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स्पेशल रिपोर्ट:  गगनशक्ति–एयरफोर्स करेगी असम से राजस्थान तक लड़ाई का अभ्यास

नई दिल्ली। देश पर युद्ध के मंडराते बादल के बीच भारतीय वायुसेना ने ल़ड़ाई की अपनी तैयारी का परीक्षण करने के लिये 11 से 22 अप्रैल तक देश व्यापी अभ्यास गगनशक्ति-2018 का आयोजन किया है जिसमें न केवल वायुसेना के करीब सभी 11 सौ लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर आदि भाग लेंगे बल्कि थलसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के अलावा अन्य संसाधनों को भी सक्रिय किया जाएगा।





दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ने की वायुसेना की क्षमता की होगी परख

माना जा रहा है कि गगनशक्ति अभ्यास में दो मोर्चों पर भारतीय वायुसेना की एक साथ युद्ध लडने की क्षमता को परखा जाएगा। असम से लेकर राजस्थान तक इस अभ्यास में वायुसेना के देश भर में स्थित वायुसैनिक अड्डों और एडवांस्ड लैंडिग ग्राउंड का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस अभ्यास के दौरान लडाकू विमानों को हवाई सुरक्षा और हवाई युद्ध में उतारा जाएगा। इस दौरान देश भर में यात्री विमानों की उड़ानें मामूली तौर पर प्रभावित होंगी। नागरिक विमानन को भी इस अभ्यास में सहयोग देने को कहा गया है।

अब तक का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभ्यास

गगनशक्ति अभ्यास देश में अब तक आयोजित अपनी तरह का सबसे बड़ा अभ्यास होगा और इसमें एक साथ उत्तरी औऱ पश्चिमी सीमाओं पर भारतीय वायुसेना की हमलावर औऱ रक्षात्मक क्षमता का परीक्षण होगा। इस दौरान वायुसेना द्वारा विकसित नई आक्रमण रणनीति का भी परीक्षण होगा।

भारत में बना तेजस लड़ाकू विमान भी होगा शामिल

 

चूंकि भविष्य में किसी भी युद्ध में वायुसेना को थलसेना और नौसेना के तालमेल से कार्रवाई करनी होगी इसलिए वायुसेना के साथ थलसेना और नौसेना भी अपने सभी संसाधन तैनात करेंगी। इस अभ्यास में वायुसेना की इलेक्ट्रानिक युद्ध क्षमता का भी गहन परीक्षण होगा। अभ्यास में पहली बार भारत में बने हलके लडाकू विमान तेजस को भी लड़ाकू भूमिका में शामिल किया गया है।

 दुश्मन के इलाके में जवानों को उतारने की कार्रवाई का भी होगा अभ्यास

 

इस अभ्यास में अवाक्स टोही विमानों के तालमेल से लड़ाकू विमानों को लड़ाकू भूमिका में उतारा जाएगा। अभ्यास के दौरान पर्वतीय इलाकों में एक घाटी से दूसरी घाटी तक जवानों को मिनटों में तैनात करने की क्षमता को भी परखा जाएगा। अभ्यास के दौरान विमानों में तैनात होने वाली लम्बी दूरी की मिसाइलों का भी परीक्षण होगा। अभ्यास के दौरान विमानों से स्पेशल फोर्सेज को भी दुश्मन के इलाके में उतार कर कार्रवाई करने का अभ्यास किया जाएगा।

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