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पुण्यतिथि स्पेशल : ज़रा पढ़ें… 26 साल इन शहीदों के परिवारों पर क्या बीती

नई दिल्ली: 21 मई 1991… यह वह दिन था जब भारत ने अपना सातवां प्रधानमंत्री खोया था। यानि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का निधन इसी दिन तमिलनाडु में एक बम विस्फोट में हुआ था। 21 मई, 1991 की रात दस बजकर 21 मिनट पर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में यह बम विस्फोट हुआ था। उनकी सुरक्षा में कई पुलिस अधिकारी तैनात थे जिनकी मौत भी राजीव गांधी के साथ बम विस्फोट में हो गई थी।





राजीव गांधी की मौत बम ब्लास्ट में हुई थी (फाइल फोटो)

राजीव गांधी की पुण्यतिथि तो हर साल मनाई जाती है लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात जिन सुरक्षाकर्मियों ने शहादत दी थी उनको कोई याद नहीं करता। एक तरह से वे गुमनाम से हैं। लेकिन रक्षकन्यूज.काम उन्हें याद करते हुए आपको उनके बारे में बता रहा है। इन सुरक्षाकर्मियों में दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर प्रदीप गुप्ता, तमिलनाडु पुलिस के सिपाही धर्मन, पल्लवरन के पुलिस इंस्पेक्टर राजगुरू, सिपाही चन्द्रा, इंस्पेक्टर एडवर्ड जोसेफ, के. एस. मोहम्मद इकबाल कांचीपुरम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) समेत कई सुरक्षाकर्मी शामिल थे। आइए हम आपको बताते हैं कि उस दिन उनकी सुरक्षा में तैनात किन-किन सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी और उनके परिवार की स्थिति इस समय क्या है…

के. एस. मोहम्मद इकबाल (कांचीपुरम के पुलिस अधीक्षक-SP)

राजीव गांधी की अंतिम यात्रा

जावेद इकबाल

  • उनका बेटा जावेद इकबाल अब एलपीजी डिट्रीब्यूटर है

तब जावेद 17 साल का था। उन्हें याद है कि पिता ने दो हफ्ते पहले ही नई मोटरसाइकिल दिलाई थी। उस रोज शाम को जावेद को दोस्तों के साथ मोटरसाइकिल पर जाते वक्त के. एस. मोहम्मद इकबाल ने देखा तो रोककर कहा था कि घर जल्दी पहुंचना, मां वहां पर अकेली है।

आधी रात के करीब एक सिपाही ने घर पर आकर बम धमाके की खबर दी। जावेद कहते हैं कि वो फटाफट घटनास्थल पर पहुंचे लेकिन तब वहां कुछ भी नहीं था। वो नजदीक के अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में घुसते ही उन्हें पिता महज शव के रूप में मिले। उनके शरीर के निचले हिस्से में चोटें आई थीं। चेहरे पर एक खरोच तक नहीं थी।

के. एस. मोहम्मद इकबाल की बड़ी बेटी की तब शादी हो चुकी थी। जावेद ने पढ़ाई छोड़ दी। सरकार ने अन्ना यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाया लेकिन जावेद पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे सके। इसके बाद सरकार ने गैस एजेंसी का लाइसेंस दिलाया।

जावेद कहते हैं कि आर्थिक रूप से तो अब ठीक हैं लेकिन मां तो अब भी पिता की याद में रोती रहती है। उन्हें मलाल है कि कुछ अरसा पहले राहुल गांधी उनके घर के पास आए थे लेकिन उनके घर तक नहीं आए।

धर्मन (तमिलनाडु पुलिस के सिपाही)

  • धर्मन का बेटा अब 39 साल है और वह टैक्सी चलाता है

धर्मन कांचीपुरम में पुलिस की विशेष शाखा में तैनात थे। उनका परिवार गर्मियों की छुट्टियां बिताने चेन्नई के पास एक रिश्तेदार के घर गया हुआ था तभी एक पुलिसकर्मी आया और बोला कि ‘अप्पा’ एक बम धमाके में मारे गए। तब धर्मन का बेटा आठवीं में पढ़ता था, इसकी एक बहन 10 साल की और छोटा भाई पांच साल का था।

धर्मन की पत्नी वेदावल्ली अब 61 साल की है। उन्हें सरकारी नौकरी मिली हुई थी। किसी तरह घर का गुजारा चलता रहा लेकिन धर्मन के बच्चों को अफसोस होता है कि पिता का साया होता तो उनके हालात बेहतर होते।

राजगुरू (पुलिस इंस्पेक्टर, पल्लवरन)

  • राजगुरू का बेटा प्रवीन राजेश चेन्नई के अन्ना नगर में इंस्पेक्टर है

तब प्रवीन राजेश की उम्र 15 साल थी। प्रवीन अपने पिता को याद करते हुए बताते हैं कि राजीव गांधी की हत्या की खबर उन्हें रेडियो से मिली। कुछ ही घंटे के भीतर उनके पिता की मौत की खबर भी आई। राजगुरू एक लोकप्रिय अधिकारी थे और उन्होंने कई गुंडो को शहर से खदेड़ दिया था। यहां तक कि एमजी रामचन्द्रन तक उनसे मिलने थाने में आए थे।

राजगुरू की पत्नी बालासरस्वती अब 64 साल की हैं और उनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है।

चन्द्रा (सिपाही)

  • चन्द्रा के पति के. मणि सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं

उनकी बेटी हेमावती अब 28 बरस की हैं। तब वो सिर्फ दो साल की थी। के. मणि तब कांचीपुरम के वेयरहाउस में काम करते थे। उस रात चन्द्रा को राजीव गांधी के सुरक्षा दस्ते में भेजा गया था। तब के. मणि घर पर बेटी की देखभाल के लिए अकेले थे। एक सिपाही देर रात आया और उसने धमाके की सूचना दी। के. मणि बच्ची को साथ लेकर श्रीपेरंबदूर के लिए निकले लेकिन पहुंच नहीं सके। बाद में उन्होंने पत्नी चन्द्रा के शव की शिनाख्त कांचीपुरम के अस्पताल में जाकर की।

चन्द्रा के बिना के. मणि का जीवन कष्टमय रहा। हालांकि इतना जरूर हुआ कि सरकार ने उन्हें पक्की नौकरी दे दी। पहले वह अस्थाई थे। अब मात्र छह हजार रुपए माहवार की पेंशन से गुजारा चलता है। किसी तरह बेटी को पढ़ा लिखा दिया।

एडवर्ड जोसेफ (इंस्पेक्टर)

राजीव गांधी की अंतिम यात्रा

जॉन जोसेफ

  • एडवर्ड तब 39 साल के थे और स्पेशल ब्रांच सीआईडी में तैनात थे

वो मुख्यमंत्री एमजीआर के पीएसओ भी थे। उनके छोटे भाई जॉन जोसेफ वो शख्स हैं जिन्होंने इस केस में सजायाफ्ता लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। जॉन जोसेफ बताते हैं कि उस रोज वो अपने घर में थे। तब एक सिपाही ने आकर बताया कि उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया है। जब तक अस्पताल पहुंचा तब तक पता नहीं था कि उनकी मौत हो चुकी है।

एडवर्ड की पत्नी स्कूल टीचर थीं और उनके दो बच्चियां थीं। एक पांच साल की और दूसरी सात बरस की। बच्चियों को पालने में एडवर्ड की पत्नी को संघर्ष करना पड़ा। बड़ी बेटी अब डॉक्टर है और चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट अस्पताल में नौकरी करती है।

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