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क्या कभी भूल पाएंगे आप मंजूर के ये आखिरी शब्द…

मंजूर-अहमद-नाइक

त्राल। ‘कोई बात नहीं काम पूरा हुआ, मैं जा रहा हूं लेकिन बहुत सी जिंदगिया रोशन होंगी।’ 33 साल के मंजूर अहमद नाइक के ये अंतिम शब्द भले ही आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने की बात कहते हैं लेकिन उन्होंने देशभक्ति की ऐसी मिसाल पेश की जो जल्दी भुलाए नहीं भूलेगी और आगे भी प्रेरणा देती रहेगी। मंजूर अहमद जम्मू-कश्मीर पुलिस के कांस्टेबल थे। उनकी पत्नी गर्भवती है। यह मंजूर को पता था लेकिन देशभक्ति उनके दिलों में हिलोरे मार रही थी। सो, उन्होंने जान की बाजी लगाकर दो आतंकियों को दूसरी कोशिश में मार गिराया। मंजूर उड़ी के रहने वाले थे। उनका एक भाई और एक बहन है। उनके पिता का नाम फकीर अहमद नाइक है। मंजूर का चार साल का बेटा आरजू भी है।





त्राल-मुठभेड़

वह जगह जहां आतंकियों से मुठभेड़ हुई

घटना शनिवार की है, पुलवामा जिले के त्राल के हाफू गांव में एक मकान में कुछ आतंकी छिपे थे। इस अभियान में मंजूर खुद ही शामिल हुए थे। मंजूर को साथियों ने कहा भी कि तुम पिता बनने वाले हो, अच्छा रहेगा कि तुम मत जाओ। लेकिन मंजूर को यह नामंजूर था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन अगर कामयाब होगा तो ना जाने कितने लोगों की जिंदगियां बच जाएंगी।

मुठभेड़ शाम 6 बजे शुरू हुई। कुछ घंटे बाद अफसरों ने उस मकान में विस्फोटक लगाने की योजना बनाई, तो मंजूर ने इस काम को करने का बीड़ा उठाया। कुछ देर बाद मंजूर अंधेरे में आतंकियों की गोलियों से बचते बचाते लक्ष्य तक पहुंच गए। इसी बीच आतंकियों ने उन्हें देख लिया और दाग दीं दनादन गोलियां। लेकिन मंजूर ने चार्जर (सड़क निर्माण के दौरान प्रयोग होने वाला विस्फोटक) लगा दिया था। वह किसी तरह बचकर आ गए। शायद उनका काम पूरा नहीं हुआ था।

त्राल-मुठभेड़

आतंकियों से मुठभेड़ के बाद जवान

अवंतीपुर के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, उन्होंने मंजूर को अपनी जान की परवाह करने को कहा था क्योंकि इस तरह के अभियान चलते रहते हैं। कुछ देर बाद मंजूर के लगाए विस्फोटकों में धमाका किया गया पर मकान पूरी तरह नहीं गिरा। इसके बाद तड़के तक दोनों तरफ से फायरिंग होती रही। अफसर चाहते थे कि सूरज निकलने से पहले ऑपरेशन खत्म हो जाए क्योंकि आतंकी समर्थन भीड़ उग्र हो रही थी। सुबह और मुश्किल हो जाती।

इसी बीच मेजर के नेतृत्व में पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के जवानों ने आतंकियों के छिपे होने की जगह पर दाखिल होने का फैसला किया। लेकिन आतंकियों ने ऐसा नहीं होने दिया। उनकी फायरिंग और ग्रेनेड हमलों में 42 आरआर (राष्ट्रीय राइफल्स) के आर. रिशी, राज्य पुलिस के जवान गुलजार अहमद व सीआरपीएफ कर्मी राम सिंह समेत 5 जवान जख्मी हो गए। मेजर के नाक और ऊपर के जबड़े में गोली लगी है। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

अब मकान में फिर से विस्फोटक लगाने का फैसला किया गया। इस दफा भी मंजूर ने कहा कि कोई और नहीं, मैं ही जाऊंगा। वह गए विस्फोटक लगाने लेकिन इस बार वह आतंकियों की गोलियों की जद में आ गए। उन्हें पांच गोलियां लगीं। लेकिन इसी हालत में वह विस्फोटक लगाने में कामयाब हो गए। मकान जब गिरा तो उन्होंने कहा कि ‘काम पूरा हुआ, मैं जा रहा हूं, बहुत सी जिंदगियां रोशन होंगी।’

मंजूर अहमद

मंजूर अहमद को कंधा देते अधिकारी

रविवार को उनका शव श्रीनगर जिला पुलिस लाइन में लाया गया। जांबाज जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्री अल्ताफ बुखारी आए थे। राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. एसपी वैद के अलावा सेना व सीआरपीएफ के सीनियर अफसरों ने भी शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद दोपहर में उन्हें उनके गांव सलामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। यहाँ एसएसपी बारामुला इम्तियाज हुसैन ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

पुलिस-महानिदेशक-वैद

पत्रकारों को घटनाक्रम की जानकारी देते डीजीपी

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