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रक्षा मंत्री का दौरा और पाक के इरादे

द्रास में जवानों के साथ राजनाथ सिंह

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जम्मू-कश्मीर के एक दिवसीय दौरे के समय पाकिस्तान ने मनकोट, कृष्णा घाटी और मेंढर सेक्टर पर सीज फायर का उल्लंघन करते हुए गोलीबारी कर अपना इरादा बता दिया कि वह अभी भी सुधरने के रास्ते पर नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भारत के इस पड़ोसी देश से पूछना चाहिए कि वह संघर्ष विराम का उल्लंघन क्यों करता है? बे-वजह इस पड़ोसी देश ने कारगिल विजय की वर्षगांठ पर जम्मू में पहली बार आए राजनाथ के दौरे के समय पर गोलियां इसलिए चलाई उसके मन में सफाई नहीं है। सही तो यह है पाकिस्तान खतरनाक आतंकी मंसूबों के कारण सीमा पर क्रॉस फायरिंग करवाकर आतंकियों को भारत की सीमा में पहुंचने में मदद करता रहता है और अभी भी करना चाहता है।





यह सही है कि भारत पाकिस्तान की इन कारस्तानियों से पूरी तरह वाकिफ है। दो दिन पहले ही रक्षा मंत्रालय ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी पाकिस्तान के मंसूबों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि खराब आर्थिक स्थिति से जूझने के बावजूद पाकिस्तान तेजी से परमाणु हथियारों और मिसाइलों की बढ़ोत्तरी कर रहा है। रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से उल्लेख है कि पाकिस्तानी सेना जम्मू-कश्मीर में सीमा पार फायरिंग करवाकर आतंकी संगठनों को सहायता पहुंचाने का काम कर रही है। लेकिन इस सब के बावजूद भारत को हर समय और हर तरह से चाकचौबंध तथा सतर्क रहने की जरूरत है। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान बिलबिला कर रह गया है। अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे और पूरी दुनिया में आतंक के मसले पर उसकी थू-थू होने के बाद भले ही वह मुंबई बम कांड के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार करने या आतंकी शिविरों को खत्म करने की बात कर रहा हो, पर इस बात को हमें गांठ बांध लेना होगा कि वह सुधरने वाला नहीं है। उसे उसी की भाषा में जवाब देना होगा। भारत को बार-बार यह संदेश पाकिस्तान को देना होगा कि हद लांघी तो मिट जाओगे।

बेहद संतोषजनक, समझदारी तथा प्रतिबद्धता भरी बात यह है कि केन्द्र की नई सरकार पाक मसले तथा घाटी में आतंकवाद को लेकर बेहद सधे कदमों से काम कर रही है। घाटी में लंबे समय से फैले आतंकवाद के फन को कुचल दिया गया है। आगामी एक वर्ष का आतंकवादियों को खत्म करने का रोडमैप सेना ने तैयार कर लिया है। जीरो टोलरेन्स की नीति, टेरर फंडिग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घुसपैठ विरोधी तंत्र को और मजबूत बनाने तथा अलगाववादी नेताओं से कोई संवाद न करने से केन्द्र की मंशा साफ झलकती है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य न होने तक सरकार चुप नहीं बैठेगी। पिछले दिनों केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा और लोकसभा में दिया गया ‘एक राष्ट्र’ की अवधारणा का बयान कई बातों को परिभाषित करता है।

जम्मू-कश्मीर के बाशिंदों को भी चाहिए कि वे भटके हुए जवानों को बार-बार और साफ-साफ बताएं कि उनकी भलाई बंदूक थामने या सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने में नहीं है। यह ठीक है कि पिछले कुछ समय में घाटी में अलगावाद-आतंकवाद एक धंधा बन जाने से वहां का एक वर्ग अपनी कश्मीरियत की पहचान को ही भूल बैठा है। घाटी के राजनेताओं और अलगाववादियों को दिल पर हाथ रख कर खुद से पूछना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर के ऐसे असामान्य हालात के लिए कौन जिम्मेदार है। केन्द्र सरकार युवाओं को नौकरियां, आरक्षण, पढ़ाई के अवसर आदि उपलब्ध कराकर मुख्य धारा में लाने का प्रयास इसलिए कर रही है कि वहां हालात स्थाई तौर पर सामान्य हों। ऐसे में इस बात की उम्मीद की जानी चाहिए केन्द्र सरकार की कोशिशें, सूबे के राज्यपाल शासन तथा राज्य के तमाम अमन व तरक्की पसंद नागरिकों की वजह से हालात बेहतरी की ओर बढ़ेंगे। पाकिस्तान और सीमा के इस पार पाकिस्तान का राग अलापने वालों को भी यह बात बहुत जल्द समझनी होगी कि भारत के इरादे मजबूत हैं तथा यह नया भारत है।

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