Air Force

एयरफोर्स की ऑनलाइन परीक्षा, एक अनुकरणीय पहल

वायुसेना

वायुसेना ने एयरमैन के चयन के लिए पहली बार ऑनलाइन परीक्षा आयोजित कर पूरे देश के युवाओं को इस बात का अवसर प्रदान किया कि अब हर आवेदक यह परीक्षा देकर अपनी योग्यता व प्रतिभा के आधार पर चयनित एयरफोर्स में शामिल हो सकता है। वायुसेना की ऑनलाइन टेस्ट करवाने की यह पहल सराहनीय है और अनुकरणीय भी है।





दरअसल पहले भी एयरमैन परीक्षा के लिए तकरीबन चार लाख आवेदन मिलते थे लेकिन परीक्षा केंद्रों में सीटों की क्षमता सीमित होने की वजह से केवल 80,000 आवेदकों को परीक्षा मे शामिल होने के लिए बुलाया जाता था और चयन का आधार होता था 12वीं परीक्षा में प्राप्त अंक। इससे बाकी आवेदकों को निराशा हाथ लगती थी, जबकि उनमें भी योग्यता व प्रतिभा होती थी, जिसका प्रदर्शन वे नहीं कर पाते थे। पर इस बार की परीक्षा में पूरे आवेदकों को मौका मिला। आंकड़ें बताते हैं कि इस परीक्षा के लिए 4,09,169 आवेदकों ने पंजीकृत कराया और वे देश भर के 102 शहरों में फैले 439 परीक्षा केंद्रों में शामिल हुए। खास बात यह रही कि इनमें 100 से ज्यादा केंद्र उत्तर पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर में बनाए गए जो इस बात की ओर इंगित करता है कि घाटी तथा देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है और उन्हें देश के प्रति जागरुक एवं जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जाहिर है कि इसका लाभ आगे चलकर समाज और देश को होगा। पहले इन इलाकों से युवाकों का सीमित प्रतिनिधित्व रहता था और तमाम योग्य, प्रतिभाशाली युवा उम्मीदवार भी नहीं बन पाते थे। वायुसेना का यह कदम पूरी तरह से उल्लेखनीय है।

हकीकत में इस ऑनलाइन परीक्षा का पहला वायुसेना मुख्यालय की नई नीति का हिस्सा है ताकि आधुनिकतम तकनीक वाली शस्त्र प्रणालियों और मंचों पर काम करने के लिए संबंधित फोर्स को कुशल एवं श्रेष्ठ युवा मिल सकें। नई ऑनलाइन परीक्षा का फायदा यह हुआ कि आठ गुना से अधिक आवेदक परीक्षा मे बैठ पाए। अन्य दोनों सेनाओं- भारतीय थलसेना, भारतीय नौसेना को भी इसी तरह की पहल करने की जरूरत है ताकि विशाल देश के दूरदराज के इलाकों में रह रहे युवा भी सेना में शामिल होकर देश के प्रति अपने कर्तव्य तथा समाज की जिम्मेदारियों का निर्वहन भलीभांति कर सकें। राज्यों की पुलिस भर्ती प्रणाली को भी वायुसेना की इस नई ऑनलाइन परीक्षा से सीखने-समझने की जरूरत होगी, जो भारत सरकार के पुणे स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) के सहयोग से आयोजित की गई।

ऐसे में युवाओं एवं अभिभावकों को भी खुद की मेहनत पर भरोसा तथा पत्र-पत्रिकाओं से प्राप्त जानकारी के जरिए जागरूकता लानी होगी। आज सेना और पुलिस में नौकरी दिलवाने के झूठे वायदे करने वाले दलाल और माफिया सक्रीय हैं। सेना में शामिल होने को आतुर और दलालों के चंगुल में फंसे युवाओं के तमाम फर्जी भर्तीकांड रोज अखबार की सुर्खियां इसलिए बन रहे हैं क्योंकि उन उम्मीदवारों को सेना की भर्ती प्रक्रिया पर कम, दलालों पर अधिक भरोसा है। इस प्रवृति से जल्द उभरने की जरूरत है।

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