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…और कभी हँसी की वजह से फटकार मिलती थी इस IPS को

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में तैनात और एक भाजपा विधायक की फटकार की वजह से सुर्खियों में आईं आईपीएस अधिकारी चारू निगम को आईपीएस बनने और ‘लेडी सिंघम’ की उपाधि पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। अब 30 वर्षीय चारू निगम की आंखों में आंसू चाहे बीजेपी विधायक की वजह से आ गए या सीनियर के सपोर्ट की वजह से लेकिन अतीत में उन्हें उनकी हंसी के लिए फटकार मिलती थी। कॉलेज टाइम में उनकी हंसी पापुलर हुआ करती थी। उन्हें कई बार इसके लिए डांट भी पड़ी थी। चारू की पोस्टिं‍ग गोरखपुर से पहले झांसी में हुई थी।





पिता के कहने से शुरू की आईपीएस की तैयारी

चारु का परिवार आगरा से सम्बन्ध रखता है। उनके पिता की नौकरी जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) में लगी तो उनका पूरा परिवार आगरा से दिल्ली शिफ्ट हो गया। चारू की पढ़ाई-लिखाई भी दिल्ली में हुई। उन्होंने आईआईटी से बीटेक किया है। उनके पास आराम की नौकरी करने का ऑप्शन था लेकिन पिता के कहने पर चारु ने पीसीएस की तैयारी शुरू की।

पहले निराशा हाथ लगी

चारू ने अपने पिता के कहने पर लोक सेवा आयुक्त एग्जाम की प्रिपरेशन तो शुरू कर दी, लेकिन पहली बार में सफल नहीं हो पाईं। 2010 के सिविल सर्विसेस एग्जाम में बैठीं, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। 2012 के सिविल सर्विसेस एग्जाम में चारू दोबारा बैठीं और सफल हुईं। उन्होंने बताया, ‘पापा हमेशा मुझे सपोर्ट करते थे। मेरी स्टडीज में भी काफी हेल्प की।’

चारू निगम आईपीएस के लिए चयनित होने के बाद अपनी मां और अन्य परिजनों के साथ

चारू बताती हैं कि पढ़ाई को लेकर वो खुद पर कभी प्रेशर नहीं डालती थीं। केवल 6 महीने की पढ़ाई से आईपीएस परीक्षा में उन्होंने सफलता हासिल की। उनके मुताबिक, हंसना जैसे उनकी हॉबी है। इसके कारण वे स्कूल, कॉलेज में कई बार सजा पा चुकी हैं। हंसने के अलावा उनको हॉर्स राइडिंग और कुकिंग का शौक है। खाली समय में वे अपने परिवार के लिए खाना भी बनाती हैं।

चारू निगम अपने माता-पिता के साथ

पिता की मौत के बाद मां ने हौसला बढ़ाया

2011 में चारू के पिता का निधन हो गया। पिता का साया उठने से चारू डिप्रेशन में चली गईं। चारू बताती हैं, ‘मैं अंदर से टूट गई थी। मुझे लगता ही नहीं था कि मैं UPSC एग्जाम फेस भी कर सकती हूं। एक साल के डिप्रेशन के बाद मैंने खुद को संभालना शुरू किया। इस बार मम्मी ने मुझे सहारा दिया और हौसला बढ़ाया।’

पहली पोस्टिंग में ही बन गईं ‘लेडी सिंघम’

2016 में चारू की पहली पोस्टिंग झांसी के बरुआसागर थाना में एएसपी के रैंक पर हुई। ये पूरा इलाका खनन माफियाओं और अवैध शराब के बिजनेस के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद चारू ने महज 4 महीने में माफियाओं पर लगाम लगा दी। उनके इसी कारनामे से लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ कहकर बुलाते हैं।

चारू निगम (फाइल फोटो)

चारू उस समय और हीरो बनकर उभरीं जब झांसी में ही एक सड़क दुर्घटना में एक बच्चे के सिर से खून बहता देख उन्होंने एम्बुलेंस का इंतजार नहीं किया और बिना किसी की मदद के उठाया और अपनी ही गाड़ी में उसे लेकर अस्पताल की ओर दौड़ पड़ीं। इस घटना के बाद से चारू लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई थीं।

अभी एंटी रोमियो स्क्वायड की जिम्मेदारी

दिसंबर 2016 में चारू की पोस्टिंग यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में हुई थी। फिलहाल वह एंटी रोमियो स्क्वायड की प्रभारी हैं। उन्होंने पहले ही दिन करीब 10 मनचलों को हवालात पहुंचाया था।

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