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डोकलाम पर चौकस निगाह और राजनयिक सूझबूझ की जरूरत

भारत-चीन सीमा

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की हरकतों के मद्देनजर भारत को डोकलाम क्षेत्र में चौकस निगाह, सक्षम-कूटनीति और राजनयिक सूझबूझ के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। पाकिस्तान बेवजह अपने ढंग से भारत के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा पर अपनी कारगुजारियों से बाज नहीं आता और अपने मुंह की खाता रहता है। भारतीय सेना और सुरक्षा बल मुंहतोड़ जवाब देती हैं और जरूरत पड़ती है तो सर्जिकल स्ट्राइक भी कर अपनी सरहद की रक्षा करती हैं तथा अपने हक और सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करतीं। इसी तरह के अधिकार, सीमा की हिफाजत तथा सम्मान की रक्षा भारतीय सैनिकों ने पिछले साल 16 जून को डोकलाम में चीन द्वारा सड़क बनाने के विवाद पर की थी। यह विवाद 73 दिन तक चला और सूझबूझ से दोनों देशों की सेनाओं के काफी सैनिक अपने-अपने बैरकों में वापस लौट गए थे।





पर गत एक पखवाड़े में डोकलाम क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरों की रिपोर्ट आने तथा चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की प्रतिक्रिया को देखते हुए भारत को और अधिक मजबूत बनने, चौकस रहने की जरूरत है। सैटेलाइट तस्वीरों में जिस तरह बताया गया कि चीन डोकलाम क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में सात हेलीपैड बना चुका है। औजार समेत रक्षा वाहन तैनात कर रखे हैं। सैनिकों की तैनाती से कुछ दूरी पर सड़क बनाने सामग्री भारी तादाद में मौजूद हैं। ऐसे में ये तथ्य भारत को सतर्क करने के लिए काफी हैं। हालांकि भारत का विदेश मंत्रालय और स्वयं आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत यथास्थिति कायम रहने और दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी दूर करने के लिए मौजूद प्रभावी तंत्र की बात कर परिपक्व सूझबूझ तथा विवाद को किसी भी तरह की तूल न देने का ही परिचय दे रहे हैं।

लेकिन इस बात में दो राय नहीं कि हमें पाकिस्तान के साथ-साथ चीन पर भी फोकस करना चाहिए। चीन जिस तरह अपनी शैली में रह-रहकर उकसाने वाली गतिविधियां भारत के साथ करता रहता है और चुनौतियां पेश करता है उससे हमें एक ओर मजबूत कूटनीति और दूसरी तरफ सुदृढ़ सैन्य नीति के साथ-साथ काम करना होगा। यह सही है कि भारत का सर्वोच्च सत्ता तंत्र, सेना तथा खुफिया तंत्र चीन की हर बात से वाकिफ है और चीनी खतरों को किसी भी कीमत पर कम नहीं आंकता किंतु चीन-भारत के मौजूदा हालात में भारत को सीमा पर हवाई अड्डा बनाने, सड़क निर्माण को और गति देने, आधुनिक हथियार बनाने, इंटेलिजेंस बेहतर बनाने का काम बहुत तेजी से करने की जरूरत पर बल देना होगा ताकि दुनिया की पेशेवर और जज्बे से भरी भारतीय सेना हर परिस्थिति का मुकाबला कर सके। उम्मीद है कि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार इस बार रक्षा बजट में चीन के मुकाबले के लिए बनने वाली ‘माऊण्टेन स्ट्राइक कोर’ के लिए 65 हजार करोड़ रुपये का आवंटन करेगी जो गत पांच वर्षों में नहीं हो सका है।

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