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बुरा फंसा यह IPS अफसर, धमकी देकर लाखों वसूले : जांच रिपोर्ट

इन्दरबीर सिंह

पटियाला। अपने ट्रांसफर के बावजूद 12 SHO का तबादला करने वाले संगरूर के तत्कालीन एसएसपी इन्दरबीर सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप यह है कि इन्दरबीर ने हत्या के केस में फंसाने की धमकी देकर दो किसानों से पैसा उगाहा। संगरूर एसएसपी ने प्रारंभिक जांच में एक डीएसपी सहित पूर्व एसएसपी और तीन अन्य पुलिस अधिकारियों को प्रथमद्रष्टया दोषी पाया है। इस बीच यह बताना जरूरी है कि चंडीगढ़ के एसएसपी के लिए जिन तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल बना है उनमें इंदरबीर सिंह का भी नाम है। उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा कि “मैं निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हूँ क्योंकि मुझे पता है कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है।”





गौरतलब है कि लोंगोवाल में गैंगस्टर दविंदर सिंह उर्फ ​​बबली रंधावा ने पांच साथियों के साथ 25 वर्षीय फाइनेंसर हरदेव सिंह की फरवरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में उन्होंने हत्या का जश्न मनाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया।

पीड़ित दो किसानों की दास्ताँ

कोटरा अमृहू गांव के धनवंत सिंह और दुग्गा गांव के हरजिंदर सिंह ने दावा किया कि उन्हें रंधावा को जानने के कारण पकड़ लिया गया। दोनों ने आरोप लगाया कि उन्हें अवैध हिरासत में रखा गया था और उनके परिवारों से धन की उगाही की गई। पीड़ितों ने अपनी शिकायत में सुरक्षा की मांग करते हुए लिखा है, “हमारा एकमात्र दोष यह है कि हम रंधावा को गैंगस्टर बनने से पहले से जानते हैं। उसने हमसे कुछ मदद के लिए कहा लेकिन हमने इनकार कर दिया। हालांकि, पुलिस ने सोचा कि हमारे उससे घनिष्ठ सम्बन्ध हैं और हमें पैसे उगाहने के लिए पकड़ लिया।”

एक डीएसपी समेत 4 और के नाम

संगरूर एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू ने पटियाला क्षेत्र के आईजी एएस राय और डीआईजी सुखचैन सिंह गिल को भेजी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में संगरूर के पूर्व एसएसपी इन्दरबीर सिंह, सुनाम के डीएसपी जश्नदीप गिल, लोंगोवाल एसएचओ सिकंदर सिंह, संगरूर सिटी पुलिस प्रभारी बलजिंदर सिंह चट्ठा, और बद्रू खान पोस्ट प्रभारी गुरमेल सिंह का नाम लिया है। रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने और सतर्कता ब्यूरो की जांच की सिफारिश की गई है।

1.5 एकड़ जमीन पर ऋण लेकर 14 लाख रुपये का भुगतान किया

धनवंत सिंह ने द ट्रिब्यून को बताया, “कई दिनों तक मुझे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और हत्या के मामले में फंसाने की धमकी दी गई तब मैंने अपनी 1.5 एकड़ जमीन पर ऋण लेने के बाद पुलिस को 14 लाख रुपये का भुगतान किया।” “अब मुझे अपनी जान का डर लग रहा है; केवल सीबीआई जांच ही अब हमारे जैसे गरीब किसानों को बचा सकती है।”

हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 5.5 लाख रुपये जबरन वसूले थे। उसने बताया कि “उन्होंने मुझ पर अत्याचार किए और मुझसे कहा कि मामले को निपटाने के लिए पैसे देने होंगे। मेरे परिवार ने ऊंचे ब्याज पर ऋण लिया। उसने कहा कि  अगर मुझे और परेशान किया गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।”

आईजी को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि “जश्नदीप गिल और सिकंदर सिंह ने मेरे कार्यालय (जांच अधिकारी) में अन्य अधिकारियों के सामने मौखिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने रिश्वत ली है और मुझे बताया कि इसमें से 15 लाख रुपये कथित तौर पर तत्कालीन एसएसपी को दिए गए थे, जबकि बाकी का वितरण अधिकारियों में उनके पद के अनुरूप किया गया था।”

संपर्क करने पर एसएसपी मंदीप सिद्धू ने बताया कि कानूनी राय के मुताबिक इन पर गलत तरीके से कैद करना, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला बनता है। “मैंने निष्कर्ष अपने वरिष्ठों को भेज दिए हैं, अब निर्णय वही लेंगे।”

इस बीच, कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को सच्चाई का पता लगाने का निर्देश दिया है। दोषी पाए जाने वाले कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।

साभार : द ट्रिब्यून

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