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नया प्रयोग, दिल्ली के दो थाने बने ऑफिसर ओरिएंटेड

नई दिल्ली: दिल्ली के दो थानों को अधिकारी उन्मुख (Officer Oriented) संकल्पना के दायरे में लाकर प्रयोग किया जा रहा है जिसके तहत इन थानों में इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तादाद बढ़ाई गई है।





खास बात ये है कि यह दो थाने, संसद मार्ग और मोरिस नगर वह थाने है जिनके क्षेत्र में सबसे ज्यादा धरना प्रदर्शन होते हैं। संसद मार्ग थाने के तहत जंतर मंतर ऐसी जगह है जहां एक साल ही में हजारों की संख्या में प्रदर्शन होते हैं या धरने दिए जाते हैं। ये स्थान संसद भवन के करीब है।

वही मोरिस नगर थाने के पास दिल्ली विश्वविद्यालय और विधान सभा भवन है। वहां भी इसी तरह की गतिविधियां होती हैं। जंतर मंतर पर लोग धरना प्रदर्शन करते हैं। इसके लिए किसी प्रकार की कोई रोक-टोक नहीं है लेकिन कभी-कभी हालात बिगड़ भी जाते हैं। जंतर मंतर क्षेत्र संसद मार्ग थाना क्षेत्राधिकार में आता है। पहले यहां 164 पुलिसकर्मी तैनात थे जिन्हें अब बढ़ाकर 287 कर दिया गया है।

ऑफीसर-ओरिएंटेड पुलिसिंग मॉडल का फीता काटकर उद्घाटन करते उप-राज्यपाल अनिल बैजल, साथ में हैं दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक, स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) पी कामराज और अन्य पुलिस अधिकारी

दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने ‘ऑफीसर-ओरिएंटेड पुलिस मॉडल’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक, स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) पी कामराज समेत दिल्ली पुलिस के कई आलाधिकारी मौजूद थे।

इस मौके पर उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में लोगों का काम मोबाइल पर हो जाए और उन्हें थाने आने की जरूरत ही न पड़े, इस दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते वक्त के साथ दिल्ली में अब बड़ी संख्या में युवा विरोध-प्रदर्शन करते हैं। मुद्दों को लेकर विरोध करना लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार भी है। ऐसे में उन्हें नियंत्रित करना या उनसे बेहतर व्यवहार करना पुलिस का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ ऑफिसर ओरिएंटेंड मॉडल थाना बनाए जाने पर विचार किया गया।

उप-राज्यपाल ने इसके लिए पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक व उनकी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके कठिन प्रयास से ही तीन महीने में इसे लागू किया जा सका।

उप-राज्यपाल अनिल बैजल को गॉड ऑफ ऑनर दिया गया

 

डिजिटल इंडिया पर दिया बल

उप-राज्यपाल ने बताया कि दिल्ली पुलिस को आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया के तहत स्मार्ट बनाया जाएगा। इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। दिल्ली पुलिस के सभी मोबाइल एप को वन टच अवे एप से जोड़कर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तरी जिले के मोरिस नगर थाने को भी ऑफिसर ओरिएंटेड थाना बनाया गया है।

इस मौके पर पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने कहा कि नई दिल्ली जिला का संसद मार्ग थाना हर साल 4 हजार से अधिक धरना-प्रदर्शन को नियंत्रित करने का काम करता है। धरना-प्रदर्शन की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन थानों में पुलिसकर्मियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। जिसके कारण इसे नियंत्रित करने व लोगों की शिकायत सुनने में समस्या आ रही थी। इसी को देखते हुए उपराज्यपाल के साथ हुई बैठक में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर संसद मार्ग थाना व मोरिस नगर थाने को ऑफिसर ओरिएंटेंड पुलिसिंग मॉडल के तौर पर शुरू करने का फैसला किया गया।

उप-राज्यपाल ने थाने में रजिस्टर की जांच की और पुलिसकर्मियों से बातचीत भी की

जंतर मंतर पर वर्ष 2016 में 4,666 धरने प्रदर्शन हुए। धरने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने को दूसरे थानों की पुलिस की मदद लेनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक समझाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है।

पहले यहां तीन इंस्पेक्टर, 13 सब इंस्पेक्टर, 34 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 27 हेड कॉंस्टेबल और 140 कॉंस्टेबल समेत 164 पुलिसकर्मी तैनात थे। अब यह संख्या बढ़ाकर इंस्पेक्टर 07, सब इन्सपेक्टरों की संख्या 40, असिस्टेंट सब-इन्सपेक्टर 40, हेड कॉंस्टेबल 60 और कॉंस्टेबल 140 कर दिए गए हैं। यानि अब पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में 287 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

इस बदलाव के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ बेहतर तालमेल बना सकेंगे और प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से युवाओं के साथ संवेदनशीलता, धैर्य और पेशेवर रुख के साथ पेश आएंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे।

अब इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर सुनेंगे समस्या

आमतौर पर दिल्ली पुलिस के थानों में अब तक हवलदार या सिपाही आम लोगों की समस्या सुनते थे, लेकिन मॉडल थाना के तौर पर अब संसद मार्ग थाने में इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर सहायता डेस्क पर तैनात होंगे। इनमें पुरुष व महिला पुलिसकर्मी शामिल होंगे, जो न सिर्फ पीड़ित की शिकायत सुनेंगे, बल्कि प्राथमिकता पर उस पर कार्रवाई भी करेंगे।

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