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लचर कानून-व्यवस्था की भेंट चढ़ेंगे DGP जावीद अहमद?

डीजीपी जावीद अहमद

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था आज कई वर्षों से चर्चा में है। अभी सत्ता बदली तो फिर सबसे ऊपर कानून व्यवस्था ही है। दरअसल बीते वर्षों में जिस पार्टी की सरकार रही, उसने पुलिस महकमे के मुखिया से लेकर सिपाही तक सिर्फ राजनीतिक गोटियां ही बिछाईं। अपने लोग… सिर्फ अपने। नतीजा कानून-व्यवस्था राजनीति की भेंट चढ़ गई। जनता का कोई पुरसाहाल नहीं रहा। अब सरकार बदली तो फिर कानून-व्यवस्था का मुद्दा गरमाया। सत्ता गलियारों में पहली चर्चा यही गूंजी कि अब वरिष्ठता को लांघकर पुलिस महानिदेशक बने जावीद अहमद का जाना तय है। कब तक… बस यही तय होना है।





अफवाहों का बाजार गर्म

आज मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सबसे पहले गृह सचिव देवाशीष पांडा और पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद को तलब किया और कानून-व्यवस्था को चाक चौबंद करने का निर्देश दिया। हालांकि, प्रशासनिक फेरबदल में डीजीपी के जाने की अफवाहें कल रात से जोरों पर हैं। लोगों ने तो रजनीकांत मिश्र को नया डीजीपी घोषित कर दिया था। लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक ऐसा कुछ नहीं है।

मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं जावीद अहमद

दरअसल, 1984 बैच के आईपीएस अफसर जावीद अहमद पिछली सपा सरकार के मुखिया मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि जब सत्तासीन परिवार में कलह मची हुई थी तब जावीद अहमद ने मध्यस्थता की भी कोशिश की थी। वैसे, जावीद अहमद पर विवाद 1 जनवरी 2016 से ही है, जब कई सीनियर अफसरों की अनदेखी कर उनकी ताजपोशी की गई थी। विरोधी पार्टी का तो यहां तक आरोप था कि सत्ताधारी दल ने एक समुदाय विशेष को ‘खुश’ करने के लिए उनकी तैनाती की।

तैनाती के चार दिन के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट याचिका दाखिल

खैर, उनकी तैनाती के चार दिन के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने रिट याचिका दाखिल कर दी थी। उनका कहना था कि जावीद को यूपी कैडर के 13 अफसरों को सुपरसीड कर तैनाती दी गई। इन 13 अफसरों में से 8 राज्य में ही काम कर रहे थे जबकि 4 केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। कहा गया कि जावीद को सीबी-सीआईडी के डीजी प्रवीण सिंह वर्मा और डीजीपी (रिक्रूटमेंट) वीके गुप्ता की अनदेखी करके डीजीपी बनाया गया।

यूपी भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने चुनाव आयोग से की थी जावीद अहमद को हटाने की मांग

राजनीतिक लाभ के लिए जावीद की नियुक्ति का आरोप लगाते हुए भाजपा प्रवक्ता चंद्र मोहन ने कहा था कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2017 चुनाव के मद्देनजर यह नियुक्ति की है। जनवरी 2017 में यूपी भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर जावीद अहमद को हटाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि जावीद अहमद को कई वरिष्ठ अफसरों की अनदेखी कर डीजीपी बनाया गया।

कानून-व्यवस्था का हल्ला मचाने वाली भारतीय जनता पार्टी और नवगठित सरकार ने अगर 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई बड़ा प्रशासनिक फेरबदल नहीं किया है तो उसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि खासतौर से डीजीपी को हटाने से कोई गलत संदेश न चला जाए। इसलिए सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती।

हाँ, इतना तो तय है कि डीजीपी जावीद अहमद को जाना है लेकिन कब… इसके लिए सरकार उचित मौके का इंतजार करेगी। अभी इस मसले पर लखनऊ और दिल्ली के बीच भी अंदरखाने चर्चा चल रही है। इससे लगता है कि एक-दो दिन में प्रशासन और पुलिस में व्यापक बदलाव सामने आ जाएंगे।

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