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ये है ‘मोगली गर्ल’ का सच, अब पुलिस के लिए चुनौती

भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच जिले में मिली बच्ची

नई दिल्ली: ‘मोगली गर्ल’ के नाम से प्रचारित बच्ची को पुलिस ने बचा तो लिया लेकिन उसे उसके घर-परिवार तक पहुंचाना नेपाली सीमा के पास वाले इस थाने के पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती है। बच्ची को ‘मोगली गर्ल’ की पहचान दिए जाने के पीछे वाजिब तर्क नहीं है लेकिन इस प्रचार को होने देने के लाभ भी पुलिस को दिखाई दे रहे हैं।





नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के मोतीपुर थाना क्षेत्र में कर्तनियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी (वन्यजीव अभ्यारण्य) से 20 जनवरी को मिली 12 साल की ये बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले इसे मोतीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में रखा गया था। पुलिस को शाम के वक्त झाड़ियो में जख्मी हालत में पड़ी इस बच्ची की सूचना मिली थी।

मोतीपुर के थानाध्यक्ष राम अवतार यादव के मुताबिक बच्ची के जिस्म पर कपड़े सही सलामत थे लेकिन वह बोल नहीं पा रही थी और मानसिक रोगी जैसी हालत थी। बच्ची की मदद के लिए चाइल्ड लाइन से कहा गया लेकिन ये संस्था मदद नहीं कर पाई। अंधेरा हो चुका था। ऐसे में कानूनन उसे थाने भी नहीं लाया जा सकता था, लिहाजा बच्ची को महिला थाने में पहुंचाया गया। पुलिस ने प्राथमिक उपचार कराकर इसे खाना खिलाया। अगले दिन बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से बहराइच जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

कर्तनियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी के पास से मिली थी यह लड़की

थानाध्यक्ष श्री यादव ने इस बात को सिरे से गलत बताया कि बच्ची जानवरों जैसी हरकत कर रही थी या वह लम्बे अरसे तक जंगल में जानवरों के बीच रही जैसा कि मीडिया में प्रचारित किया गया। यदि ऐसा होता तो बच्ची के बाल और नाखून बढे हुए होते। वहीं उसके कपड़े भी सही सलामत नहीं होने चाहिए थे।

पुलिस दो नजरिए से इस मामले की तफ्तीश कर रही है। पहला, बच्ची विक्षिप्त है और बोल भी नहीं पाती। संभवत: परिवार ने बच्ची को घर से निकाल दिया। दूसरा, हो सकता है बच्ची नेपाल की हो और भटक कर भारतीय सीमा में आ पहुंची। अखबारों में विज्ञापन और इश्तहार के पर्चे इलाके में बांटे लेकिन बच्ची के बारे में अब तक किसी ने कोई जानकारी नहीं दी।

पुलिस ने इस बात को भी गलत बताया कि बच्ची जानवरों जैसा व्यवहार कर रही है। हालांकि मीडिया में तो यहां तक प्रचार कर डाला गया कि बच्ची को बंदरों ने पाला। जांच से जुड़े अधिकारी इस प्रचार को गलत जरूर बता रहे हैं लेकिन उन्हें लगता है कि ये प्रचार लाभदायक हो सकता है। हो सकता है इसे देखकर बच्ची के परिवार वाले खुद सामने आ जाएं या कोई परिचित बच्ची के परिवार का सुराग दे दें। पुलिस ने बच्ची से दुष्कर्म किए जाने की बात से इन्कार किया है। ऐसे कुछ लक्षण जिस्म पर दिखाई नहीं दिए।

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