North India

संगठित अपराध के खिलाफ PCOCA बेहद जरूरी: DGP

डीजीपी-सुरेश-अरोड़ा

फिल्लौर। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP-डीजीपी) सुरेश अरोड़ा ने कहा है कि राज्य में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पंजाब संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (PCOCA) बेहद जरूरी है। यह बात उन्होंने यहाँ महाराजा रणजीत सिंह पुलिस अकादमी में शीर्ष पुलिस अधिकारियों की बैठक में कही।





DGP अरोड़ा ने कहा कि प्रस्तावित कानून की जरूरत है क्योंकि पंजाब की सीमाएं शत्रुतापूर्ण बर्ताव करने वाले पड़ोसी के साथ लगी हुई हैं। इसके अलावा इस क़ानून से स्थानीय अपराधी गिरोहों और आतंकवादी हमलों से निपटने में भी मदद मिलेगी। DGP ने कहा कि सबसे बड़ी मुश्किल गैंगस्टरों के खिलाफ गवाहों को ढूँढ़ना है। सबूतों के अभाव में अधिकतर अपराधी कोर्ट से छूट जाते हैं। सबूत की कमी के कारण, उनमें से अधिकतर अदालतों द्वारा जारी किए जाते हैं। डीजीपी ने बताया कि 2012 के बाद गैंगस्टरों से जुड़े 195 मामलों में केवल 10 में सजा हो पाई है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भी PCOCA का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव को अब कैप्टन अमरिंदर सरकार फिर से लाने जा रही है।

प्रस्तावित अधिनियम (कुछ हद तक महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम (मकोका) पर आधारित) के मुताबिक़ एसपी रैंक के अफसर के समक्ष दिए बयान ही सबूत के तौर पर मान्य होंगे, सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य 10 वर्ष के लिए “वैध प्रमाण” माने जाएंगे और PCOCA लगाने का अधिकार डीआईजी या उससे ऊपर के अधिकारी को होगा।

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