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सेना को यह बातें बनाती हैं विशेष?

भारतीय जवान
फाइल फोटो

केंद्रीय बल कई प्रकार के (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस एवं सेना सहित) होते हैं।  सभी यूनिफॉर्म पहनते हैं, भले ही वे अलग रंग के होते हैं और सभी का काम उतना ही थकावटपूर्ण है फिर भी उनके प्रदर्शन और दृष्टिकोण में बहुत ज्यादा अंतर पाया जाता है। सब की स्थापना अलग अलग उदेश्यों से की गई, फिर भी कई मामलों में कठिन स्थितियों में वे एक साथ कार्य करते हैं। ये जवान सेना सहित सभी केंद्रीय बलों का एक हिस्सा हैं और एक समान पृष्ठभूमि से आते हैं। कुछ मामलों में तो समान परिवारों से ही ताल्लुक रखते हैं, फिर भी सेना के जवान का व्यवहार और प्रेरणा अलग होती है। जो किसी भी केंद्रीय बल में शामिल होते हैं, उन्हें लगभग एक समान प्रशिक्षण से ही गुजरना पड़ता है भर्ती होने के लिए समान योग्यताओं की आवश्यकता होती है  फिर भी एक बार सेना में भर्ती हो जाने के बाद उनके मनोभाव अलग हो जाते हैं।





इस तथ्य के बावजूद कि सभी केंद्रीय बलों में सेना का जवान सबसे वंचित होता है क्योंकि वह सबसे पहले सेवानिवृत्त होता है। यह भी सच है कि सेना का जवान सेवा के दौरान और उसके बाद भी सबसे अलग रहता है। सेना का जवान 35 वर्ष के बाद सेवानिवृत्त हो जाता है जो उसके रैंक पर निर्भर करता है जबकि अन्य सभी केंद्रीय बल के जवान लगभग 58 वर्ष के आसपास सेवानिवृत्त होते हैं।

भारतीय सेना के जवान को आखिर सभी बलों में क्या अलग बनाता है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तो सभी बल समान रूप से जिम्मेदार हैं। मूलरूप से वजह है-प्रेरणा, सौहार्द, नेतृत्व एवं पदानुक्रम में भरोसा।

प्रेरणा प्रशिक्षण के स्वरूप से प्रवाहित होती है जहां जवानों को उनके पूर्ववर्तियों के सर्वोच्च बलिदानों द्वारा सृजित रेजीमेंट एवं बटालियन के इतिहास एवं गौरव से अवगत कराया जाता है जिनसे परंपराएं विकसित हुई हैं। उन्हें यह मानने के लिए प्रेरित किया जाता है कि ऐसी कोई भी कार्रवाई जो बटालियन की छवि को दागदार बना सकती है, उनके लिए अपवित्र है। उनके लिए बटालियन का सम्मान ही सबसे महत्वपूर्ण है।

सौहार्द उसे कहते हैं जब सब एक साथ सेवा करते हैं। समान खतरे, जोखिमों एवं कमियों को साझा करते हैं। यह जवान को इसका भी भरोसा दिलाता है कि अगर उसे कुछ हो जाता है तो रेजीमेंट एवं बटालियन उसके परिवार की देखभाल करेगी और सुनिश्चित करेगी कि उन्हें किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

सौहार्द के अतिरिक्त रेजीमेंट में भरोसा, विश्वास एवं गर्व की भावना जरूरत पड़ने पर जवान को सर्वोच्च बलिदान देने को प्रेरित करता है। ऐसे अनगिनत अवसर आए हैं जब जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उनका सौहार्द कायम रहे।

खासकर, जूनियर अधिकारी स्तर पर नेतृत्व सेना की मुख्य ताकत बना हुआ है। भारतीय सेना के अभियानों में अधिकारी से लेकर जवान तक की मौतों का उच्च अनुपात इस बात का संकेत है कि अधिकारी खुद आगे बढ़कर नेतृत्व करते हैं। अधिकारी और जवान एक ही प्रकार की सुविधाएं, कठिनाईयां तथा जोखिम साझा करते हैं, इसलिए उनके बीच बहुत अधिक प्रगाढ़ संबंध हैं।

अपने अधिकारियों को नेतृत्व करते देख कर जवान इस बात से अवगत हो जाते हैं कि जो सेना में उच्च पदों पर जाते हैं, वे एक ही प्रकार से और सीढ़ी दर सीढ़ी उस स्थान पर पहुंचते हैं। यह उन्हें अहसास होता है कि उनके लिए उनका कल्याण और आवश्यकताएं ही प्राथमिकता है। इससे वह बिना सवाल उठाए या ऊपर से आने वाले निर्देशों को चुनौती दिए अपना काम करता रहता है। यही भरोसा सेना की सबसे बड़ी निशानी है। दूसरे सशस्त्र बलों में शीर्ष पदक्रम आईपीएस से होता है और इस प्रकार इस विश्वास को तोड़ता है क्योंकि उन्होंने न तो ऐसी कठिनाइयों का सामना किया होता है और न ही उन जवानों के साथ कंधा से कंधा मिला कर काम किया होता है जिन पर वे कमान करते हैं।

सैन्य प्रशिक्षण, अभियानों का अनुभव और अनुभव तथा क्षमता पर आधारित पदोन्नति प्रत्येक सैनिक को जवानों का नेता बना देता है। इसलिए सेना एक ऐसा संगठन है जो नेताओं को प्रशिक्षित करता है तथा नेताओं का नेतृत्व करता है। इसका कैडर भीतर से उत्पन्न होता है और इसलिए जुड़ाव और भरोसा बहुत अधिक होता है। यही चीज है जो सेना को अन्य केंद्रीय पुलिस बल से अलग करता है।

सेना के पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है कि वह ऐसे माहौल का निर्माण करे जो विफल न हो। यह देश का अंतिम गढ़ है और और जब दूसरे सभी विफल हो जाते हैं तो उसी से उम्मीद की जाती है। यही वह तत्व है जो आंतरिक विकास में सक्षम बनाने के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। यह राष्ट्रीय संस्थानों का रक्षक बना हुआ है जो यह सुनिश्चित करता है कि आम भारतवासी सुरक्षित और संरक्षित महसूस करे। इसने कभी भी अपनी भूमिका और दायित्वों के लिए श्रेय नहीं लेना चाहा है, केवल देशवासियों की शुभकामनाएं और आर्शीवाद चाहा है। यही वजह है कि सेना अन्य सभी केंद्रीय बलों से अलग है।

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ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

 

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