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कुलभूषण की फांसी की सजा पर अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट की रोक, भारत ने रखी ये दलीलें

कुलभूषण-जाधव

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में भारत को कूटनीतिक जीत मिली है। नीदरलैंड के हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने जाधव की फांसी की सजा पर धारा 74 के अंतर्गत रोक लगा दी है। पाकिस्तान की अदालत ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को देश में गड़बड़ी फैलाने, जासूसी करने सहित कई धाराओं के अंतर्गत दोषी करार देते हुए सजा-ए-मौत दी है। भारत ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत के इस फैसले के खिलाफ इस अदालत में 8 मई को अपील की थी। जिस पर अब 15 मई को सुनवाई होगी। कुलभूषण मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपने सेना प्रमुख जावेद कमर बाजवा से बातचीत की है। नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि हम इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले की समीक्षा कर रहे हैं और अगले कुछ दिनों में विदेश मंत्रालय इस पर बयान जारी करेगा।





भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि उन्होंने कुलभूषण जाधव की मां को फोन कर ये जानकारी दी। विदेश मंत्री ने बताया कि कुलभूषण जाधव के केस की पैरवी भारत की ओर से प्रख्यात वकील हरीश साल्वे कर रहे हैं।

दूसरी तरफ जाधव से पूछताछ के लिए ईरान ने उनसे मुलाक़ात की इजाजत मांगी है। ईरान के राजनयिक मोहम्मद रफी ने क्वेटा में प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने इस मामले में अभी कुछ नहीं बताया है। गौरतलब है कि जाधव को ईरान से ही पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों ने अगवा कर लिया था।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

नीदरलैंड के हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

भारत ने कोर्ट में पाकिस्तान के खिलाफ तीन दलीलें दीं

  • भारत ने अपनी अपील में पाकिस्तान पर विएना समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
  • कुलभूषण जाधव को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
  • भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को जाधव से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

कोर्ट ने पाकिस्तान को दिए निर्देश

  • सरकार तय करे कि कुलभूषण जाधव को फांसी ना हो।
  • पाकिस्तान सरकार जो भी कदम उठाए, उसकी जानकारी हमें दे।
  • ऐसा कदम ना उठाएं, जो कुलभूषण के अधिकारों का हनन करे।

इम मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जाधव के साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने साथ ही कहा कि भारतीय राजनयिकों को जाधव से मिलने देने का 16 बार इजाजत मांगी, जिसे खारिज कर दिए जाने के बाद हम अंतर्राष्ट्रीय अदालत गए। बागले ने कहा कि दुर्भाग्य से, हमें कुलभूषण जाधव के ठौर-ठिकाने की कोई जानकारी नहीं। हमें यह भी पता नहीं कि वह किस हाल में है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जाधव की मां की ओर से पाकिस्तान की अदालत में दायर याचिका की स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली है।

1961 में हुए विएना समझौते के तहत स्वतंत्र देशों के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक नई रुपरेखा तय की गई थी। भारत ने कोर्ट में कहा कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया, जहां वह सेना से रिटायर होने के बाद व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त थे। उनकी गिरफ्तारी के काफी समय बाद तक पाकिस्तान ने कोई सूचना नहीं दी। इतना ही नहीं, पाकिस्तान आरोपी के मानवाधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रहा है।

भारत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में उसका अंतिम फैसला आने तक कोई कदम न उठाए। उसने पाकिस्तान सरकार से जाधव के मानवाधिकारों का सम्मान करने को कहा। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को एक पत्र भी भेजा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 मई को होनी है।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना की अदालत ने इस साल 10 अप्रैल को जासूसी और आतंकवाद का आरोप लगाते हुए जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर भारत ने उसे आगाह किया था कि बिना किसी सुनवाई या बचाव का मौका दिए जाधव को फांसी की सजा देना सोची समझी हत्या माना जाएगा।

सैन्य अदालत ने जाधव को सजा के खिलाफ अपील के लिए 60 दिन का मौका दिया था। भारत ने जाधव की ओर से अपील दायर करने और उससे संपर्क की मांग पाकिस्तान के समक्ष रखी, लेकिन पाकिस्तान ने इसे ठुकरा दिया था। उसका कहना है कि किसी जासूस को राजनयिक संपर्क की इजाजत नहीं दी जा सकती।

कुलभूषण की सजा पर रोक लगवाने में सफल रहा भारत: निकम

कानून विशेषज्ञ उज्जवल निकम ने जलगांव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कुलभूषण जाधव को बचाने की प्रक्रिया के पहले चरण में भारत सफल रहा है। हालांकि उन्होंने आगे कहा कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के निर्णय को पाकिस्तान अमान्य कर सकता है। उज्जवल निकम ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय समाधानकारक है।

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