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जाट आन्दोलन : पुलिस की जांच पर हाईकोर्ट में उठी अंगुली

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

चंडीगढ़। हरियाणा में पिछले साल फरवरी में जाट आन्दोलन के दौरान हिंसा के बाद दर्ज की गई एफआईआर और हरियाणा पुलिस की जांच पर अब अदालत में सवाल उठे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अमिकस क्यूरी (AMICUS CURIAE) अनुपम गुप्ता ने कहा कि पुलिस ने जाट आन्दोलन के दौरान 2110 एफआईआर दर्ज कीं उनमें से चार जिलों में दर्ज 555 एफआईआर में से पुलिस ने 216 एफआईआर में अनट्रेस (Untrace) रिपोर्ट पेश की है। ऐसी रिपोर्ट तब लगाई जाती है जब पुलिस मामले के अभियुक्तों को या सम्पत्ति का पता लगाने में नाकाम रहती है।





जिन चार जिलों की ये अनट्रेस रिपोर्ट्स हैं, वे हैं हिसार, सोनीपत, भिवानी और झज्जर। वहीं हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सोनीपत जिले में मूनक नहर को नुकसान पहुंचाए जाने वाले मामले में सिर्फ पांच अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए जाने पर चिंता जाहिर की। अदालत ने कहा कि सीधे-सीधे मामले वापस लेने के बजाय सरकार ने अनट्रेस रिपोर्ट पेश करने का तरीका अपनाया। इस पर एडीशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इन मामलों की जांच के बाद वह अदालत को 6 अप्रैल को जानकारी देंगे।

उप महानिरीक्षक (DIG) ममता सिंह की अगुवाई वाले विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को मुरथल बलात्कार काण्ड की जांच संबंधी Status रिपोर्ट दाखिल की जिसे श्री गुप्ता ने Eyewash बताया। अदालत ने SIT को नई रिपोर्ट 6 अप्रैल को दाखिल करने का निर्देश देते हुए सरकार के वकील को जांच के लिए एक पत्र सौंपा था क्योंकि उसमें कुछ अभियुक्तों के नाम थे।

अदालत ने रोहतक निवासी अश्विन की याचिका भी खारिज कर दी जिसमें उसने कहा था कि राज्य सरकार को अदालत की पूर्व अनुमति से ही मामले को जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द करना चाहिए था। अश्विन हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का घर फूंके जाने से सम्बंधित मामले की FIR में अभियुक्त है।

Courtsy : The Indian Express

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