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सेना को और मजबूत करनी होगी साइबर तकनीक

रक्षा मंत्री बिपिन रावत

सेना प्रमुख बिपिन रावत की यह चिंता और सलाह हर मायने में जायज तथा जरूरी है कि साइबर टेक्नॉलॉजी में आतंकवादियों को पछाड़े बिना आतंकवाद को खत्म कर पाना नामुमकिन है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि देश को साइबर वार से लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। क्योंकि साइबर वार न केवल परंपरागत युद्धों पर लागू होता है बल्कि गैर परंपरागत युद्ध यानी प्रॉक्सी वार पर भी लागू होता है। पर दिक्कत यह है कि इस लड़ाई से पार पाने का अपेक्षित ढांचा विकसित नहीं हो पाया है। हम अभी भी उम्मीद के मुताबिक टेक सेवी नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी भरपाई हमें करनी पड़ रही है।





दरअसल साइबर सुरक्षा की दृष्टि से भारत संयुक्त राष्ट्र की सूची में 23वें स्थान पर है। जबकि इंटरनेट के इस्तेमाल में भारत का स्थान दूसरा है। इस मामले में सिर्फ चीन हमसे आगे है और वह लगातार साइबर वारफेयर से निपटने के रास्ते खोजता रहता है। और वह काफी हद तक सक्षम भी है। यह सही है कि तीनों सेनाओं और विभिन्न रक्षा महकमों को साइबर हमलों से बचाने के लिए रक्षा मंत्रालय कमर कस चुका है तथा देश के महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों से बचाने के लिए साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है। पर चुनौतियों को देखते हुए इस काम में विशेष तेजी लाने की जरूरत है। मामला देश की सुरक्षा का है चाहे वह सीमा पार से आ रहे खतरे से हो या आतंकवादियों या देश के जंगलों में सक्रिय खतरनाक नक्सलियों से।

दो साल पहले यानी 2016 में गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि पांच वर्षों की तुलना में उस वर्ष साइबर अपराध में साठ फीसदी का इजाफा हुआ है। उसमें सेना एनआईए सहित एनजीटी की वेबसाइट इस दायरे में शामिल थी। उस समय सेना तथा अर्धसैनिक बलों के सभी कर्मचारियों को सोशल मीडया से दूर रहने की सलाह दी गई थी। पर सिर्फ ऐसे कदम से बात बनती नहीं है। जरूरत तो साइबर तंत्र को और विकसित करने की तथा अति सुरक्षित करने की है। हम जानते हैं कि साइबर वार में एक देश दूसरे देश के खिलाफ उसके कंप्यूटर नेटवर्क को जाम करने या उस पर कब्जा करने के लिए तरह-तरह के जुगाड़ लगाता है ताकि वह बिना किसी की नजर में आए अपने दुश्मन देश को तबाह कर सके। और इसमें उस देश के आचरण, सोच, मानसिकता, निगरानी से लेकर अफवाह तक को फैलाने का काम होता है। इसी का फायदा आज आतंकवादी अपने लिए उठा रहे हैं।

ऐसे में युद्धस्तर पर साइबर स्पेस मजबूत करने की खास जरूरत है। मौजूदा वक्त में साइबर आतंकवाद और साइबर हमले के माध्यम से जासूसी दो बड़े खतरे हमारे सामने हैं। और आतंकवादी साइबर स्पेस को मजबूत कर तकनीकी रूप से ताकतवर होते जा रहे हैं। कट्टरपंथ का ऑनलाइन प्रचार-प्रसार साइबर वार की देन है। आतंकी अपनी योजना, प्रशिक्षण, तालमेल यहां तक कि घाटी के युवाओं की भर्ती इसी के जरिए करते हैं। हमें याद रखना होगा कि आतंकी बुरहान वानी भी सोशल मीडिया की देन था। लिहाजा साइबर टेक्नॉलॉजी को सक्षम और सशक्त बनाने की है।

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