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जानिए, एक SSP को क्यों नहीं दिया गया सेवा विस्तार

चरनजीत सिंह शर्मा

चंडीगढ़। अक्टूबर 2015 में बेहबल कलां (फरीदकोट) में अपवित्रीकरण की घटनाओं का विरोध करने वाली भीड़ पर फायरिंग का आदेश देने के आरोप में मोगा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) चरनजीत सिंह शर्मा को सेवा से अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया गया है।





हालांकि न्यायमूर्ति जोरा सिंह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सीधे तौर पर चरनजीत को दोषी नहीं ठहराया था लेकिन आयोग ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की घटना को पुलिस के लिए कलंक बताया था। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। पूर्व एसएसपी ने अपने बचाव में कहा था कि भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था।

कांग्रेस सरकार ने न्यायमूर्ति रंजीत सिंह गिल की अध्यक्षता में एक नए आयोग का गठन किया है, जो अपवित्रीकरण की सभी घटनाओं और बेहबल कलां में पुलिस की गोलीबारी की जांच करेगी जिसमें दो युवक मारे गए थे।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि ज़ोरा सिंह आयोग की रिपोर्ट या पुलिस की विभिन्न जांचों में किसी भी अधिकारी को अकारण गोलाबारी का दोषी नहीं ठहराया गया था लेकिन कांग्रेस ने चुनाव अभियान के दौरान घटनाओं और पुलिस की भूमिका पर कड़ी कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्ध जताई थी।

58 साल की आयु पूरी करने के बाद चरनजीत शर्मा ने 30 अप्रैल को रिटायरमेंट ले लिया था। आम तौर पर, सरकार अपने अधिकारियों को दो साल का विस्तार देती है (एक बार में एक वर्ष) लेकिन जिसके खिलाफ आरोप हों या जांच चल रही हो, उसे सेवा विस्तार से वंचित कार दिया जाता है।

पुलिस विभाग के सूत्रों ने बताया कि गृह विभाग ने 30 अप्रैल और 1 मई को छुट्टियों के कारण पुलिस अधिकारी को 2 मई को रिटायर करने का आदेश जारी किया।

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