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उत्तराखंड के पुलिस कर्मियों को क्या मिलेगा ओवरटाइम ?

उत्तराखंड राज्य पुलिस

नैनीताल। उत्तराखंड राज्य पुलिस में तैनात कर्मियों से 24 घंटे ड्यूटी करवाने, अतिरिक्त कार्य का कोई मेहनताना नहीं देने, मेस की खराब हालत आदि को लेकर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। लंबे समय तक ड्यूटी करने और इसके कारण अवसाद में आ रहे पुलिस कर्मियों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अवसाद के कारण मरने वाले पुलिस कर्मियों का ब्योरा भी मांगा है।





  • लंबे समय तक ड्यूटी करने और इसके कारण अवसाद में आ रहे पुलिस कर्मियों की संख्या में लगातार इजाफे पर कोर्ट का सख्त रुख

बुधवार को अरुण कुमार भदौरिया की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय नैनीताल ने सरकार और पुलिस महानिदेशक से जवाब तलब किया है। अरुण कुमार भदौरिया ने याचिका में कहा है कि हर विभाग में अतिरिक्त ड्यूटी का अतिरिक्त वेतन मिलता है, लेकिन पुलिस में 24 घंटे डयूटी के बाद भी अतिरिक्त भुगतान नहीं होता। इसके साथ ही पुलिस विभाग में अवकाश को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

वरिष्ठ न्यायाधीश वीके बिष्ट और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद पुलिस महानिदेशक और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए। साथ ही पुलिस महानिदेशक से यह भी बताने को कहा कि 24 घंटे ड्यूटी से उपजी अवसाद की समस्या के कारण राज्य में अब तक कितने पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। ड्यूटी के निर्धारित घंटे नहीं होने और बिना अवकाश के काम करते रहने के कारण पुलिस कर्मियों की कार्य क्षमता में कमी आ रही ही है। इसके साथ ही जनता के साथ उनके संबंध भी बिगड़ रहे हैं। काम और परिवार के बीच सामंजस्य बैठाने में आ रही कमी के कारण तलाक के मामले भी बढ़ रहे हैं।

मनोवैज्ञानिक और काउंसलर डॉ. मुकुल शर्मा की मानें तो अवसाद के सर्वाधिक मामले पुलिस विभाग और उनके परिवारों के बीच से सामने आ रहे हैं।

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