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समर नीति: सिंगापुर के नौसैनिक अड्डों पर भारत

सिंगापुर के रक्षा मंत्री के साथ सीतारमण

दक्षिण चीन सागर एक अंतरराष्ट्रीय सागरीय इलाका है जहां से होकर भारत का आधा से अधिक समुद्री व्यापार होता है इसलिए इस इलाके में अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए शांति व स्थिरता का बना रहना जरूरी है लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह चीन  इस सागरीय इलाके को अपने प्रभुत्व वाला बताकर अपना रवैया आक्रामक बनाता जा रहा है वह भारत के लिये विशेष चिंता की बात है। इस सागरीय इलाके में चीन के उग्र होते तेवर से मुकाबला करने के लिये दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के गहरे सामरिक रिश्ते काफी मायने रखते हैं। इस नजरिये से सिंगापुर के साथ भारत के गहराते रक्षा रिश्तों पर चीन की खास नजर होगी।





नवम्बर के अंत में सिंगापुर के रक्षा मंत्री Dr Ng Eng Hen का भारत दौरा जो नतीजे दे गया उससे भारत आने वाले वर्षों में प्रशांत  सागर और दक्षिण चीन सागर के इलाके में अपनी मौजूदगी बनाए रख कर अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा कर सकता है। सिंगापुर और भारत के रक्षा मंत्रियों Dr Hen और निर्मला सीतारमण के बीच बातचीत के बाद जो समझौते हुए उससे यह मुमकिन हो सकेगा कि भारत सिंगापुर के चांगी नौसैनिक अड्डे पर अपने युद्धपोत ठहरने के लिये भेज सकता है। चांगी नौसैनिक अड्डा मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित है जो दुनिया का एक प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग है और इस इलाके से होकर न केवल भारत का समुद्री व्यापार होता है बल्कि चीन के लिये भी पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई का एक प्रमुख मार्ग है। इस संकरे समुद्री व्यापार गलियारे पर जिस भी देश का प्रभुत्व स्थापित होगा वह दूसरे देश के व्यापारिक पोतों की आवाजाही को बाधित कर सकता है।

मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर और प्रशांत सागर के दक्षिण चीन सागर को जोडऩे वाला समुद्री गलियारा है और यह अंडमान सागर से आगे जा कर है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर भारत के सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं जहां से भारत मलक्का जलडमरूमध्य पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर सकता है। चीन की यही सबसे बड़ी चिंता होगी कि अब सिंगापुर के नौसैनिक अड्डों पर अपने युद्धपोतों को तैनात करने की सुविधा भारत हासिल कर लेगा तो भारतीय नौसेना इस पूरे सागरीय इलाके पर आसानी से अपना  सैन्य दबदबा स्थापित कर सकती है।

मलक्का जलडमरूमध्य पर अपनी मौजूदगी बढ़ाकर भारतीय नौसेना सिंगापुर की नौसेना के साथ मिल कर पूरे समुद्री इलाके पर चौकस निगाह रख सकती है। आज के युग में जिस तरह सागरीय इलाके अंतरराष्ट्रीय होड़ के इलाके बनते जा रहे हैं उसके मद्देनजर भारत को भी इस इलाके के समुद्र तटीय देशों के साथ सुरक्षा सहयोग के समझौते करना बहुत जरूरी हो गया है। दक्षिण पूर्व  एशिया के अन्य प्रमुख देश वियतनाम के साथ भी भारत ने मजबूत रक्षा रिश्ते विकसित किये हैं,  इंडोनेशिया,  मलयेशिया आदि के साथ भी  नौसैनिक आदान-प्रदान और साझा अभ्यास का सिलसिला जोर पकडऩे लगा है। इस तरह न केवल सिंगापुर बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया के दूसरे देशों के साथ भी भारत अपने रक्षा सहयोग के रिश्ते मजबूत कर पूरे इलाके में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की समर नीति को लागू कर रहा है। इस कड़ी में सिगापुर के साथ ताजा रक्षा समझौता काफी अहम है जिसके जरिए न केवल सिंगापुर के नौसैनिक पोत भारत के अंडमान नौसैनिक अड्डे पर अपने सैनिकों को ट्रेंनिंग दे सकते हैं बलिक अडंमान से लेकर मलक्का इलाके तक भारत और सिंगापुर के पोत  साथ मिल कर चौकसी का काम भी कर सकते हैं।

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