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मालाबार से चिढ़ा चीन

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

बंगाल की खाड़ी में भारत, अमरीका और जापान की नौसेनाओं के बीच 10 से 17 जुलाई तक चले साझा युद्धाभ्यास की इस बार विशेष चर्चा रही। 1992 से अरब सागर में शुरू यह अभ्यास 2014 तक भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय स्तर पर होता रहा है और दो साल पहले इसमें जब जापान को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला तो चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इस बार बंगाल की खाड़ी में तीनों देशों के युद्धपोतों और विमानों ने जो कोलाहल पैदा किया उसकी गूंज अंतर्राष्ट्रीय सामरिक हलकों में भी सुनाई दी। जहां अमरीकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा कि मालाबार अभ्यास चीन के लिए एक संदेश है। वहीं, चीनी मीडिया में भी इसकी गूंज सुनाई पड़ी। चीनी प्रवक्ता के इस बयान में उसकी चिंता छिपी थी कि चीन यह उम्मीद करता है कि मालाबार अभ्यास क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को बढ़ावा देगा। नौसैनिक ताकत के मामले में अमरीका दुनिया का सबसे ताकतवर देश तो है ही जापान और भारत का भी अपने सागरीय इलाके में लोहा माना जाता है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की दो नौसैनिक ताकतों को साथ लेकर क्या अमेरिका कोई गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रहा है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन तीनों देशों का इस समुद्री नौसैनिक मेलजोल का इरादा साफ है। चीन की विस्तारवादी मंशा पर काबू पाना।





चीन की नीति रही है कि अपने इलाके का विस्तार एक एक इंच आगे बढक़र इस तरह करे कि वह कुछ दिनों में मीलों में बदल जाए। दक्षिण चीन सागर में चीन ने यही हरकत की है। उसने दक्षिण चीन सागर के विवादास्पद द्वीपों का कृत्रिम तौर पर विस्तार इस तरह किया कि वहां हवाई पट्टी बनाई जा सके और मिसाइलें तैनात की जा सके और बाद में उस इलाके पर अपना पूर्ण आधिपत्य बताया जा सके। इन कृत्रिम द्वीपों पर जब चीन का सम्प्रभु अधिकार होगा तो इसके इर्द गिर्द दो सौ किलोमीटर का समुद्री इलाका चीन का विशेष आर्थिक क्षेत्र कहाएगा। इस तरह दक्षिण चीन सागर में विभिन्न द्वीपों पर अपना कब्जा जमा कर दक्षिण चीन सागर के तीन चौथाई इलाके पर अपना अधिकार जताने की रणनीति पर काम कर रहा है। लेकिन अमरीका ने चीन की इस विस्तारवादी मंशा को चुनौती दी है और भारत ने कहा है कि दक्षिण चीन सागर एक अंतर्राष्ट्रीय सागरीय क्षेत्र है जिसमें आवाजाही की पूरी आजादी दुनिया के जहाजों को है।

लेकिन चीन दक्षिण चीन सागर तक ही अपने को सीमति नहीं रखना चाहता है। उसने अपने समुद्र तट से हजारों किलोमीटर दूर महासागर में प्रभुत्व जमाने के इरादे से अफ्रीकी देश जिबूती पर एक नौसैनिक अड्डा बना लिया है और वहीं से अपनी नौसैनिक गतिविधियों का संचालन हिंद महासागर में कर रहा है। मालाबार अभ्यास पिछले साल चीन के समुद्री पिछवाड़े प्रशांत सागर में जापान सागर में हुआ था और इस बार बंगाल की खाड़ी में जब तीनों देशों के दो दर्जन से अधिक युद्धपोत और करीब 96 विभिन्न्न किस्म के विमान इकट्ठे दिखे तो लगा कि तीनों देश पूरे हिंद महासागर पर किसी बाहरी ताकत की दादागिरी रोकने के लिए वास्तव में एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।

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