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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कांस्टेबल स्मिता तांडी को नारी शक्ति पुरस्कार

स्मिता-तांडी

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर बुधवार को आयोजित एक विशेष समारोह में नारी शक्ति पुरस्कार 2016 प्रदान किए। जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत स्मिता टांडी को भी पुरस्कार प्रदान किया गया। स्मिता ने गरीब, जरूरतमंदों की मदद के लिए फेसबुक को जरिया बनाया और फिर वह लोगों की मदद करने लगीं। स्मिता ने 2015 में जीवनदीप समूह बनाया था, जो गरीबों को स्वस्थ्य सेवाएं मुहैया करने के लिए आर्थिक मदद करता है। पुरस्कार समारोह में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी भी उपस्थित थीं। इस मौके पर कई राज्यों की महिलाओं को पुरस्कार प्रदान किया गया। नारी शक्ति पुरस्कार के तहत एक लाख रूपये नकद और प्रमाण पत्र दिए जाते हैं।





भारत सरकार महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान के मद्देनजर प्रतिष्ठित महिलाओं और संस्थानों को नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान करती है। इनकी घोषणा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों, संबंधित मंत्रालयों/विभागों, गैर-सरकारी संगठनों, विश्वविद्यालयों/संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के तहत नामित लोगों को प्रदान किए जाते हैं, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए काम किया हो।

राष्ट्रपति भवन

राष्ट्रपति और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के साथ सम्मानित महिलाएं

राष्ट्रपति के हाथो सम्मान पाने वाली महिलाओं में कांस्टेरबल स्मिता तांडी– जीवनदीप समूह, अनीता सोनी– इसरो की महिला वैज्ञानिक, लीना नायर– महिला बाल विकास मंत्रालय की सचिव, बानो हरालू– पर्यावरण संरक्षण, दिव्या  रावत– मशरूम की खेती, जुबानी हमत्सोई– फैशन कम्पनी, मुमताज काजी– डीजल इंजन चलाने वाली पहली महिला, आइसे कोहलर रॉलफसन– आदिम जाति रायका के उत्थान और ऊंटों के संरक्षण के क्षेत्र में, दीपा माथुर–  महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में, शामिल है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय महिलाओं ने पीढियों से देश के विकास और प्रगति में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में समानतापूर्ण भागीदारी के लिए ऐतिहासिक कानून बनाए हैं और दूरदर्शी कार्यक्रम लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम कन्या भ्रूण हत्या रोकने की महत्वपूर्ण पहल है और इससे देश में बालिकाओं को शिक्षा के अवसर मिलते हैं।

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