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SI शंकर ने खून देकर बचाई अहमद की जिंदगी, जितने मानवीय उतने ही कड़क भी !

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस की यातायात शाखा में कार्यरत सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही की सतर्कता सेे एक युवक की जिंदगी बच गई। मामला शुक्रवार की रात करीब नौ बजे का है जब छितवापुर के पास तेज रफ्तार डम्पर ने स्कूटी में टक्कर मार दी और स्कूटी चालक घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। युवक दर्द से तड़प रहा था, तभी वहां से गुजर रहे सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही की नजर घायल युवक नवाब अहमद पर नजर पड़ी। वह उसे तुरंत अपनी गाड़ी से लेकर लेकर गोमतीनगर स्थित लवी अस्पताल पहुंचे और मामले की जानकारी उसके परिजनों को दी।





ब्लड डोनेट करने के बाद अस्पताल परिसर में चाय पीते सब इन्सपेक्टर प्रेम शंकर शाही

इस बीच डॉक्टरों ने नवाब की हालत बिगड़ती देख पैर काटने की बात कही। उसके परिजन भी अस्पताल नहीं पहुंच सके थे। परिजनों के पहुंचने में देर होती देख सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही ने ऑपरेशन के लिए अपने पास से दस हजार रुपये जमा करवाए और खून भी दिया। समय से इलाज मिलने के कारण नवाब की जिंदगी बचा ली गई।

नवाब अहमद मड़ियाव के अजीजनगर का रहने वाला है। नवाब के परिजन उसके उपचार के लिए दिए शाही के दस हजार रुपए लौटा रहे थे लेकिन शाही ने रुपए लेने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर नवाब को समय पर हास्पिटल नहीं लाया गया होता और ब्लड नहीं दिया गया होता तो उसकी जान तक जा सकती थी।

रिश्तेदारों ने नवाब अहमद को नहीं दिया खून

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही ने रक्षकन्यूज.कॉम से विशेष बातचीत में बताया कि वह अकेले नवाब अहमद को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। उसके एक्सीडेंट की सूचना उसके कुछ रिश्तेदारों को भी मिल गई थी। चारबाग स्थित लाल बाग गेस्ट हाउस में एक शादी समारोह था उसी में सभी लोग इकट्ठे हुए थे। अहमद के एक्सीडेंट की सूचना पर उसके 5-6 रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए दो यूनिट ब्लड की डिमांड की। जब ब्लड देने की बारी आई तो अहमद के रिश्तेदार एक-एक कर वहां से खिसक लिए।

अब अहमद को ब्लड देने और उसकी जिंदगी बचाने की लगभग सारी जिम्मेदारी शाही पर आ गई। शाही ने तुरंत डॉक्टर से कहा कि आप मेरा ब्लड ले लीजिए और युवक की जान बचाइए। अमूनन लोग एक यूनिट ब्लड डोनेट करते हैं लेकिन शाही ने अहमदी की जान बचाने के लिए दो यूनिट ब्लड डोनेट किया। नतीजतन अहमद की जान बच गई।

सब इंस्पेक्टर शाही कहते हैं कि ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। वह मेरे परिवार का भी सदस्य हो सकता था। मेरे साथ भी ऐसा हो सकता है। मैंने अहमद के लिए जो भी किया वह सिर्फ इंसानियत के नाते किया।

सब इंस्पेक्टर नहीं….!

प्रेम शंकर शाही वैसे तो पद से यातायात विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं लेकिन वह इस समय पांच-पांच इंस्पेक्टरों का काम कर रहे हैं। जब भी लखनऊ में वीवीआईपी मूवमेंट होती है तो यातायात व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रेम शंकर शाही पर ही आ जाती है। वह मेट्रो यातायात के भी इंचार्ज हैं और ई-चालान सेक्शन के भी इंचार्ज हैं इसके अलावा भी वह दो विंग संभाल रहे हैं। कहने का मतलब शाही सिर्फ नाम के सब इंस्पेक्टर हैं लेकिन उन्हें काम इंस्पेक्टर का करना पड़ता है वह भी एक-दो नहीं बल्कि पांच-पांच इंस्पेक्टर का काम संभालना पड़ता है। शाही पिछले ढाई साल से यातायात विभाग में हैं।

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही लोगों को जागरूक भी करते रहते हैं। ट्रैफिक वालंटियर्स को यातायात के नियमों की जानकारी देते शाही

नहीं आना चाहता था पुलिस में: शाही

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही ने रक्षकन्यूज.कॉम से बताया कि वह पुलिस में नहीं आना चाहते थे लेकिन हालात ऐसे बन गए कि उन्हें पुलिस में आना पड़ा। उन्होंने बताया कि वह सिविल जज, आईएएस अफसर बनना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने चार-चार बार परीक्षाएं भी दीं। इस बीच 2002 में माता-पिता का देहांत हो गया और उनकी सिविल सर्विसेज की तैयारी करने की उम्र भी खत्म हो रही थी। उन्होंने कई जगहों पर आवेदन कर रखा था। उनके पास अब बैंक, सचिवालय, पुलिस समेत पांच विकल्प बचे थे। अंतत: उन्होंने पुलिस में जाने का निर्णय लिया। शाही ने बताया कि उनका यही मन था कि अगर वह सिविल जज अथवा आईएएस अफसर नहीं बन पाते हैं तो वह एक अच्छा अधिवक्ता बनेंगे। शाही ने एलएलबी, एलएलएम तक शिक्षा हासिल की है।

ड्यूटी टाइम सिर्फ ड्यूटी

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही जिस समय ड्यूटी पर रहते हैं तो वह सिर्फ ड्यूटी ही करते हैं। यातायात के नियमों को तोड़ने वाले को वह किसी भी हाल में नहीं बख्शते। वह कैबिनेट मिनिस्टर के काफिले के एस्कार्ट का भी चालान कर देते हैं। सब इंस्पेक्टर शाही के काम करने का तरीका अनोखा है। कभी-कभी वह नियमों के लिए अपने ही सहकर्मियों की बात नहीं सुनते।

शाही ड्यूटी के क्रम में इंसानियत को कभी नहीं भूलते। अक्सर ऐसे समाचार सुनने अथवा देखने को मिलते हैं कि पुलिस ने गाड़ी का चालान कर दिया और उसे क्रेन से उठा लिया और उस गाड़ी में बच्चा था…! प्रेम शंकर शाही के साथ भी ऐसा कई बार हो चुका है जब गाड़ी में उन्हें बच्चा मिला हो। वह बच्चे को उसके घर तक पहुंचाते हैं और वाहन स्वामी को उनके वाहन के चालान की जानकारी देते हैं।

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