vishesh

चीन इतिहास के पन्ने को ठीक से पलटे..

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

गत 16 जून को चीन  द्वारा सिक्किम भूटान सीमा पर अवैध तरीके से सड़क निर्माण का काम भारतीय सेना ने जब रोका तो चीन ने इसे लेकर बवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने की स्थिति में तैनात हो गये हैं और हालात इसी तरह बने रहे तो इसके भड़कने का भी अंदेशा है। इसलिए सामरिक हलकों में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह बवाल  खुले युद्ध या छोटी झड़प में बदल जाएगा। इसे लेकर चीन ने भारत को चेतावनी दी है कि वह इतिहास से सबक सीखे। यानी चीन की अप्रत्यक्ष चेतावनी यह थी कि जिस तरह 1962 के युद्ध में भारत को मुंह की खानी पड़ी उसी तरह इस बार भी भारत को शर्मनाक स्थिति का सामना  करना पड़ेगा। चीन  अपनी परमाणु बमों से लैस सैकड़ों  बैलिस्टिक मिसाइलों वाली सैनिक ताकत के बल पर भारत को पहले भी आभास कराता रहा है कि वह चीन से सामरिक मामलों में पंगा नहीं ले और चीन से अपनी तुलना करने की जुर्रत नहीं करे।





लेकिन इस बार भारतीय सेना चीन की इस बंदरघुड़की के आगे नहीं झुकी है और डोकलाम इलाके में पूरे  साहस के साथ डटी हुई है। चीनी सेना भले ही भूल जाए कि इसी इलाके में आज से करीब 50 साल पहले चीनी सेना को भारतीय सेना के जवाबी हमले झेलने पड़े थे और वह पीछे हटने को मजबूर हुई थी। वास्तव में भारतीय सेना चीन को ही इतिहास के पन्ने ठीक से पलटने की सलाह दे रही है। भारतीय सामरिक हलकों में चीन को यह याद दिलाया जा रहा है कि वह सिक्क्मि में 1967 के दौरान नाथु ला दर्रे पर हुए उस झड़प को याद करे जब चीनी सेना को भारतीय सेना के जवाबी हमले के बाद पीछे हटना पड़ा था। शायद चीनी सेना 1967 के उस वाकये को याद नहीं करना चाहती या लगता है कि अपने इतिहास की किताब के उन पन्नों को ही फाड़ दिया है जिसमें नाथु ला सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों की झड़प का जिक्र होगा ।

चीन की सेना निश्चय ही आज की भारतीय सेना से काफी ताकतवर है लेकिन आज भारतीय सेना इतनी ताकतवर हो चुकी है कि चीन के किसी सैन्य हमले का ऐसा जवाब देने में सक्ष्म है कि चीनी सेना भी लहूलुहान हो जाए। हालांकि आज के अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक हालात ऐेसे नहीं कि चीन भारत के साथ सीधा युद्ध लड़ने की पहल कर सके। लेकिन चीन ने अगर भारत पर किसी तरह का सैनिक हमला करने की जुर्रत कर भी दी तो भारतीय सेना भी चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगी। भारतीय सेना आज इतनी आधुनिक हो चुकी है और उसके पास दुश्मन के किसी परमाणु मिसाइली हमले का जवाब देने का इतना समुचित भंडार खड़ा हो चुका है कि चीन के किसी भी परमाणु हमले का जवाब दे सकती है। चीन को यह पता है कि वह भारत पर अगर सैनिक हमला करता है तो उसके भयंकर राजनीतिक और सैनिक नतीजे उसे झेलने होंगे।

Comments

Most Popular

To Top