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काबिल स्निफर डॉग को क्यों खारिज किया पंजाब पुलिस ने

स्निफर डॉग

चंडीगढ़। फरवरी में चुनाव से कुछ दिन पहले कांस्टेबल ब्लू ने कपूरथला में एक कार की जांच के दौरान करीब 10 किलो अफीम और पोस्ता की भूसी पकड़वा कर सुर्खियाँ बटोरी थीं। इसी तरह ब्लू के बैचमेट कांस्टेबल केरी ने बरनाला में एक अन्य कार से 54 किलो अफीम बरामद कराई थी। भारत के चुनाव आयोग और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दोनों को प्रशंसा पत्र प्रदान किए थे। लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि बावजूद इसके ये दोनों कांस्टेबल पंजाब पुलिस की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। दरअसल, ये दोनों स्निफर डॉग हैं। इन्हें पंजाब पुलिस में भर्ती किया जाना था लेकिन सुर्खियाँ बनने के दो महीने के भीतर 30 अन्य कुत्तों के साथ इन दोनों को भी खारिज कर दिया गया।





इसके बाद कुत्तों के प्रशिक्षकों और पंजाब पुलिस अधिकारियों के बीच लेटर वार शुरू हो गया है। ड्रग्स के दंश से जूझ रहे पंजाब को ब्लू और केरी जैसे कम से कम 40 कुत्तों की जरूरत है लेकिन अब इनकी नियुक्ति रोक दी गई है।

स्निफर डॉग

पंजाब में ड्रग्स की बरामदगी के लिए बाकायदा एक स्वान दस्ता है (फाइल फोटो)

कुत्तों को पंजाब होमगार्ड्स केनिन ट्रेनिंग और प्रजनन संस्थान, डेरा बस्सी में प्रशिक्षित किया गया था, जो संस्थान को एक निजी कंपनी ईएसडी नेटवर्क के साथ चलाता है और अमेरिकी प्रशिक्षकों को नियुक्त करता है। भर्ती का काम पंजाब पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, फिल्लौर के पास है।

प्रशिक्षण के प्रबंध निदेशक न्यूटन सिद्धू ने पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा को पत्र में आरोप लगाया है कि फिल्लौर  अकादमी के अधिकारी चाहते हैं कि पुलिस को अकादमी से ही कुत्तों को भर्ती और प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेषज्ञों की एक टीम ने दो निरीक्षणों के दौरान कुत्तों को तुच्छ आधार पर खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि विशेषज्ञों ने नशीले पदार्थों के पैकेट में मिश्रित मसाले मिला दिए जिससे खोज के दौरान कुत्ते गुमराह हो गए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि निरीक्षण दल ने कुत्तों को इसलिए भी फेल कर दिया क्योंकि उन्हें सैल्यूटिंग जैसे औपचारिक कार्यों के लिए उन्हें प्रशिक्षित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, “कुत्ते खोजी काम के लिए तैयार किए गए हैं न कि मज़ा लेने के लिए।”

उन्होंने कहा कि कुत्तों को फ़ूड रिवार्ड ट्रेनिंग के आधुनिक तरीके के अनुसार प्रशिक्षित किया गया था, जिसमें यह माना जाता है कि कुत्तों को केवल तब ही पुरस्कार के रूप में खाना मिलता है जब वे नशीले पदार्थों या मृत शरीर या विस्फोटक का पता लगाते हैं। हालांकि, फिल्लौर अकादमी के अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि कुत्तों को प्रदर्शन के आधार पर खारिज किया गया न कि प्रशिक्षण की पद्धति के आधार पर। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कुत्तों ने मादक पदार्थों के तौर पर सभी 14 पैकेटों की पहचान की, जबकि यह केवल दो पैकेट में था। इस पर एडीजीपी, प्रोविजनिंग, वीके भवरा का कहना है कि निरीक्षण दल ने निर्धारित मानकों का पालन किया।

साभार : द ट्रिब्यून 

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