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आंध्र की तर्ज पर झारखंड में बनेगी SIB, ये होगा काम

रांची: आंध्र प्रदेश की तर्ज पर अब झारखंड में भी माओवादियों के खात्मे के लिए स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो (एसआईबी) का गठन किया जाएगा। इसका मुख्य कार्य माओवादियों के बारे में जानकारी एकत्रित करना और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना होगा। यह स्पेशल ब्रांच के अधीन काम करेगा पहले एसआईबी का इस्तेमाल आंध्र प्रदेश में किया जा रहा है।





स्पेशल ब्रांच के डीआईजी के नेतृत्व में गठित की जाने वाली एसआईबी के कामकाज और तौर-तरीकों को जानने के लिए डीआईजी (विशेष शाखा) रंजीत प्रसाद आंध्र प्रदेश जाएंगे और उसी आधार पर झारखंड में भी इस व्यवस्था को लागू करेंगे। डीआईजी रंजीत प्रसाद को ही एसआईबी का प्रभार दिया जा रहा है।

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आंध्र प्रदेश में भी डीआईजी के नेतृत्व में ही एसआईबी का गठन किया गया है, इसका मुख्य कार्य उग्रवादियों के बारे में गोपनीय सूचनाएं और अन्य जानकारियां इकट्ठा कर उसे संबंधित विभाग से साझा करना है। इतना ही नहीं इसके पास माओवादी घटनाओं की जांच करने और कार्रवाई करने के भी अधिकारी होंगे। आंध्र प्रदेश में इसके बेहतर परिणाम को देखते हुए ही केंद्र ने झारखंड सहित अन्य उग्रवाद प्रभावित राज्यों में इस व्यवस्था को लागू करने का सुझाव दिया था।

एसआईबी के गठन में आंध्र प्रदेश का अगर पालन किया गया तो यहां भी एसआईबी को भविष्य में नक्सली कांडो के अनुसंधान का अधिकार मिल सकता है। केंद्र का कहना है कि खुफिया सूचना ही माओवादियों के खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशन की बैक बोन है।

एसआईबी और इंटेलिजेंस ब्यूरो में अंतर

झारखंड में इंटेलिजेंस ब्यूरो के रूप में विशेष शाखा काम कर रही है लेकिन विशेष शाखा के अफसरों को ना तो किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार है और ना ही वह किसी मामले में जांच कर सकता है। वहीं, एसआईबी के गठन से माओवादी मामलों का अनुसंधान एसआईबी करेगा साथ ही नक्सल मामले से जुड़े हर केस की जांच करेगा।

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