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आखिर जीत गई पृथिका यशिनी, बनी देश की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस दारोगा

नई दिल्ली: पृथिका यशिनी रविवार को देश की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस अधिकारी बन गई है। पृथिका को तमिलनाडु सरकार की ओर से पुलिस उप निरीक्षक पद पर नियुक्ति का आदेश मिला है। उसे कई कानूनी लड़ाइयां लड़ने के बाद पुलिस की वर्दी मिली है। उसे नियुक्ति का आदेश चेन्नई पुलिस आयुक्ति स्मिथ सरन की ओर से मिला है। उसने धरमपुरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सब इंस्पेक्टर के रूप में ज्वाइन किया। ज्ञात हो कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में ट्रांसजेंडर की आबादी 4.9 लाख है।





इस बारे में पृथिका का कहना है कि देश में पुलिस अधिकारी बनने वाली वह पहली ट्रांसजेंडर है। वह अपनी इस नौकरी से बेहद खुश है। वह हमेशा अच्छे से अच्छा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वह बेहद खुश है और कहती है कि आखिरकार अब उसका पुलिस अधिकारी बनने का सपना साकार हो गया। इसके लिए उसने लंबी लड़ाई लड़ी है। उसने बताया कि पुलिस सेवा में रहकर उनका पहला उद्देश्य होगा महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाना।

पृथिका सब इंस्पेक्टर तो बन गई हैं लेकिन वह बड़े ख्वाब को पूरा करने में जुटी हुई हैं। वह अभी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की तैयारी भी कर रही हैं। आपको बता दें कि हाल ही में मद्रास उच्च न्याकयालय ने पृथिका की नियुक्ति के लिए रास्ता साफ करते हुए ये कहा था कि वह तमिलनाडु पुलिस में उन निरीक्षक पद पर नियुक्ति के लिए हर तरह से योग्य हैं।

प्रदीप कुमार से पृथिका याशिनी

पृथिका यशिनी का जन्म एक लड़के के रूप में हुआ। माता-पिता ने इनका नाम प्रदीप कुमार रखा। लिंग परिवर्तन कराने के बाद प्रदीप कुमार पृथिका याशिनी बन गई। माता-पिता की समाज में बदनामी न हो इस कारण से पृथिका ने अपना घर छोड़ दिया था। पृथिका ने प्रदीप कुमार नाम से ही बीएससी (कंप्यूटर एप्लीकेशन) की।

कई बार मिली हार

उसका सपना पुलिस अफसर बनने का था। आवेदन पत्र में लिंग के कॉलम में केवल दो ही विकल्प थे पुरुष और महिला। उसने दूसरे कॉलम को चुना इस पर आवेदन निरस्त हो गया। इसके लिए उसे मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। नाम परिवर्तन की स्वीकृति और आवेदन पत्र में तीसरे लिंग ट्रांसजेंडर के कॉलम की व्यवस्था की गयी। इस प्रकार पृथिका यशिनी सभी कानूनी बाधाएं पार करते हुए भारत की पहली ट्रांसजेंडर पुलिस सब इंस्पेक्टर बन गई।

…तो गंगा होती पहली ट्रांसजेंडर पुलिसकर्मी

2015 में अगर राजस्थान की ट्रांसजेंडर गंगा कुमारी को पुलिस कांस्टेबल के रूप में ज्वाइन करने की इजाजत मिल गई होती तो पृथिका याशिनी की जगह आज उनका नाम होता। गंगा के बैच के अन्य लोग अक्टूबर 2015 से राजस्थान पुलिस में ड्यूटी कर रहे हैं।

ट्रांसजेंडर गंगा कुमारी ने फिजिकल और रिटेन दोनों एग्जाम क्लियर किए हैं।

गंगा को सिर्फ इसलिए पुलिस की नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह ट्रांसजेंडर थी। गंगा ने भी राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है, जिस पर अगली सुनवाई 26 अप्रैल 2017 को है। राज्य के रानीवाड़े के झाकरी गांव की रहने वाली गंगा कुमारी ने राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद के लिए फिजिकल और रिटेन दोनों ही टेस्ट पास कर रखे हैं।

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