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सुकमा हमले के खलनायक ने खोले कैसे-कैसे चौंकाने वाले राज

पोडियम-पंडा

रायपुर। सुकमा के बुर्कापाल हमले को किस तरह अंजाम दिया गया था इसका खुलासा सरेंडर कर चुके कुख्यात नक्सलियों के डिप्टी कमांडर पोडियम पांडू उर्फ पंडा (45) ने पुलिस के सामने किया है। पोडियम ने पुलिस के सामने 19 बड़ी नक्सल वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की है। इस कुख्यात नक्सली के सिर पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसी ने सुकमा के पूर्व कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को भी अगवा किया था।





पोडियम पंडा के प्रमुख ऑपरेशन

  • 2010 में ताड़ेमटला हमला- 76 जवान शहीद
  • 2014 में कासलपाड़ा हमला- 14 जवान शहीद
  • 2012 में सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का अपहरण
  • 2017 बुर्कापाल हमला- 25 जवान शहीद

ऐसे दिया बुर्कापाल हमले को अंजाम

पुलिस को पंडा ने बताया किस तरह सीआरपीएफ पर हमले का ब्लू प्रिंट तैयार किया था। घटना के दिन 24 अप्रैल को सीआरपीएफ का दल जब अपने शिविर से निकला तब इसकी जानकारी नक्सली सदस्यों ने अपने कमांडरों तक पहुंचाई। इस दौरान हथियारबंद नक्सली बुर्कापाल से लगभग आठ किलोमीटर दूर कासलपाड़ा गांव के करीब मौजूद थे। जानकारी मिलने के बाद नक्सलियों ने एक घंटे के दौरान ही क्षेत्र में घेराबंदी की और 11:30 बजे पुलिस दल पर हमला शुरू कर दिया।

चिंतागुफा गांव का पूर्व सरपंच था ये नक्सली

पोडियम-पांडा

कुख्यात नक्सली पोडियम पंडा का सरेंडर और फिर खुलासा

सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने बताया कि पिछले महीने जिले के बुर्कापाल हमले में शामिल जनमिलिशिया डिप्टी कमांडर और नक्सली सहयोगी पोडियम पंडा ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। पंडा ने 9 मई को सरेंडर किया था, जिसका खुलासा अब जाकर हुआ है। पुलिस द्वारा पूछताछ में उसने बताया कि उसने दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुलाकात नक्सली नेताओं से करवाने में मदद की थी।

उन्होंने बताया कि पोडियम पंडा चिंतागुफा गांव का पूर्व सरपंच है। वर्तमान में उसकी पत्नी गांव की सरपंच है। नक्सली बुरकापाल में हमले की तैयारी पहले से ही कर रहे थे। वह 15 अप्रैल से ही चिंतागुफा और बुर्कापाल में सुरक्षा बलों पर नजर रख रहे थे। इसके बाद ही 24 अप्रैल को घटना को अंजाम दिया गया। इसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे। सीआरपीएफ टीम के निकलते ही नक्सली सक्रिय हो गए थे। पुलिस और सुरक्षा बलों को पिछले 6 सालों से पोडियम पंडा की तलाश थी। इसके खुलासे के बाद ही आठ नक्सलियों को मंगलवार (16 मई) को पकड़ा गया था।

ऐसे बना मिलिशिया डिप्टी कमांडर

साल 1997 में पोडियम पंडा नक्सली नेता रमन्ना, हिड़मा, मदन्ना पापाराव और सीतू के संपर्क में आया था। इस दौरान वह नक्सलियों के कुरियर के रूप में काम करता था। उनके लिए जरूरी सामान शहरों से लाता था। साल 2014 में वह अपना गांव छोड़कर मिनपा चला गया। वहां वह दुलेड़ जनताना सरकार में मिलिशिया सदस्य के रूप में कार्य करने लगा। साल 2016 में वह मिलिशिया डिप्टी कमांडर बन गया।

पंडा पिछले दो साल से सरेंडर करना चाहता था। नक्सलियों के बड़े कमांडरों को इसकी भनक लग गई। इसके बाद हमेशा इसके साथ साए की तरह 4-5 हथियारबंद नक्सलियों को लगा दिया गया। पिछले दिनों इस पर नजर रखने वाले पांचों नक्सली पेकलपाड़ा, चिंतागुफा और मिनपा के बीच पुलिस के हत्थे चढ़ गए। बस इसके बाद पंडा को मौका मिल गया और इसने चिंतागुफा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

माओवादी कमांडर को सौंपे हथियार

इस हमले के समय पंडा इन्सास रायफल से गोलीबारी कर रहा था। पंडा और उसके साथियों ने जवाबी कार्रवाई के दौरान घायल नक्सलियों और मारे गए नक्सली कमांडर अनिल के शव को कासलपाड़ा गांव पहुंचाया। इसके बाद पंडा ने अपना हथियार माओवादी कमांडर अर्जुन को सौंप दिया और अपने गांव लौट गया। इस महीने की 9 तारीख को पंडा चिंतागुफा थाने की पुलिस के संपर्क में आया और सरेंडर कर दिया।

21 नक्सलियों ने भी किया सरेंडर

बस्तर जिले में तीन इनामी नक्सलियों समेत 21 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। इनमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा क्षेत्र सुंदरराज पी के सामने नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में लक्ष्मण मड़कामी पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित है। वह क्षेत्र में मिलिट्री प्लाटून नंबर 26 का सदस्य है।

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