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CISF से बहुत कुछ सीख सकती हैं राज्यों की पुलिस 

CISF जवान
सीआईएसएफ जवान (फाइल फोटो)

देश के हवाई अड्डों पर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) द्वारा करवाये गये एक सर्वे में 95.58 प्रतिशत विमान यात्रियों द्वारा बल की सेवाओं का उत्कृष्ट बताया जाना यह रेखांकित करता है कि बल प्रतिबद्धता, कर्तव्यपरायणता और संवेदनशीलता के साथ सुरक्षा और सेवा को सर्वोपरि मानता है। CISF ने पिछले दिनों देश के कुल आठ हवाई अड्डों-दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरू, चेन्नई, मुंबई, गुवाहाटी, कोच्चि तथा हैदराबाद में एक सर्वे किया था। इस सर्वे में विमान यात्रियों से CISF द्वारा सुरक्षा, व्यवहार, जांच में लगने वाले समय आदि के बारे में सवाल किये गये थे। इन सभी एयरपोर्ट पर CISF तैनात है। यह सर्वे कुल 30 दिन चला था। इसमें कुल 3,30,152 लोगों ने हिस्सा लिया था। सर्वे में सेवाओं को 95.58 प्रतिशत यात्रियों ने उत्कृष्ट, 3.48 प्रतिशत ने अच्छा तथा 0.19 प्रतिशत लोग सेवाओं से असंतुष्ट मिले। निश्चय ही यात्रियों की संतुष्टि का यह कार्ड दर्शाता है कि घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों ने देश-विदेश की यात्राओं के कई पूर्व अनुभवों के आधार पर अपनी धारणा बताई होगी। यह अच्छी बात है कि संतुष्टि का प्रतिशत बेहद ऊंचा है।





दरअसल केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल आज 61 संवेदनशील हवाई अड्डों समेत 344 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा इसलिए उठा पा रहा है कि उसके जवानों, अफसरों की ट्रेनिंग आला दर्जे की है। और मानसिकता सेवा भावना से भरी है। अलावा इसके संरक्षा, सुरक्षा प्रदान करने वाले मानक भी विश्वस्तरीय हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में बल के महानिदेशक राजेश रंजन की इस बात को विशेष गंभीरता से लिया जाना जरूरी होगा जब पिछले दिनों दो दिवसीय इंटरनेशनल एवियशन सेमीनार से पूर्व आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि दुनिया के हर हवाई अड्डे पर होने वाली किसी भी घटना पर हम पैनी निगाह रखते हैं और रोज कुछ न कुछ सीखते हैं ताकि हमें सुरक्षा को चाक-चौबंद करने में आसानी हो।

हवाई अड्डों पर रोजाना रात-दिन देश-दुनिया के लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है। इसमें सामान्य यात्री के अलावा दिव्यांग श्रेणी तक के यात्री होते हैं। ऐसे में गरिमा और जरूरत के साथ हर यात्री की सेवा और सुरक्षा करना बेहद चुनौती भरा काम है। आतंकवाद भी पूरी दुनिया में विमानन क्षेत्र में एक अहम चुनौती है। इन चुनौतियों के बीच अगर 95 प्रतिशत से भी अधिक यात्री सेवाओं को उत्कृष्ट बताकर बल की पीठ थपथपा रहे हैं तो यह CISF के लिए गौरव की बात है। इन हवाई अड्डों के अलावा 344 देश के महत्वपूर्ण और आधारभूत संस्थानों की 24 घंटे सुरक्षा करने वाले जवान तथा अफसर एक चुनौतीपूर्ण भूमिका में रहते हैं। दिल्ली मेट्रो को इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। 296 किलोमीटर नेटवर्क का दायरा समेटे दिल्ली मेट्रो में CISF सुबह से देर रात तक हर यात्री की जांच-पड़ताल और सुरक्षा मुहैया कराती है। साथ-साथ मेट्रो स्टेशनों की जिम्मेदारी भी संभालती है। दिल्ली के स्लम इलाकों, विश्वविद्यालयों, स्कूल-कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों, बाजारों, छावनी, एयरपोर्ट से गुजरने वाली मेट्रो में अलग-अलग तरह की मानसिकता और पृष्ठभूमि से आने वाले यात्रियों से CISF को रोजाना दो-चार होना पड़ता है। कई वर्ष पूर्व दिल्ली मेट्रो में भी करवाये गये एक सर्वे में यात्रियों में संतुष्टि का प्रतिशत ऊंचा था।

CISF की ऐसी भूमिका का सीधा संबंध समर्पण और प्रतिबद्धता से है। साथ ही यात्रियों और लोगों को संतुष्टि प्रदान करने से है। राज्यों की पुलिस, होमगार्ड आदि को भी ऐसी ही भूमिका अपनाने की पहल करनी चाहिए। सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलता कि हम नागिरकों के बीच में रहते हैं। और यहां पर अपनी तरह की अलग-अलग दिक्कतें, चुनौतियां और परेशानियां होती हैं। CISF भी हवाई अड्डों, दिल्ली मेट्रो, लाल किला विक्टोरिया मेमोरियल, राष्ट्रीय संग्रहालय, सालार जंग म्यूजियम आदि में तैनात है जहां उसका साबका नागरिकों से ही होता है और वह जनता को उल्लेखनीय सेवाएं दे रहा है। पुलिस भी आम आदमी के बीच उसकी सुरक्षा के लिए तैनात है। राज्यों की पुलिस के मुखिया और राजनेता अगर चाहें तो बेहतर कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी भरी सेवा के साथ खाकी की छवि सुधारने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसी उत्कृष्ट पहल के लिए पुलिस CISF की मदद ले सकती है। और अगर यह पहल शुरू होती है तो CISF का यह स्वर्ण जंयती वर्ष इतिहास के पन्नों में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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