vishesh

पाकिस्तान का दोमुंहापन

इमरान खान
फाइल फोटो

समझौता एक्सप्रेस रेल धमाका मामले में फैसला आने के बाद  जिसमें विशेष न्यायाधीश ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया, पाकिस्तान ने इस फैसले पर सवाल उठा दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, ‘ भारत की राष्ट्रीय जांच अदालत के फैसले ने लोगों को हिला दिया है। स्वमी असीमानंद, जिसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, सहित चारों अभियुक्तों को रिहा कर दिया गया।‘ उन्होंने कहा, ‘ पाकिस्तान इस घटनाक्रम और राजनीतिक कार्रवाई का पुरजोर विरोध करता है।‘ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस मामले का अध्ययन कर रहा है और विकल्पों पर विचार कर रहा है।





कुरैशी ने इस मसले को इस्लामी देशों के संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक के एक विशेष सत्र, जिसका आयोजन न्यूजीलैंड में मस्जिदों पर किए गए हमलों के बाद इसके कारणों, प्रभावों और भविष्य की योजना पर चर्चा करने के लिए किया गया था, के दौरान भी उठाने की कोशिश की। इस बैठक में उन्होंने कहा, ‘ हाल ही में भारत की एक अदालत ने हिन्दू आतंकियों को दोषमुक्त करार दिया जिन्होंने भारत में एक रेलगाड़ी में 68 लोगों, जिनमें अधिकतर मुसलमान थे और 44 पाकिस्तानी थे- की हत्या करने की बात कबूल कर ली थी। ‘ कुरैशी ने सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की लेकिन किसी भी देश ने उनके बयान को तवज्जो नहीं दिया क्योंकि वहां मौजूद हर व्यक्ति पश्चिमी देशों में बढ़ रहे इस्लामोफोबिया पर चर्चा करने में मशगूल था।

ताज्जुब की बात है कि यह वही पाकिस्तान है जिसने अपने जीवित बच गए आतंकी अजमल कसाब से प्राप्त सभी सबूतों सहित हर प्रकार के साक्ष्य दिए जाने के बावजूद मुंबई और पठानकोट हमलों पर कोई कदम उठाने से मना कर दिया है। मुंबई हमले को घटित हुए एक दशक से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है लेकिन यह मामला बिल्कुल ही आगे नहीं बढ़ा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान ने कहा था कि मुंबई हमला मामले की जांच करवाना उनकी प्राथमिकताओं में होगी। लेकिन आज तक उसकी एक भी सुनवाई नहीं हुई है। पाकिस्तान के अन्य दूसरे नेताओं की तरह वह भी केवल बयानबाजी कर रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई करने की उनकी भी कुव्वत नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में आगे की कार्रवाई का रास्ता डीप स्टेट यानी पाक की सेना, खुफिया एजेन्सियों से जुड़े प्रभावशाली सदस्यों के समूह ने रोक रखा है।

पठानकोट मामले में  जिसमें भारत तथा पाक ने संयुक्त रूप से एयर बेस पर  तफ्तीश की थी, अभी तक आगे की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पाकिस्तान हमेशा की तरह यही दावा कर रहा है कि उसके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। पुलवामा हमले के मामले में भी पाकिस्तान लगातार यह मानने से इंकार करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने इन हमलों की कोई जिम्मेदारी स्वीकार की थी।

कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान भारत द्वारा दिए गए पुलवामा डोजियर का अध्ययन कर रहा है। यह उनके ही पहले दिए गए बयानों के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलवामा डोजियर में कोई भी नया साक्ष्य नहीं है। जैसा पहले भी होता रहा है, यह डोजियर भी अपनी स्वाभाविक मौत मर जाएगा और कोई भी कार्रवाई नहीं होगी। पहले उन्होंने जिक्र किया था कि पाकिस्तान तभी मसूद अजहर को गिरफ्तार कर सकता है जब भारत वैसे सबूत मुहैया कराएगा जो पाकिस्तान की अदालतें वाजिब ठहराएंगी। चूंकि अदालतें डीप स्टेट के तहत कार्य करती हैं, इसलिए वे कभी भी भारत द्वारा दिए गए सबूतों को स्वीकार नहीं करेंगी।

यह वही विदेश मंत्री हैं जिन्होंने विदेशी पत्रकारों के साथ एक प्रेस साक्षात्कार में कबूल किया था कि उनकी सरकार जेईएम के सरगना मसूद अजहर के संपर्क में है और उसका सैन्य अस्पतालों में इलाज चल रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के भीतर इस संगठन की मौजूदगी की बात स्वीकार की थी जिसे पाकिस्तान के इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (डीजी आईएसपीआर) के प्रमुख ने झुठला दिया था जिसने बयान दिया था कि जेईएम पाकिस्तान में प्रतिबंधित है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान स्थित सभी आतंकी समूहों के नेताओं को सुरक्षात्मक कस्टडी में लिए जाने के दावों की उस वक्त कलई खुल गई जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने कहा कि आतंकी समूहों के नेताओं को इसलिए कस्टडी में लिया गया है जिससे कि वे भारत द्वारा की जाने वाली बमबारी से बच सकें। भुट्टो ने पाकिस्तान की वर्तमान सरकार के तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की भी मांग की जिनके गैर कानूनी संगठनों से ताल्लुकात थे और जिन्होंने चुनावों में स्वेच्छा से उनसे समर्थन पाने की ख्वाहिश जताई थी। जबसे भुट्टो ने ये बयान दिए हैं, डीप स्टेट ने उन्हें उत्पीडि़त करने की कार्रवाईयां शुरू कर दी हैं। उनसे अब बहुत सारे मामलों में नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो द्वारा सवाल पूछे जा रहे हैं।

जहां तक भारत का सवाल है तो यहां न्यायपालिका स्वतंत्र है और उस पर सरकार का कोई दबाव नहीं है। पाकिस्तान में स्थिति बिल्कुल उलट है। डीप स्टेट के अधिकारों की बाबत सवाल पूछे जाने की वजह से ही तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उनकी कुर्सी से बेदखल कर दिया गया और फिलहाल वह जेल में हैं। मंशा यह थी कि उन्हें चुनाव में दुबारा भाग लेने से महरूम कर दिया जाए क्योंकि डीप स्टेट ने पहले ही उनकी जगह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाने वाले का नाम तय कर रखा था।

भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प यह है कि वह पाकिस्तान से आने वाली टिप्पणियों को नजरअंदाज करे। भारत अभी भी जांच और कार्रवाई कर रहा है जबकि पाकिस्तान ने तो जांच करने से ही मना कर दिया है। भारत ने समझौता विस्फोट मामले को बंद कर दिया है जबकि पाकिस्तान को अभी भी मुंबई हमला मामले की सुनवाई पूरी करने की जरूरत है, पठानकोट हमले की जांच शुरू करनी है और पुलवामा हमले की जांच करने पर विचार करना भी बाकी है। एक वास्तविक लोकतंत्र और सेना, जो आतंकी नेताओं की सुरक्षा करती है, द्वारा चलाई जा रही सरकार के बीच यही अंतर है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है। ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

Comments

Most Popular

To Top