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सेना में होगी नई संयुक्त कमानों की स्थापना

नगा रेजीमेंट-भारतीय सेना
फाइल फोटो

सरकार ने तीनों सेनाओं में से प्रत्येक सेना के एक मेजर जनरल रैंक के अधिकारी की अगुवाई में तीन नई संयुक्त कमानों की स्थापना करने की घोषणा की है। थल सेना सशस्त्र बल विशेष बल प्रभाग (एएफएसएफडी), वायु सेना अंतरिक्ष कमान तथा नौसेना साइबर कमान को नियंत्रित करेगी। ये मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) के तहत संचालित होंगे। इन तीन नई स्थापित कमानों में से सबसे अधिक बहस एएफएसएफडी पर हो रही है।





रक्षा मंत्रालय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ को नियुक्त करने और सेना मुख्यालयों के साथ रक्षा मंत्रालय को मिलाने में विफल रहा है, इसलिए वह उपयुक्त रैंक के लेफ्टिनेंट जनरल के साथ इन कमानों की स्थापना नहीं कर सका। अगर उसने ऐसा किया होता तो ये कमान मुख्यालय आईडीएस के तहत नहीं बल्कि चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी (सीओएससी) के तहत अधीन स्थापित हुए होते। इससे कमान, नियंत्रण तथा समन्वय पहलू प्रभावित हुए होते। अंडमान एवं निकोबार कमान (एएनसी) एवं स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमान (एसएफसी) सीओएससी के तहत इसी प्रकार कार्य करते हैं।

एएफएसएफडी की स्थापना एक आदर्श कदम है क्योंकि इन बलों को रणनीतिक तैनाती के लिए सुसज्जित, प्रशिक्षित और निर्धारित किया जा सकता है। उनके लिए श्रमबल तीनों सेनाओं से आएगा। इसके साथ-साथ  ये सेनाएं संचालन के अपने स्वयं के क्षेत्रों के भीतर दायित्वों के लिए अपने खुद के विशेष बलों की नियुक्ति एवं उनका रखरखाव जारी रखेंगी। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) भी है जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया जाता है। देश में अब कई सारे विशेष बल हैं जिन्हें दायित्वों को अब निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है।

वर्तमान में रणनीतिक दायित्व आगरा स्थित पैराशूट ब्रिगेड के दायरे के अधीन है। रणनीतिक दायित्वों के एएफएसएफडी के लिए निर्धारित होने के साथ, वर्तमान पैराशूट बटालियन और तीनों सेनाओं के अन्य विशेष बलों को उनकी अपनी पारंपरिक और सीमित क्षमता के सीमा पार अभियानों की क्षमताओं को बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। एनएसजी के अपहरण रोधी एवं बंधक बचाव अभियानों से जुड़ाव बना रहना चाहिए। बहरहाल, सामरिक स्तर पर अन्य सेनाओं के विशेष बलों की पूरक सहायता की वैकल्पिक जिम्मेदारी पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सेनाओं को विशेष बलों पर उनके खुद के वर्तमान नियंत्रण पर पुनर्विचार करने की और संभवतः वर्तमान संख्या में कमी लाने की जरूरत है क्योंकि कुछ दायित्व एएफएसएफडी द्वारा अंजाम दिए जाएंगे। एएफएसएफडी के लिए अलग से प्रशिक्षण सुविधा केंद्रों की स्थापना से बचना चाहिए और अगर आवश्यक हो तो उसमें कटौती की जानी चाहिए। सेनाएं लंबे समय से एएफएसएफडी की स्थापना की मांग कर रही थीं और इसकी सिफारिश 2012 में रक्षा सुधारों पर गठित नरेश चंद्रा समिति द्वारा भी की गई थी।

एएफएसएफडी की स्थापना सशस्त्र बलों के लिए क्षमता वृद्धि के मामले में एक बड़ी छलांग साबित होगी। यह तीनों सेनाओं की विशेषज्ञता को एकजुट कर सकती है जो भविष्य में रोजगार परिदृश्य के लिए एक बड़ा लाभ साबित होगा। इस प्रकार यह संचालनगत विचारों और विभिन्न सेनाओं की टास्किंग को मिश्रित करने में सक्षम होगी। इस पर केवल सामरिक अभियानों के लिहाज से विचार करने से दीर्घकालिक रूप से इसकी तैनाती का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

जिस अधिकारी को एएफएसएफडी का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है वह भारतीय पैराशूट ब्रिगेड की कमान संभालने के अतिरिक्त वाशिंगटन में डिफेंस अटैची भी रह चुके हैं और उन्होंने जरूर अपने विशेष बलों की टास्किंग, प्रशिक्षण एवं तैनाती का अध्ययन किया होगा। भारत का दुनिया में रुतबा बढ़ रहा है और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप बड़ी भूमिका निभाने के लिए इसे उपमहाद्वीप से दूर के क्षेत्रों में शक्ति प्रदर्शित करने के लिए ऐसे बलों की आवश्यकता है।

हो सकता है कि इनकी स्थापना कोई बड़ा मुद्दा न हो क्योंकि सेनाएं बुनियादी बल स्तरों में योगदान देंगी जो आरंभिक चरणों के लिए अनिवार्य हैं। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण होगा कि अन्य विशेष बलों का अनुकरण किए बगैर अपनी भूमिका एवं दायित्व को निर्धारित करना जिससे कि प्रशिक्षण की प्रकृति और बल की उपकरण रूपरेखा का मूल्यांकन किया जा सके। इसमें अन्य सेनाओं के विशेष बल मुख्यालयों एवे एनएसजी के साथ परस्पर संपर्क शामिल है।

यह स्पष्ट है कि इस बल की गतिविधियों तथा प्रशिक्षण पर उन एजेन्सियों द्वारा नजर रखी जाएगी जो देश के प्रति विद्वेष का भाव रखते हैं। इस बल के लिए स्थायी छावनी का चयन करते समय इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसी के साथ-साथ यह क्षेत्र सुरक्षित भी होना चाहिए और इसे त्वरित गतिशीलता एवं तैनाती के लिए किसी वायु क्षेत्र के निकट भी होना चाहिए। बल को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किए जाने के विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। बल की स्थापना आरंभिक कदम है, इसके दायित्वों का निर्धारण और सही प्रकार से इसे समर्थ बनाना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है। ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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