीते बरसों में पठानकोट, उड़ी आदि सेना व सुरक्षाबलों के अड्डों पर आतंकी हमले हो चुके हैं। लिहाजा सुरक्षा रिपोर्टों पर विशेष ध्यान देकर हर तरह से सुरक्षा व्यूह को मजबूत बनाने की जरूरत है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया था कि कश्मीर में तैनात अर्धसैनिक बलों की आवाजाही हवाई मार्ग से होगी। इस फैसले के बाद पूरे देश में संदेश गया कि सरकार केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों की सुरक्षा की चिंता सेना जितनी ही करती है। यह व्यवस्था हालांकि एक वर्ष के लिए थी लेकिन बदले हालात के बीच इस व्यवस्था न केवल लागू रखने बल्कि ऐसी ही अन्य व्यवस्थाओं को शुरू करने तथा उन्हें तत्काल लागू करने की पहल करनी होगी।

हमारे सुरक्षा बल सीमा के भीतर तथा सीमा पार पाकिस्तान के खूनी मंसूबों से भरी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे माहौल में जरूरी हो जाता है कि राज और समाज जवानों के परिजनों, घर-परिवार की कतई अनदेखी न करें। जवानों की कर्तव्यनिष्ठा देश की एकता व अखण्डता के लिए है। जिसके लिए वे जी-जान की बाजी लगाकर अपने सर्वोच्च का पालन कर रहे हैं। यह बात देश के हर नागरिक को समझनी होगी।

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