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दरोगा-प्लाटून कमांडरों के भर्ती परीक्षा परिणाम रद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 4010 दरोगा व प्लाटून कमांडरों के भर्ती परिणाम पर एकल पीठ के निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की विशेष अपील को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय में हस्तक्षेप करने से भी मना कर दिया है। मामले में कुछ अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के चयन के तरीके को चुनौती दी थी। आपको बता दें कि इस परीक्षा की चयन सूची जारी करने के बाद सरकार चुने हुए दरोगाओं की ट्रेनिंग भी शुरू करवा चुकी थी।





हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि एकल पीठ के निर्णय पर दायर अपील खारिज की जाती है और इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। अपने ताजा निर्णय में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस अमरेश्वर प्रताप शाही और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने कहा कि एकल पीठ ने अपने निर्णय में असफल अभ्यर्थियों के परिणाम को चुनौती देने को सही माना था।

पेश मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की पीठ की ओर से 24 अगस्त 2016 को दिए निर्णय के खिलाफ यह विशेष अपील दायर की थी। तब अदालत ने अपने फैसले में सब इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर पद पर भर्ती के लिए जारी परिणामों को मुख्य लिखित परीक्षा के स्तर से खारिज करते हुए, चयन सूची निर्धारित नियमों के अनुसार फिर से जारी करने के निर्देश दिए थे।

हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती बोर्ड ने जिस ढंग से राउंड ऑफ किया उसकी वजह से कई अयोग्य अभ्यर्थी आगे की परीक्षा में शामिल होने का मौका पा गए। सिर्फ उन्हीं अभ्यर्थियों को पास घोषित किया जाना था जिन्होंने कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्री टेस्ट में हासिल किए, लेकिन 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले भी पास घोषित कर दिए गए। कोर्ट ने कहा कि भर्ती बोर्ड ने यूपी पुलिस भर्ती व प्रमोशन बोर्ड के नियम 15-डी का उल्लंघन किया।

चयन के तरीके को दी गई थी चुनौती

इन अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को नहीं बल्कि चयन के तरीके को चुनौती दी थी। ऐसे में एकल पीठ का निर्णय सही था। दूसरी तरफ कुछ अभ्यर्थियों ने आपत्ति की कि प्रारम्भिक टेस्ट में हासिल अंकों को राउंड ऑफ करते हुए मुख्य लिखित परीक्षा की योग्यता निर्धारित कर दी गई।

अभ्यर्थियों ने इस पर आपत्ति जताई थी कि प्रारम्भिक टेस्ट विद्यार्थियों को आगे के राउंड में शामिल करने के लिए चयन के लिए था, जिसमें 50 प्रतिशत अंक हासिल किए जाने थे। वहीं मुख्य लिखित परीक्षा और ग्रुप डिस्कशन के अंक के आधार पर फाइनल चयन की मेरिट लिस्ट बनाई जानी थी।

सिर्फ इतना ही नहीं चयन में महिलाओं, स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व सैनिक, आदि को हारिजॉन्टल रिजर्वेशन वर्ग के अनुसार दिया जाना था। लेकिन इन्हें ओपन कैटेगरी की सीटों पर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती बोर्ड ने इन विशेष वर्गों का चयन अपने-अपने एससी-एसटी, ओबीसी कैटेगरी में किया जाना चाहिए था।

यहां भी दिखी भर्ती बोर्ड की गलती

चयन प्रक्रिया के दौरान 4010 पदों के लिए 12030 अभ्यर्थियों को पास घोषित करते हुए जीडी के लिए बुलाया जाना था। लेकिन बोर्ड ने तीन गुना से ज्यादा 14243 अभ्यर्थियों को बुलाया। जिन अतिरिक्त अभ्यर्थियों को बुलाया गया, उनमें से बहुत से पास घोषित हुए और अंतिम चयन सूची में जगह पाए।

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