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चार राज्यों की पुलिस की नई पहल से टूटेगी अपराधियों की कमर !

पुलिस (फोटो साभार - गूगल)

हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की पुलिस ने संगठित अपराधियों, गिरोहों की गतिविधियों, मादक पदार्थों तथा अवैध हथियारों की तस्करी करने वालों की जानकारी साझा करने और इनका दमन करने के लिए हाथ मिलाया है। इसी के तहत गुरुग्राम (हरियाणा) में ‘अंतरराज्यीय अपराध सूचना सचिवालय’ स्थापित किया जायेगा जो अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए काम करेगा। चारों राज्यों की पुलिस की यह संयुक्त पहल फौरी तौर पर आम आदमी को राहत देने वाली और जरायम पेशा लोगों के लिए भय पैदा करने वाली है। पर बात सिर्फ बैठक करने और बैठक में चर्चा कर लेने भर से बनती नहीं है। इस पर पूरी निष्ठा, समर्पण के साथ चारों राज्यों के संबंधित वरिष्ठ पुलिस अफसरों को काम करना होगा, वो भी लगातार।





हालांकि दिल्ली और उससे सटे राज्यों की पुलिस एक-दूसरे के साथ अपराध पर अंकुश लगाने, अपराधियों की धर-पकड़ तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर में अंतरराज्यीय समन्वय बैठकें होती रहती हैं और उनके सार्थक परिणाम भी निकलते हैं। पर बीते दिनों में दिल्ली ही नहीं, एनसीआर में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। वजह है आबादी का बढ़ना और उसके अनुपात में पुलिस बल का अपर्याप्त होना। सभी राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इससे सहमत हैं। लिहाजा सरकारों को इस ओर विशेष तथा अतिशीघ्र ध्यान देने की जरूरत है। देखने में आता है कि एनसीआर स्थित तमाम थाना-चौकी में बुनियादी सुविधाओं तथा संसाधनों की कमी है। ऐसे में पेशेवर अपराधियों से भला कैसे निपटा जा सकेगा? और सिर उठाते नए अपराधियों में किस तरह भय और खौफ पैदा किया जा सकेगा? इसलिए इस बात को स्वीकार कर काम करने की जरूरत गुरुग्राम में बनाए जा रहे नए अंतरराज्यीय अपराध सूचना सचिवालय को होगी। सूचनाएं मिलना, एक-दूसरे राज्य की पुलिस के साथ उसे साझा करना एक अलग बात है और उस सूचना के आधार पर अपराध और अपराधी पर काबू पाना दूसरी बात है। इस तथ्य को शीर्ष पुलिस अधिकारी बखूबी जानते हैं। लेकिन अपराधियों पर नकेल कसने और अपराध पर काबू पाने के लिए जरूरी टेक्नॉलॉजी व पुलिसकर्मियों में पूर्ण दक्षता की कमी से इस पूरे क्षेत्र में सामान्य कानून व्यवस्था में गिरावट को लेकर आम जनता में चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। दिल्ली के 163 थानों में 700 महिला पुलिसकर्मियों समेत करीब 8,000 बीट अफसरों की तैनाती से हालात कुछ हद तक बेहतर हैं। पर अन्य राज्यों में पुलिस बल की कमी व अन्य कारणों से आए दिन आपराधिक घटनाएं अखबार की सूर्खियां बनती रहती हैं जो बेहद चिन्ताजनक है।

ऐसे में चारों राज्यों की पुलिस की यह साझा पहल तभी सार्थक और कामयाब होगी जब पुलिस तंत्र को सक्षम, सशक्त व अति आधुनिक बनाने पर सभी सरकारों और शीर्ष पुलिस अफसरों का ध्यान तथा पूरी मंशा होगी। इसी परिप्रेक्ष्य में यह भी गौरतलब है कि करीब एक दशक पहले सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों पर सात सूत्री दिशा-निर्देश जारी किए थे उनकी अनदेखी आज पुलिस तंत्र के साथ-साथ सामान्य कानून व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। इससे पहले कि अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण से जुड़ी आगामी बैठक तीन महीने बाद हो उससे पहले हर पहलू पर बारीक नजर व निगरानी तंत्र चारों राज्यों की पुलिस को विकसित करना होगा। तभी पहल उद्देश्यपूर्ण होगी।

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