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आतंकवाद के खात्मे तक हो पाक के खिलाफ कार्रवाई

एयर स्ट्राइक
फाइल फोटो

पाकिस्तान अगर यह समझ बैठा हो कि भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान रिहा कर वह पूरी दुनिया में आतंकवाद के काले धब्बों को धो लेगा और भारत उसके किसी तरह के झांसे में आ जाएगा तो यह उसकी बड़ी भूल होगी। पुलवामा आतंकी हमले में 40 जांबाज जवानों की शहादत के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित बालाकोट आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर यह जता दिया है कि आतंकवाद का खात्मा कर ही वह दम लेगा। उसने पाक को चेता दिया है कि अगर पाकिस्तान की धरती पर आतंक की फसल उगाने वाले आतंकी शिविरों पर वह कार्रवाई नहीं करेगा तो भारत सीमा पार कर आतंकियों के सरगनाओं वह उनके ठिकानों को ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। लिहाजा पाकिस्तान की सरकार और वहां की आवाम को अब इस ओर सोच कर आगे कदम बढ़ाना चाहिए। पिछले कुछ दिनों में भारत ने यह भी जता दिया है कि पाकिस्तान का कोई भी दुस्साहस उसे हर तरीके से भारी पड़ेगा। यदि इस बात को पड़ोसी देश समझ लेता है तो इसी में उसकी समझदारी निहित है।





दरअसल भारत ने लंबे समय तक आतंक का दंश झेला है। इस दौरान सेना और सुरक्षा बलों के तमाम जवान शहीद हुए हैं, तमाम जिंदगियां समाप्त हुई हैं। युवाओं और किशोरों को भटका कर उन्हें आतंकी की अंधी गुफा की ओर झोंका गया है। भारत ने पड़ोसी देश को आतंकी के मुद्दे पर हर तरह से और हर स्तर पर समझाने की कोशिश की। कार्रवाई के लिए पुख्ता सबूत दिए पर उसने लीपापोती की। उसे यहां तक बताया गया कि पाक में आतंक के अड्डे चल रहे हैं। हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाउद्दीन चौधरी, लश्कर-ए-तैयबा का हाफीज सईद और जैश-ए-मोहम्मद का मसूद अजहर पाकिस्तान की जमीन से ही आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहा है। पर बहानेबाज और पैंतरेबाज पाकिस्तान ने पाबंदी लगाने का सिर्फ ढोंग किया। भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव के बाद अब जाकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कबूला है कि जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में है। भला ऐसे कैसे हो सकता है कि पाकिस्तान की जमीन पर बालाकोट में आतंकी ठिकाना हो और वहां की सरकार को पता न हो?

ऐसे में जरूरी है कि भारत विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का स्वागत करे लेकिन पाकिस्तान की कुटिल चालबाजियों और पैंतरेबाजी से बेहद सचेत और सतर्क रहे। उड़ी व पुलवामा हमले के ‘नए भारत’ ने जब आतंकवाद के समूल नाश का बीड़ा उठा ही लिया है तो अंतिम प्रहार तक उसका रुख अत्यंत अक्रामक और निर्मम होना चाहिए। देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और सेना के पराक्रम का ही प्रतिफल है कि पाकिस्तान की जमीन पर बना बालाकोट आतंकी ठिकाना नेस्तानाबूद हुआ और भारतीय सैन्य अड्डों को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मुंह की खानी पड़ी। भारतीय वायुसेना के वायुवीरों ने उन्हें खदेड़ दिया।

हालात तो सामान्य कतई नहीं हैं। हो सकता है कि लंबे समय तक भी सामान्य तब तक न रहें जब तक कि सीमा के इस पार और सीमा के उस पार आतंकवाद की कमर टूट नहीं जाती। लिहाजा देश के हर नागरिक को सजग व जिम्मेदार रहने की जरूरत है ताकि देश में अमन बना रहे और हमारी सेनाएं तथा सुरक्षाबल उच्च मनोबल के साथ अपने ऑपरेशनों में मुस्तैद रहें। राजनेताओं को भी इस माहौल में राजनीति के बजाए राष्ट्रनीति पर ध्यान देने और उस पर पहल करने की विशेष जरूरत है।

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