Police

गिरफ्तारी के मामले में निरंकुश न हो पुलिस, जानें गिरफ्तारी के ये 11 नियम

किसी को भी गिरफ्तार करने का पुलिस के पास जबरदस्त हथियार/अधिकार है। इस अधिकार का कानून व्यवस्था बनाए रखने में सबसे अहम योगदान है। लेकिन कई बार देश भर की पुलिस इस अधिकार का गलत इस्तेमाल भी करती है।  वसूली करने के लिए भी गिरफ्तार करने की धमकी दे देती है। पुलिस निरंकुश होकर इस अधिकार का दुरुपयोग न करे इसलिए गिरफ्तारी के बारे में कुछ नियम कायदे बनाए गए हैं। लेकिन लोगों को यह मालूम नहीं है। पुलिस के पास गिरफ्तारी के अधिकार हैं तो गिरफ्तार व्यक्ति को भी उसके अधिकार की जानकारी देना पुलिस की जिम्मेदारी है। किसी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को कुछ नियम कायदे पालन करने जरुरी हैं। गिरफ्तार व्यक्ति के भी कुछ अधिकार होते हैं। पुलिस गिरफ्तारी के आदेश का दुरुपयोग न कर सके, इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि वह आम लोगों तक यह जानकारी पहुंचाए। रिट याचिका संख्या 6027, 2017 डा. सुभाष विजयराम बनाम भारत सरकार और अन्य में हाईकोर्ट ने जो आदेश पारित किया है, उसमें दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश संख्या 330, 2008 की जानकारी को लोगों तक पहुंचाने को कहा गया है। यह स्थायी आदेश गिरफ्तारी के दौरान व बाद में पुलिस अफसर द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश को दर्शाता है, जिसका विवरण इस प्रकार हैः





सहभागिता की प्रमाणिकता के आधार पर ही हो सकती है गिरफ्तारी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी पुलिस अफसर द्वारा सिर्फ इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जाएगी क्योंकि वह गिरफ्तारी न्याय संगत हैं। पुलिस अफसर के पास गिरफ्तारी का अधिकार होना एक बात है किन्तु उसका उचित होना बिल्कुल दूसरी बात है। अतः कोई भी अफसर गिरफ्तारी के अधिकार का इस्तेमाल उसी वक्त करें, जबकि वह उसे उचित और जरूरी ठहराने में सक्षम हो। किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी मात्र खानापूर्ति हेतु इसलिए नहीं हो सकती, क्योंकि उसके खिलाफ किसी अपराध को करने का आरोप है। जब तक शुरुआती जांच पड़ताल में शिकायत की सत्यता और औचित्य के साथ आदमी की उसमें सहभागिता की प्रमाणिकता उसकी गिरफ्तारी की आवश्यकता इंगित न करें।तब तक गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।

Comments

Most Popular

To Top