vishesh

प्रधानमंत्री के नाम एक खुली चिट्ठी…

प्रधानमंत्री मोदी
फाइल फोटो

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

चुनावों ने आपको एक अभूतपूर्व जनादेश दिया है। समाज के सभी वर्गों से जुड़े लोेगों ने आप पर अपना भरोसा जताया। आपका चुनाव अभियान सामान्य नहीं था और भविष्य के वादों से भरा लेकिन राष्ट्रवाद, पाक के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब देने में सशस्त्र बलों की दिलेरी पर आधारित था और इस प्रकार इसने धर्म, जाति और पंथ की पारंपरिक बाधाओं को तोड़ दिया। आपने जवाबी कार्रवाई करने का फैसला लिया, सशस्त्र बलों पर भरोसा किया और उन्होंने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया।





सरल शब्दों में कहा जाए तो आपके चुनावी अभियान ने सशस्त्र बलों के पेशेवर रुख का दोहन किया। वह आपको या देश को मायूस नहीं करते क्योंकि पिछले 70 वर्षों से ऐसा ही करते आ रहे हैं। फिर भी आप ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने उनकी सफलता पर भरोसा किया, इस जोखिम के बावजूद कि उनके विफल रहने की सूरत में आपका राजनीतिक कैरियर दांव पर लग जाता। इस फैसले का श्रेय आपको जाता है। उन पर भरोसा करने के लिए मैं आपको सैल्यूट करता हूं।

अब जब आप अपने दूसरे कार्यकाल के लिए चुन लिए गए हैं, देश आपसे अपेक्षा करता है कि सशस्त्र बलों के चुपचाप कार्य करने वाले सदस्यों के कल्याण के लिए आप विविध प्रकार से कार्य करेंगे।

आपका जनादेश अभूतपूर्व है और इसलिए आपके फैसले भी इसी के अनुरूप होने चाहिए। सबसे अहम और पहली जरूरत रक्षा के शीर्ष प्रबंधन में सुधार लाने की है जो एक ऐसा पहलू है जिसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी लेकिन उनके पद छोड़ते ही यह सुधार भी अपनी स्वाभाविक मौत मर गया। नौकरशाही का प्रभुत्व वाला रक्षा मंत्रालय सशस्त्र बलों की आवश्यकता के प्रति संवेदनशील होने की जगह हमेशा ही इसमें रोड़े अटकाता रहा है। इसने इसे तेजी से कार्यान्वित करने के बजाए देर करने तथा मनाही करने की नीति अख्तियार कर रखी है। इसमें बदलाव लाने की आवश्यकता है।

रक्षा के प्रबंधन में सुधार न करने का स्थायी कारण राजनीतिक सर्वसम्मति को बताया जाता रहा है लेकिन अब यह बहाना भी नहीं चलेगा क्योंकि आपके पास पर्याप्त बहुमत है। रक्षा मंत्रालय के साथ सेना मुख्यालय को जोड़े जाने से रक्षा का प्रबंधन बदल जाएगा और यह सशस्त्र बलों को अधिक प्रभावी एवं अनुकूल बना देगा।

भारत जैसे शक्तिशाली देश में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति तख्तापलट की आशंका से रुकी रही है। प्रधानमंत्री जी, मुझे पूरा भरोसा है कि आप अपने सेना प्रमुखों पर पूरा विश्वास करते हैं क्योंकि उनकी नियुक्ति आप स्वयं करते रहे हैं। आप इससे सहमत होंगे कि तख्तापलट न तो भारतीय संस्कृति में है और न ही कभी सशस्त्र बलों के दिमाग में यह रहा है।

ऐसी फितूर कल्पना केवल वैसे लोग ही करते हैं जो सशस्त्र बलों को नीचा दिखाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि देश कभी भी अपनी पूरी लड़ाकू क्षमता का उपयोग न कर सके। जो ऐसे विचारों को फैलाते हैं, वे राष्ट्रद्रोही हैं। आप अपने सशस्त्र बलों पर भरोसा करें जिनके पेशेवर कौशलों की बदौलत आप फिर से सत्ता में लौट सकने में कामयाब रहे और एक सीडीएस की नियुक्ति के जरिये उसे और प्रभावी बनाएं। इससे अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भारतीय सेना की स्थिति और प्रतिष्ठा में और इजाफा होगा।

सेना की क्षमताओं से संबंधित ढेर सारी रिक्तियां हैं जिन्हें भर पाने में यूपीए सरकार विफल रही है। आपने अपने पहले कार्यकाल में कई सारे करार और सौदे किए तथा उनमें से कई कमियों को दूर किया। सभी प्रकार की खरीदों के नौकरशाही, जिनकी राष्ट्रीय सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं है, के हाथों में रहने के कारण स्वचलित रक्षा मंत्रालय में हमेशा देरी होती रहेगी और सेना प्रमुख परेशान होते रहेंगे। अगर रक्षा मंत्रालय समेकित नहीं हुआ तो देश को ही इसका नुकसान होगा। खतरे बढ़ रहे हैं जबकि क्षमताओं में ह्रास हो रहा है, इसलिए भारत को एक सक्षम रक्षा मंत्री की जरुरत है।

