Police

चुनौती है दिल्ली पुलिस के लिए कैश वैन की सुरक्षा

कैश वैन में लूटपाट

नई दिल्ली। राजधानी में बदमाशों ने फिर कैश वैन को टारगेट बनाना शुरू कर दिया है। कैश वैन की सुरक्षा पुलिस के लिए हमेशा से टेढ़ी खीर रही है। गैर प्रशिक्षित सुरक्षागार्ड और निजी कर्मियों के हाथों लाखों की नगदी का लेनदेन कभी भी किसी बड़ी वारदात की वजह बन जाता है। पैसों के स्थानांतरण को लेकर बैंक भी गंभीर नहीं हैं।





कैश वैन में लूटपाट की हर घटना के बाद बैंकों को सेक्यूरिटी के इंतजाम पुख्ता करने के लिए कहा जाता है। पुलिस हेडक्वॉर्टर में बैंक प्रतिनिधियों के साथ समय-समय पर बैठकों में भी यह मसला उठता रहा है। दिल्ली पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर के मुताबिक कैश वैन बदमाशों का आसान निशाना होता है। कैश को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए हथियारबंद सुरक्षागार्ड तो गाड़ी में बिठा दिए जाते हैं पर वक्त आने पर वह हथियार अपराधियों को सौंपकर एक तरफ जा खड़े हो जाते हैं और चौकस नहीं रहने पर बदमाशों की गोलियों का शिकार बन जाते हैं।

कैश वैन लूट, वर्ष 2016 की वारदात

  • मई 2016 में रोहिणी में बदमाशों ने कैश वैन में तैनात कर्मचारियों को गोली मारकर 19 लाख रूपये लूटे।
  • दिसंबर 2016 में पांडव नगर में बाइक सवार बदमाशों ने कैश वैन से 10 लाख रूपये लूटे।

वर्ष 2017 की कैश वैन लूट की वारदात

  • मार्च 2017 मियांवली में कैश वैन के कर्मचारी 32 लाख रुपये लेकर भागे।
  • अप्रैल 2017 राजेंद्र नगर में कैश वैन से 26 लाख रुपये लूटे।
  • जून 2017 उत्तर पश्चिम जिला में कैश वैन के गार्ड को गोली मार 12 लाख रुपये लूटे।
  • जून 2017 भलस्वा डेयरी में गार्ड को गोली मार 12 लाख रुपये की लूटपाट हुई।

पुलिस ऑफिसर के मुताबिक कई मामलों की जांच में यह बात उजागर हुई कि कैश लाने-लेजाने वाली एजेंसियां अपने कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करातीं। दिल्ली पुलिस द्वारा जांच व सुरक्षा के जो मानक तय किए हैं उनपर पूरी तरह से खड़ी नहीं उतरतीं। दस्तावेज के नाम पर उनके पास महज पहचान पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी थी।

कई एजेंसियां चारों ओर से ग्रिल व ताला लगी कैश वैन का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। हाल के वर्षों में कुछ मामलों में पाया गया कि प्राइवेट नंबर की गाड़ियों में ही कैश ले जाया जा रहा था। पुलिस का मानना है कि तमाम निर्देशों के बावजूद एजेंसियां इसका पालन नहीं कर रही हैं।

पुलिस ऑफिसरों के मुताबिक कम वेतन देने के चक्कर में एजेंसियां किसी की सिफारिश पर किसी भी व्यक्ति को नौकरी पर रख लेते हैं। अकसर बदमाश ऐसे ही व्यक्ति के तलाश में रहते हैं जो आसानी से पैसों की लालच में आ जाते हैं।

Comments

Most Popular

To Top