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26 जनवरी पर विशेष: आइए, प्रहरियों के जोश और जज्बे को सलाम करें

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस पट्टी





आज पूरा देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। भारत के शौर्य, गौरव तथा सांस्कृतिक विविधता से भरी झांकी को पूरी दुनिया देख रही है। भारतीय सेना, सशस्त्र बल और पुलिस के साहस, पराक्रम तथा अनुकरणीय योगदान की गाथाएं राजपथ से लेकर दूरदर्शन, आकाशवाणी समेत पूरी मीडिया में देखी, सुनी और पढ़ी जा रही हैं। पर हम सबको याद रखना होगा कि आज 26 जनवरी का दिन सिर्फ राष्ट्रीय पर्व ही नहीं बल्कि उन बलिदानी वीरों और महावीरों की याद का भी पर्व है जिनकी बदौलत आजादी मिली। उसके बाद संविधान बना। और वह लागू हुआ कि एक संपूर्ण, स्वस्थ आचार-संहिता, नियम-कानूनों के तहत तथा एक मजबूत संवैधानिक ‘छाते’ के नीचे हम सब रह सकें। बदली हुई स्थितियों- परिस्थितियों के बीच आज गणतंत्र दिवस पर देश के हर नागरिक को गणतंत्र की रक्षा के लिए सजग व सचेत रहने की जरूरत है। अलावा इसके     नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित की जाने वाली 26 जनवरी की परेड इस बात की भी प्रतीक है कि हम भारत के नागरिक जान सकें और पूरी दुनिया को भी बता सकें कि भारत नए परिवेश में अपने रक्षा-पराक्रम में कहां पर है और सांस्कृतिक विविधता उसकी एक विशेष विरासत है।

लेकिन देश-दुनिया के वर्तमान हालात में हम सभी भारत के नागरिकों को एक बात विशेष रूप से जाननी और समझनी होगी। और वह है- संविधान और सेना का हर कीमत पर सम्मान। जिस तरह भारतीय संविधान की मजबूत छाया में हम सभी नागरिक हर तरह से सुरक्षित हैं। उसी तरह सेना, सशस्त्र बल और पुलिस के उच्च कर्तव्य पालन से ही हम चैन की नींद सो पाते हैं। जब हम चैन की नींद सो रहे होते हैं तब ये जवान बर्फीली हवाओं, तपती रेत, दलदली जगहों, जंगली-दुर्गम क्षेत्रों, गली-चौराहों में धूल-धुएं के बीच अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। और जरूरत पड़ने पर सुनामी, बाढ़ या ऐसी किसी भी आपदा के समय पूरी मुस्तैदी के साथ अपना कर्तव्य पालन कर वापस अपने बैरकों में चले जाते हैं। यह उनकी निष्ठा तथा उनके अनुकरणीय अनुशासन को दर्शाता है।

इसलिए आज राष्ट्रीय पर्व (26 जनवरी) पर हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि केवल आज ही नहीं, पूरे साल और प्रतिक्षण उनका दिल से सम्मान करने का जज्बा बना लें। आपको भी लगता होगा कि इन सैनिकों और जवानों के जज्बे का कोई सानी नहीं है। उन्हें जब देश के हर नागरिक का शहरों से लेकर गांव-मुहल्ले तक सम्मान मिलता है तो उनका सीना चौड़ा हो जाता है। इसलिए हम सभी नागरिकों को यह बात बड़ी शिद्दत और समझदारी से समझनी होगी कि फौजियों का सम्मान यानी देश का सम्मान। हम इन पक्तियों के माध्यम से इस बात को फिर दोहराना चाहते हैं कि घर-गांव, मोहल्ले, कस्बे, शहर, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जहां भी ये सैनिक मिलें। इनका सम्मान करें। और इनकी गैर-मौजूगी में इनके माता-पिता और बच्चों का सहयोग जहां भी अपेक्षित हो उसे कर्तव्य मानकर करें। इसी भावना के साथ यदि सभी नागरिक अपनी ड्यूटी निभाएंगे तो एक मायने में इन जांबाजों के लिए वही सर्वोच्च सम्मान होगा।

आज के इस अवसर पर केंद्र और राज्यों की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को भी उन फौजियों की परेशानियों, जरूरतों पर बिना हीला-हवाली के ध्यान देने की जरूरत है जो सेवानिवृत हो चुके हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। आइए, हम सभी का कर्तव्य बनता है कि हम सेना, सुरक्षाबल व पुलिस को जानें, उन्हें समझें और उनसे जुड़ें। आज 26 जनवरी के दिन हमें यह बात गांठ बांधनी होगी तभी  गणतंत्र दिवस मनाना सार्थक कहा जाएगा।

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