आपने अपने पिछले कार्यकाल में पूर्व सैनिकों को एक रैंक एक पेंशन दिया जिसके लिए हम हमेशा आपके कृतज्ञ रहेंगे। अब वर्तमान में सेवारत जवानों की स्थिति को दूसरी सेनाओं के समकक्ष लाने की आवश्यकता है, सशस्त्र बलों ने कभी भी अतिरिक्त तनख्वाह नहीं बल्कि सम्मान और समानता की मांग की है।

दूसरी सेनाओं को स्वीकृत गैर-कार्यशील उन्नयन (एनएफयू) से बहुत मायूसी है, खासकर, जब सशस्त्र बलों का एक ढांचा रहा है और कई अपने कैयिार के आरंभ में ही दूसरी सेनाओं में अपने से जूनियरों की तुलना में भी पद में पीछे छूट जाते हैं। वे आर्थिक कारणों से एनएफयू नहीं चाहते बल्कि वे फिर से दूसरों के बराबर और समकक्ष स्थिति चाहते हैं। एक प्रधानमंत्री के बतौर आप ऐसा सुनिश्चित कर सकते हैं।

अब आप एक नया रक्षा मंत्री नियुक्त करेंगे। क्या मैं आपसे एक ऐसे व्यक्ति को चुनने की गुजारिश कर सकता हूं, जो सरकार में वरिष्ठ पद पर हो, फैसले लेने में सक्षम हो और वित्त मंत्रालय की तरफ से मनाही के लिए आशंकित न हो। उसे आपका विश्वास हासिल होना चाहिए और आपके विजन के अनुरूप होना चाहिए कि सशस्त्र बल क्या हासिल करने में सक्षम हैं और भविष्य की उसकी संरचना कैसी होनी चाहिए। आपसे एक विनम्र अनुरोध है कि रक्षा मंत्री के पद को घूमने वाली कुर्सी न बनायें।

आप ने सेना प्रमुखों के लिए बेहतर योग्यता एवं क्षमता की प्रक्रिया अपनाई है। दूसरे शब्दों में, कुछ वैसे लोग जो विचार किए जाने के स्तर पर तो पहुंच गए हैं लेकिन उनमें कुछ पूर्व आवश्यकताओं की कमी है। यह अस्वाभाविक प्रतीत होता है क्योंकि उनका वर्तमान रैंक एवं नियुक्ति अपने पिछले कार्यकाल में आपकी सरकार द्वारा ही की गई है। ऐसे कदम सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण के दरवाजे खोलते हैं और जो लोग शीर्ष पर पहुंचने की जुगत में लगे होते हैं, वे अपने लाभ के लिए राजनीतिज्ञों का सहारा लेने लगते हैं। एक अराजनीतिक सशस्त्र बल के लिए यह एक अच्छी बात नहीं हे। इसलिए सेना प्रमुखों की नियुक्ति के योग्य होने से पूर्व कृपया उनकी अच्छी तरह जांच कर लीजिए। इस नियुक्ति को पूरी तरह वरिष्ठता पर आधारित ही होने दीजिए।

इसके बावजूद कि राष्ट्रपति सर्वोच्च कमांडर होते हैं, आप देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और सशस्त्र बल देश की सेवा करते हैं। इसलिए, आपको सेना प्रमुखों की बात पर ध्यान देना चाहिए, उनसे नियमित अंतराल पर मिलते रहना चाहिए और उनकी समस्याओं के लिए समाधान के लिए उनका संरक्षक बनना चाहिए। ये कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर केवल आप ही दिशानिर्देश दे सकते हैं। आपकी ओर से उठाया गया एक छोटा सा कदम सेनाओं के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा।

आप जब भी विदेश का दौरा करते हैं तो संयुक्त सैन्य अभ्यासों से संबंधित एक समझौता हमेशा किया जाता है। इससे संकेत मिलता है कि दुनिया भारतीय सशस्त्र बलों के पेशेवर रवैये और क्षमता का सम्मान करती है। अगर भारतीय सेना को सही गुणवत्ता के हथियार नहीं मिलते, उसका राजनीतिकरण किया जाता है और वह एक गैर अनुकूल संगठन, जैसेकि वर्तमान रक्षा मंत्रालय के तहत कार्य करती है तो वह नुकसान में रहेगी।

राष्ट्र सशस्त्र बलों का उसकी वीरता और पेशेवर रवैये के कारण सम्मान करता है। इसलिए, जब आप उनकी चिंता करते हैं तो उन्हें उनका उचित सम्मान देते हैं तो आपके प्रति उनकी इज्जत और भी बढ़ेगी। सशस्त्र बलों ने लंबे समय से ऐसे नेता का इंतजार किया है जिसके पास एक मजबूत जनादेश हो। अगर अब भी बदलाव नहीं किए गए तो हो सकता है कि एक बहुमूल्य अवसर हाथ से चला जाए जो फिर कभी वापस नहीं आए।

कई लोगों का सुझाव है कि भले कोई भी सरकार सत्ता में क्यों न हो, रक्षा मंत्रालय में कोई परिवर्तन नहीं होगा। बहरहाल, मुझे उम्मीद और भरोसा है कि आप बदलाव का सूत्रपात करेंगे और हो सकता है इस खुले पत्र पर प्रतिक्रिया भी देंगे।

जय हिंद

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है। ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

Comments

Most Popular

To Top