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भारत और चीन के बीच इस यात्रा से बढ़ेगा विश्वास!

भारत-चीन

चीन के रक्षा मंत्री Wei Fenghe इस सप्ताह कई जनरलों सहित 25 सदस्यीय शिष्टमंडल के साथ भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। रक्षा मंत्री पद पर अपनी नियुक्ति के बाद यह उनकी तीसरी विदेश यात्रा होगी। उनकी पहली दो यात्राएं रूस और बेलारूस की थीं। उनके आगमन से पहले पिछले महीने वेस्टर्न थिएटर कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल Liu Xiaowu ने भारत की यात्रा की थी। भारतीय सेना के ईस्टर्न आर्मी कमांडर चीन की एक शिष्टमंडल यात्रा के बाद वापस लौटे हैं।





यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन डोकलाम गतिरोध के बाद विश्वास बढ़ाने से संबंधित कदम उठाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं Xi Jinping के बीच वुहान में शिखर सम्मेलन सहित दोनों ही पक्षों में परस्पर बातचीत बढ़ी है। इस सम्मेलन के बाद ही प्रधानमंत्री द्वारा सिंगापुर में शांगरिला संवाद में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषण का महत्व बढ़ जाता है।

उम्मीद की जा रही थी कि मोदी दक्षिण चीन सागर में चीन के विस्तार की खुली आलोचना करेंगे और Quad के लिए अपना समर्थन बढ़ाएंगे लेकिन उम्मीद के विपरीत उन्होंने इसमें से कोई भी मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने कहा, ‘ मुझे पूरा विश्वास है कि एशिया और विश्व का भविष्य तभी बेहतर होगा जब भारत और चीन आपसी भरोसे और विश्वास के साथ मिलजुल कर काम करेंगे।‘  यह बयान इस बात का संकेत था कि दोनों ही देश अब संघर्ष के बजाए आपसी संबंधों को सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

डोकलाम में भारतीय कार्रवाइयों ने चीन को डोकलाम में अपनी सैन्य टुकडि़यों के लिए आश्रय गृह और घरों के निर्माण के लिए विवश कर दिया। यह ऐसी कार्रवाई थी जिसके बारे में उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। इसने भारतीय सेना और उसकी दृढ़ता को लेकर चीन की अवधारणा को बदल दिया। इसने पड़ोसी और आसियान देशों को दिखा दिया कि भारत हर हाल में अपने सहयोगियों का बचाव करेगा। इस घटना के बाद भी कुछ स्थानों पर एकाध गतिरोध हुए हैं लेकिन प्रत्येक का समाधान शांतिपूर्वक हो गया है।

भारतीय नौसेना ने हाल के दिनों में हिन्द महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और पूर्वी एशिया के देशों के साथ नौसेना अभ्यासों के परिचालन के द्वारा आसियान देशों के बीच अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। दूसरी तरफ, पनडुब्बियों समेत चीन की नौसेना उपस्थिति भी भारत के पिछले क्षेत्र में बढ़ रही है। भारत के इर्द-गिर्द चीन के सैन्य ठिकानें भी बढ़ रहे हैं जिससे संभावित संघर्ष के दरवाजे भी खुल रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय परस्पर बातचीत को बढ़ाने का एक अन्य कदम है जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे का निर्माण हो रहा है। शांति एवं आपसी समझ को सुनिश्चित करने के लिए कुछ और बड़े मुद्दे हैं जिन पर चर्चा किए जाने एवं उन्हें क्रियान्वित किए जाने की आवश्यकता है।

पहला मुद्दा दोनों देशों के बीच हॉटलाइन की स्थापना का है। दोनों देशों ने हॉटलाइन की स्थापना की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है लेकिन इसके अंतिम बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। चीन अपने वेस्टर्न थिएटर कमांड के बीच हॉटलाइन चाहता है जो भारतीय सीमा एवं भारतीय डीजीएमओ के लिए जिम्मेदार है, क्योंकि भारत के तीन विभिन्न सैन्य कमान विभिन्न क्षेत्रों में चीन का सामना कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, भारत का मानना है कि थिएटर कमांडों की स्थापना के साथ, चीन की तरफ से निर्णय सेंट्रल मिलिटरी कमीशन (सीएमसी) की तरफ स्थानांतरित हो गया है, इसलिए हॉट लाइन समतुल्य हो गया है, जिसका अर्थ यह हुआ कि डीजीएमओ (या उसका समतुल्य) सीएमसी में हो। इसके साथ-साथ, भारत को चीनी वेस्टर्न थिएटर कमांड और भारतीय सेना के ईस्टर्न कमांड के बीच एक दूसरी हॉटलाइन के विचार के प्रतिकूल भी नहीं होना चाहिए।

एक दूसरा बडा़ मुद्दा जिसके समाधान की आवश्यकता है। वह हैै भविष्य में नौसेना के आपस में संघर्ष से बचने के लिए नियमों की स्थापना है। आधिपत्य स्थापित करने और अपने हितों की रक्षा करने के लिए इस क्षेत्र में संचालन कर रही दो नौसेनाओं के विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे से मुठभेड़ करने की आशंका काफी प्रबल है। इस तरह के तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए जो यह सुनिश्चित कर सके कि नौसेनाओं के बीच संघर्ष न हो।

भारत-पाक संबंधों पर भी चर्चा होने की संभावना है। चीन ने खुले रूप से पाकिस्तान के सभी कदमों का समर्थन किया है और सुनिश्चित किया है कि पाकिस्तान हमेशा ही भारत का प्रतिभार यानी काउंटरबैलेंस करता रहे। पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के साथ, चीन के रक्षा मंत्री भारत के लिए एक संदेश लेकर आएंगे कि नई सरकार को उपमहाद्वीप में तनाव को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए। इससे सीपीईसी की सुरक्षा बढ़ेगी, जो विवादित क्षेत्र से होकर गुजरती है।

यह यात्रा अगर कामयाब रहती है तो यह भारत-चीन सीमा तनाव में कमी लाएगी और ऐसे क्षेत्र में आपसी समझ में बेहतरी लाएगी जो संघर्षों से बिखरा हुआ है। बहरहाल, दोनों ही पक्षों में भिन्न और असमान विचारों के साथ, किसी आसान समाधान की डगर आसान नहीं है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है।

ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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