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जवाहर बाग: CBI जांच के आदेश, ASP की विधवा को निष्पक्ष जांच की उम्मीद

मुकुल द्विवेदी

महीनों इंतजार के बाद एएसपी मुकुल द्विवेदी की विधवा अर्चना द्विवेदी को इन्साफ की किरण दिखाई दी है। अब उस घटना की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बंधी है जिसमें उनके पति के साथ-साथ थानाध्यक्ष संतोष यादव के अलावा कई और लोगों की जान गई थी।

इलाहाबाद। महीनों इंतजार के बाद एएसपी मुकुल द्विवेदी की विधवा अर्चना द्विवेदी  को इन्साफ की किरण दिखाई दी है। अब  उस घटना की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बंधी है जिसमें उनके पति के साथ-साथ थानाध्यक्ष संतोष यादव के अलावा कई और लोगों की जान गई थी। जवाहर बाग गोलीकांड के नाम से याद किए जाने वाली इस दर्दनाक घटनाक्रम की जांच अब CBI करेगी। पिछले साल जून में मथुरा में हुए इस कांड को लेकर दायर की गई जन याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यह पूरा मामला सीबीआई के सुपुर्द किया जाए।





जनहित याचिका अर्चना द्विवेदी और उनके भाई प्रफुल्ल द्विवेदी ने दाखिल की थी। याचिका में कहा कि मेरे पति राजनीतिक प्रभाव वाली मिली-भगत के शिकार हुए। मेरे पति पर दबाव बनाया गया कि उन्हें उसी दिन अवैध जमीन खाली करानी है और ये भी आरोप लगाया कि इस काम में अनुभवी और दक्ष अधिकारी भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं कराए गए जबकि उपद्रवियों की तादाद काफी ज्यादा थी। पार्क में अवैध रूप से डेरा डाले लोगों से पार्क की जमीन खाली कराने के दौरान हुई झड़प में 29 लोग मारे गए थे।

मुख्य न्यायधीश डी बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की एक खंडपीठ ने इस मामले की CBI से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

जवाहर गोलीकांड

जवाहर गोलीकांड: आगजनी में भी कई जानें गई(फाइल फोटो)

इससे पहले, इस अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 20 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले की CBI जांच की मांग कर अदालत का रुख करने वालों में दिल्ली स्थित उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय और मथुरा के निवासी विजय पाल सिंह तोमर भी शामिल हैं। एक बयान में उपाध्याय ने इस फैसले की यह कहते हुए सराहना की, ‘पिछले साल जून में जवाहर बाग में हुई यह हिंसा कानून व्यवस्था का कोई साधारण मामला नहीं था। यह करीब 5,000 करोड़ रुपये मूल्य की एक सरकारी जमीन पर स्वयंभू नेता राम वृक्ष यादव और उसके अनुयायिओं की अवैध कब्जा से जुड़ा था।’

जवाहर-गोलीकांड

जवाहर गोलीकांड का मास्टरमाइंड रामवृक्ष

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी, 2014 में राम वृक्ष यादव के संगठन स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह को जवाहर बाग के भीतर दो दिन के लिए विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी थी, लेकिन इस समूह के सदस्यों ने इस विशाल पार्क पर दो साल से अधिक समय तक कब्जा जमाए रखा। उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद भारी हिंसा के बीच इस पार्क को खाली कराया गया। अवैध रूप से कब्जे के दौरान इस पार्क में बनाई गर्इं झोपड़ियों से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए थे।

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