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वर्ष 2017 में आतंकियों से लोहा लेते हुए CRPF के 52 अफसर और जवान हुए शहीद

सीआरपीएफ

वर्ष 2017 में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी सीआरपीएफ के 52 अफसर/ जवान ड्यूटी के दौरान कर्तव्य पालन करते हुए शहीद हो गए। इनमें 5 जवान तो 31 दिसंबर को कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकवादियों के हमले में शहीद हुए हैं।





राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 30 नवंबर 2017 तक केंद्रीय सशस्त्र बलों के 64 अफसर/जवानों ने ड्यूटी के दौरान कर्तव्य पालन करते हुए अपनी जान गंवा दी। इनमें सबसे ज्यादा 47 अफसर /जवान सीआरपीएफ के है। असम राइफल्स के 8, बीएसएफ के 7 और एसएसबी के 2 अफ़सर /जवान ने अपने प्राण न्यौछावर किए।

ड्यूटी पर मरने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के परिवारों के लिए उपलब्ध एकमुश्त मुआवजा राशि में पेंशन एवं कल्याण विभाग ने 1 जनवरी 2016 से संशोधन किया है। ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना के कारण, आतंकवादियों, असमाजिक तत्वों आदि द्वारा हिंसा के कारण हुई मृत्यु में मुआवजा राशि 25 लाख है।

सीमा पर हुई झड़पों, आतंकवादियों, अतिवादियों, समुद्री लुटेरों के विरुद्ध कार्रवाई में हुई मृत्यु, प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम की स्थितियों के कारण, सीमा चौकियों आदि में ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु में मुआवजा राशि 35 लाख रुपए है।

युद्ध या युद्ध जैसी स्थितियों में तैनाती ( जिन्हें रक्षा मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया है) में दुश्मन की कार्रवाई के दौरान मृत्यु और विदेश में युद्ध प्रभावित क्षेत्र से भारतीय नागरिकों को बाहर निकालने की कार्रवाई के दौरान हुई मृत्यु के मामले में मुआवजा राशि 45 लाख है।

गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्य सभा में बताया कि बहुत से राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र भी  एकमुश्त मुआवजा प्रदान करते हैं। जहां ऐसी घटनाएं होती हैं और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले केंद्रीय सशस्त्र बल के जवान का वह गृह राज्य है। यह मुआवजा राज्य दर राज्य भिन्न-भिन्न है।

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपनी सहायता राशि में वृद्धि करने की संभावना तलाशने का अनुरोध किया है। इसके अलावा केंद्रीय सशस्त्र बलों और असम राइफल्स के पास अपनी-अपनी कल्याणकारी योजनाएं हैं। कार्मिकों एवं उनके परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बल के स्तर पर राशि एकत्रित की जाती है।

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