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…जिन्हें अपनों ने ठुकराया उन्हें झज्जर पुलिस ने दिया सहारा

झज्जर पुलिस बेसहारा की बनी मददगार
बेसहारा बुजुर्ग की मददगार बनी झज्जर पुलिस (सौजन्य- दैनिक ट्रिब्यून)

झज्जर। ऐसा नहीं है कि उनके अपने नहीं हैं लेकिन अपनों के होते हुए भी वे बेसहारा है। ये वे लोग हैं जिन्हें उम्र की सांझ में उनके अपनों ने ठुकरा दिया है। पर अब इन्हीं ठुकराए हुए लोगों का सहारा बनी है झज्जर पुलिस। बेसहारा बुजुर्गों की जिम्मेदारी ले झज्जर पुलिस समाज को भी नई राह दिखा रही है। झज्जर पुलिस उम्र के आखिरी पड़ाव पर दर-दर भटक रहे बुजुर्गों को ढूंढकर उनकी सेवा कर रही है।





झज्जर पुलिस के जवान इन दिनों ऐसे बुजुर्गों के लिए न सिर्फ खाने-पीने और रहने का इंतजाम कर रहे हैं बल्कि उनकी देख-रेख ठीक वैसे ही कर रहे हैं जैसे कोई अपने घर के बुजुर्ग की करता है। पुलिस जवान इन बुजुर्गों को नहलाते हैं, उनके कपड़े साफ करते हैं, उन्हें खाना खिलाते हैं। तात्पर्य यह कि उनकी देखभाल में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते।

दरअसल झज्जर पुलिस की यह पहल संभव हुई है नए पुलिस अधीक्षक पंकज नैन के प्रयासों से। पंकज नैन ने जिले के सभी गांवों और शहरों के उन बुजुर्गों का डाटा इकट्ठा करने के लिए कहा जो अपनों के होते हुए भी बेसहारा हैं। पुलिस के मुताबिक जिले में ऐसे 450 ऐसे बुजुर्ग हैं जो बेसहारा हैं। इनमें से बहुत से ऐसे हैं जो अपनों के होते हुए भी बेसहारा का जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं। झज्जर पुलिस इन दिनों ऐसे ही बेसहारा लोगों के न सिर्फ आसरे का इंतजाम कर रही है अपितु उन्हें अपनेपन का अहसास कराने में भी लगी है। पुलिस की इस पहल की हर कोई तारीफ कर रहा है।

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