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सिमरोज के लिए फरिश्ता बन गया यूपी पुलिस का यह दारोगा, बचा लिया भविष्य!

बदायूं: वह बच्ची गरीब परिवार से है… उसके पास फीस जमा करने के लिए पैसे नहीं थे… और ‘शिक्षा का अधिकार’ उससे छिनने वाला था… सिर्फ 800 रुपए के लिए वह परीक्षा देने से वंचित रह जाती और उसका साल खराब हो जाता लेकिन दारोगा जितेंद्र कुमार को जब यह पता चला तो उसने आगे बढकर इस बच्ची का भविष्य बचा लिया।





यह किस्सा है बदायूं के ककराला में रहने वाली कक्षा 10 की छात्रा सिमरोज का। सिमरोज मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले खालिद की बेटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने से खालिद अपनी बेटी की फीस नहीं भर सके। दूसरे बच्चों की तरह सिमरोज भी परीक्षा के लिए अपना प्रवेश पत्र लेने स्कूल पहुंची लेकिन वहां प्रधानाचार्य डा. इंतजार ने उससे फीस भरने के लिए कहा जब उसने फीस भरने में असमर्थता जाहिर की तो प्रधानाचार्य ने उसे प्रवेश पत्र देने से मना कर दिया। सिमरोज ककराला के जीबी गर्ल्स इंटर कॉलेज में पढ़ती है। मायूस सिमरोज घर लौट आई। उसके मन में एक तरफ पढ़ाई छूटने की बात चल रही थी तो दूसरी तरफ गरीबी की।

किसी अन्य शिक्षक के माध्यम से यह जानकारी अलापुर थाना क्षेत्राधिकार के ककराला चौकी प्रभारी दारोगा जितेंद्र कुमार को मिली। जितेंद्र कुमार तुरंत स्कूल पहुंचे और उन्होंने बच्ची की बकाया फीस के 800 रुपए प्रधानाचार्य को दिए और फिर प्रधानाचार्य ने सिमरोज को परीक्षा का प्रवेश पत्र दिया।

भावुक सिमरोज ने दारोगा जितेंद्र कुमार का शुक्रिया अदा किया और उन्हें फरिश्ते का दर्जा दे डाला। जितेंद्र कुमार का यह काम ऐसे लोगों के मुंह पर एक तमाचा है जो खाकी पर सिर्फ आरोप लगाते रहते हैं और उसकी खामियां ढूंढते रहते हैं। पुलिस विभाग में जितेंद्र कुमार जैसे अधिकारी भी हैं जो यह साबित करते हैं कि सब एक जैसे नहीं होते।

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