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सुलखान सिंह के बारे में क्या आप जानते हैं ये बातें

सुलखान सिंह

लखनऊ: आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह को उत्तर प्रदेश पुलिस का नया मुखिया बनाया गया है। उन्हें वरिष्ठता के अलावा कई और आधार पर राज्य का डीजीपी बनाया गया है। इससे पहले वह पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) के पद पर तैनात थे। विशेषज्ञों का मानना है कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सुलखान की ही तरह किसी ईमानदार और तेज-तर्रार अफसर की तलाश में थी। इसलिए उनका चुनाव किया गया।





उनकी छवि एक ईमानदार और सख्त अधिकारी की है। रिकॉर्ड के मुताबिक सितंबर 2017 में सुलखान सिंह सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में आधिकारिक तौर पर उनका कार्यकाल अगले चार महीने तक का ही होगा।

सुलखान सिंह के बारे में

  • 1980 कैडर के यूपी के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अफसर हैं।
  • वह उत्तर प्रदेश के बांदा के जौहरपुर गांव के रहने वाले हैं। सुलखान सिंह के पिता और उनके भाई इसी गांव में रहते हैं। सुलखान सिंह चार भाइयों में सबसे बड़े हैं।
  • प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा आदर्श बजरंग इंटर कॉलेज बांदा से हुई। इसके बाद इन्होंने आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की। उन्होंने लॉ की डिग्री भी ली।

आगरा के दिल पर किया राज

1987 के आखिर में सुलखान सिंह आगरा के एसपी सिटी बने थे। कांग्रेस की सरकार थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसी दौरान आगरा में कमला नगर की स्वीटी नाम की एक लड़की का दबदबा था। जिससे लोग परेशान थे। सुलखान सिंह ने उस पर शिकंजा कसा और स्वीटी को गिरफ्तार कर लिया।

उसकी गिरफ्तारी पर काफी राजनीतिक दबाव पड़ा, लेकिन एसपी सिटी रहे सुलखान सिंह ने किसी की नहीं चलने दी। आगरा में वह 1989 तक रहे। जब उनका आगरा से मेरठ ट्रांसफर किया गया तो आगरा के लोग दुखी हुए। उन्हें आगरा में कई चौराहों पर विदाई दी गई।

पुलिस भर्ती में हुए घोटाले की जांच की थी

साल 2007 में बसपा की सरकार बनी तो मायावती ने पुलिस भर्ती में हुए घोटाले की जांच उन्हें सौंपी। साथ ही एडीजी शैलजाकांत मिश्र को भी लगाया गया था। उन्होंने जिलों में बनाए गए कई भर्ती बोर्ड की जांच कर भर्तियों को निरस्त करने की सिफारिश शासन से की थी।

…तो जावीद अहमद नहीं बनते डीजीपी

जावीद अहमद अगर उत्तर प्रदेश के डीजीपी बनाए गए थे तो सिर्फ समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के कहने से। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव भी सुलखान सिंह को डीजीपी बनाना चाहते थे लेकिन मुलायम सिंह के कहने पर उन्होंने जावीद अहमद को डीजीपी नियुक्त किया था।

जावीद अहमद को मुलायम सिंह का करीबी भी माना जाता है। इसका बड़ा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब समाजवादी परिवार में फूट पड़ी हुई थी जब जावीद अहमद भी अपने स्तर से अखिलेश-मुलायम को एक करने में लगे हुए थे और मुलायम सिंह के बुलावे पर कई बार उनसे मिलने गए थे।

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