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लॉक हो गए महाराष्ट्र और आंध्र पुलिस के आंकड़े

मुम्बई। विश्व स्तर पर सक्रिय रैनसमवेयर ‘वानाक्राई’ वायरस ने पूरे महाराष्ट्र में तमाम पुलिस स्टेशनों को अपनी चपेट में ले लिया है। सूत्रों के अनुसार इसकी वजह से महत्वपूर्ण डाटा लाक हो गया है। शीर्ष अधिकारियों ने माना कि महाराष्ट्र के कई पुलिस स्टेशनों के कंप्यूटर विंडोज के पायरेटेड संस्करण पर चल रहे थे, जो कम्प्यूटर को इंटरनेट द्वारा फैल रहे मैलवेयर हमलों के लिए कमजोर बना देता है। महाराष्ट्र राज्य की साइबर सेल के प्रमुख ब्रिजेश सिंह के अनुसार विंडोज पैच का एक लिंक भी जारी किया गया है, जो लोगों को अपने कम्प्यूटर सिस्टम का बैकअप लेने में मदद कर सकता है।उधर, आंध्रप्रदेश में पुलिस थानों के रिकॉर्ड हैक किए गए हैं और चित्तूर, कृष्णा, गुंटूर, विशाखापत्तनम और श्रीकुलम जिलों की 18 पुलिस इकाइयों के कंप्यूटर साइबर हमले से प्रभावित हुए है।





हालांकि रैनसमवेयर से प्रभावित प्रणालियों के बारे में सटीक आंकड़े अभी पता नहीं लग पाए हैं। साइबर रैनसमवेयर ‘वानाक्राई’ एक प्रकार का हानिकारक सॉफ़्टवेयर है, जो कि एक आॅनलाइन कम्प्यूटर के माध्यम से पैसे का भुगतान नहीं होने तक कम्प्यूटर सिस्टम को इन्क्रिप्ट कर देता है। रिपोर्टों के मुताबिक, 150 से ज्यादा देशों में रैनसमवेयर ‘वानाक्राई’ ने 200,000 सिस्टम अपनी जद में ले लिए हैं।

साइबर अटैक के चलते अधिकतर बैंक एटीएम को बंद रखने की सलाह दी गई है।

ब्रिजेश सिंह के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है कि रैनसमवेयर ने विश्व स्तर पर सिस्टम प्रभावित किए हों। इस साइबर हमले के दुष्प्रभावों को देखते हुए आईटी विशेषज्ञों ने यूजर्स को सावधान किया है कि प्रभावित संस्थानों की संख्या बढ़ती जा रही है और अंदेशा लगाया जा रहा है कि इसका अगला शिकार बैंकिंग सेक्टर होगा। देश में कुछ 2.2 लाख बैंक एटीएम हैं जिनमें से कुछ पुराने विंडोज एक्सपी आॅपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे हैं, जो अगले कुछ घंटों में प्रभावित हो सकते हैं इसलिए बैंकों को सूचित कर दिया गया है।

क्या है रैनसमवेयर

‘वॉनाक्राई’ रैनसमवेयर एक रैनसमवेयर मैलवेयर टूल है, जिसका प्रयोग कर एक वैश्विक हमला किया गया है जिन्हें हम आम तौर पर वायरस कहते हैं। रैनसम अंग्रेजी शब्द है, जिसका अर्थ है फिरौती। इस हमले के बाद संक्रमित कम्प्यूटर काम करना बंद कर देता है और उन्हें फिर से खोलने के लिए बिटकॉइन के रूप में 300-600 डॉलर तक की फिरौती की मांग की जाती है। कई प्रभावित संगठनों ने अपने कम्प्यूटर लॉक होने के बाद बिटकॉइन की मांग करने वाले स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। ये मालवेयर अमूमन ईमेल के जरिए कम्प्यूटर में आता है।

इस हमले के बाद कंप्यूटर पर इस तरह का मैसेज दिखाई देता है.

आपको बता दें कि इस साइबर हमले को इतिहास के सबसे बड़े हमले के रूप में देखा जा रहा है। हैकर्स ने अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़े हमले को अंजाम दिया है। माना जा रहा है कि एनएसए ने की ये तकनीक इंटरनेट पर लीक हो गई और हैकर्स ने इस तकनीक का ही इस्तेमाल किया है। सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार हमले से प्रभावित देशों में बिटकॉइन मांगने के 36 हजार मामले सामने आए हैं। इस हमले की खास बात है कि फिरौती की रकम चुकाने की एक समय-सीमा निर्धारित होती है, अन्यथा ये रकम बढ़ जाती है।

हमले की चपेट में आए ये देश

  • ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस इससे बुरी तरह प्रभावित हुई है और मरीजों के आॅनलाइन रिकॉर्ड पहुंच के बाहर हो गए हैं। ब्रिटेन से 230 पाउंड की फिरौती मांगी गई है।
  • स्पेन, पुर्तगाल और रूस में भी हुए साइबर हमले, 90 से ज्यादा देश इसकी चपेट में।
  • 18 पुलिस इकाइयों के कम्प्यूटर सिस्टम हमले से प्रभावित हुए
  • जापान में 600 स्थानों पर 2000 सिस्टम प्रभावित होने की सूचना है, निसान, हिताची जैसी कंपनियों की फाइलें लॉक हुई हैं।
  • जर्मनी का राष्ट्रीय रेलवे इससे प्रभावित हुआ है।

22 साल के लड़के ने निकाला हमला रोकने का उपाय

मेलवेयरटेक

22 वर्षीय मेलवेयरटेक नाम से पहचाने जाने वाला यह शख्स इस हमले पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है

हमले को रोकने वाला व्यक्ति एक 22 वर्षीय युवक है जो मैलवेयरटेक उपनाम से जाना जाता है, उन्हें इस रैनसमवेयर को रोकने में अप्रत्याशित सफलता मिली है, जो इसे जल्द सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

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