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खुफिया जानकारी लीक करने वाला IPS अफसर जेल भेजा गया

गुवाहाटी: असम के धेमाजी जिले के चर्चित सिल्पठार कांड के मुख्य आरोपी की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार सीआईडी के एसएसपी डा. राजामारथंडन की सोमवार को 6 दिनों की पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।





सिल्पठार कांड बीते 6 मार्च को सामने आया था आईपीएस अधिकारी को पुलिस की खुफिया जानकारी को लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सरकार ने मामला सामने आने के बाद आईपीएस राजामारथंडन को निलंबित कर दिया। उन पर निखिल भारत बंगाली उदबस्तु समन्वय समिति (NBBUSS) के एक सदस्य को गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने के अलावा आरटीआई कानून का उल्लंघन करने और अपने वरिष्ठों को अंधेरे में रखने का आरोप है।

गोपनीय सूचना लीक करने के आरोप में आईपीएस अफसर गिरफ्तार

डा. राजामारथंडन उस विशेष जांच दल (SIT) के मुखिया थे जो 6 मार्च आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के सिल्पठार कार्यालय में तोड़फोड़ के मामले की जांच कर रहा थे। डा. राजामारठंडन 2005 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। इस संबंध में 50 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं मुख्य आरोपी सुबोध विश्वास को गत 22 मार्च को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के दूर-दराज इलाके से असम व पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

आईपीएस डा. राजामारथंडन (दाएं)

क्या हैं आरोप

आरोपों के अनुसार सिल्पठार कांड के मुख्य आरोपी सुबोध विश्वास को बचाने के लिए गिरफ्तार आईपीएस अधिकारी  राजामारथंडन ने स्वयं ही फर्जी तरीके से आरटीआई कर उसका जवाब भी स्वयं बनाकर दे दिया। माना जा रहा है कि सीआईडी की एसआईटी टीम ने जो भी महत्वपूर्ण सुराग जुटाए थे, वह सब आरोपी के पास पहुंच गए, जिसके चलते सरकार का केस कमजोर हो गया।

इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष सिल्पठार कांड में सीआईडी के एसएसपी की संलिप्तता को लेकर विपक्षी पार्टियां सरकार पर आरोप लगा रही हैं कि एक ईमानदार अधिकारी को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। असली गुनाहगार को बचाने के लिए एक ईमानदार अधिकारी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

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