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यह नियम IPS अधिकारी को कर सकता है समय से पूर्व रिटायर

नई दिल्ली: लगभग 20 साल बाद दो आईपीएस अधिकारियों को उनकी रिटायर अवधि से पहले रिटायर किए जाने के मामले में आज गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू को राज्यसभा में सफाई देनी पड़ी। उन्होंने 1 जनवरी 2017 को समय से पहले रिटायर किए गए दो आईपीएस अधिकारी मयंक शील चौहान और आईपीएस राज कुमार देवांगन से जुड़े तथ्य सदन को बताए।





उन्होंने सदन को बताया कि केंद्र शासित क्षेत्र (UT) कैडर के 1998 बैच के अधिकारी मयंक शील चौहान और छत्तीसगढ कैडर के 1992 बैच के अधिकारी राजकुमार देवांगन को अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 के तहत समय से पहले सेवानिवृत्ति दे दी गई है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दोनों अधिकारियों के सेवा प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा के बाद जनहित में यह कार्रवाई की गई थी।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू (फाइल फोटो)

रिजिजू ने बताया कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की दो बार सेवा समीक्षा की जाती है। पहली सेवा के 15 वर्ष पूरा होने पर और फिर 25 वर्ष पूरा होने पर। दोनों ही अधिकारी 15 वर्ष का सेवाकाल पूरा कर चुके थे। उन्होंने सदन को बताया कि समीक्षा समिति, मोटे तौर पर दो लक्ष्यों, पहला संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले अधिकारियों को हटाने तथा दूसरा अपनी उपयोगिता खो चुके तथा अक्षम या अप्रभावी हो गए अधिकारियों को हटाने को ध्यान में रखते हुए, अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियमावली, 1958 के नियम 16 (3) के अंतर्गत अधिकारियों के रिकार्डों की समीक्षा करती है।

एक अन्य सवाल के जवाब में किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों और चालू वर्ष के दौरान झारखंड राज्य सरकार से भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों की सेवा की समीक्षा का कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। राज्य सरकार को ऐसी समीक्षा करने की सलाह दी गई है।

20 साल बाद आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ ऐसा निर्णय

भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों की इस तरह बर्खास्तगी करीब दो दशक बाद सामने आई है। इससे पहले दो आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह के कदम उठाए गए थे जो उस समय महाराष्ट्र में सेवारत थे।

  • पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी मयंक शील चौहान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के कई आरोप थे। उन पर आरोप था कि अरुणाचल प्रदेश में पदस्थापना के दौरान किसी को अधिकृत किए बगैर वह सेवा से अनुपस्थित रहे।
  • पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी राजकुमार देवांगन 1998 के एक लूट मामले में विभागीय जांच का सामना कर रहे थे जो छत्तीसगढ के जांजगीर चम्पा जिले में पुलिस अधीक्षक के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था।

झारखंड से राज्यसभा सदस्य संजीव कुमार ने पूछा था कि क्या यह सच है कि सरकार द्वारा अभी हाल ही में दो आईपीएस अधिकारियों को उनके कार्य-निष्पादन की समीक्षा के भाग के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है?
संजीव कुमार ने भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा के लिए सरकार द्वारा मानदंड से जुड़े सवाल भी पूछे थे। उन्होंने झारखंड संवर्ग के आईपीएस अधिकारियों की समीक्षा से भी जुड़े सवाल पूछे थे।

अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ नियम 1958) के बारे में

अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की दो बार सेवा समीक्षा की जाती है। पहली सेवा के 15 वर्ष पूरा होने पर और फिर 25 वर्ष पूरा होने पर या फिर आईपीएस अधिकारी के 50 साल उम्र होने के बाद। अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 के मुताबिक, ‘‘केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श कर और सेवा के सदस्य को कम से कम तीन महीने पहले लिखित नोटिस देकर या इस तरह के नोटिस के बदले तीन महीने के वेतन और भत्ते का भुगतान कर जनहित में सदस्य को सेवानिवृत्त कर सकती है।

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