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‘सुपर कॉप’ गिल के जाने के बाद भी कुछ सियासतदानों ने बनाए रखी दूरी

केपीएस गिल

नई दिल्ली। पंजाब में आतंकवाद का सफाया करने में महती भूमिका निभाने वाले पूर्व पुलिस महानिदेशक और ‘सुपर कॉप’ कहे जाने वाले केपीएस गिल (कंवर पाल सिंह गिल) की याद में आज यहाँ संसद से महज कुछ कदम दूर रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में गुरुग्रंथ साहिब के पाठ का ‘भोग’ किया गया। यह उनके परिवार और पंजाब पुलिस के सभी रैंक के अफसरों की ओर से किया गया था। केपीएस गिल की श्रद्धांजलि सभा से अकाली-भाजपा नेताओं के अलावा दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार ने जहां दूरी बनाए रखी, वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली स्थित गिल के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अमरिंदर ने खुद इसकी जानकारी एक ट्वीट करके साझा की।





इन 15 खास वजहों से याद किए जाएंगे केपीएस गिल

श्रद्धांजलि सभा में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गिल को श्रद्धांजलि भेंट करते हुए कहा कि पंजाब में अमन-शांति बहाली के लिए गिल को हमेशा याद रखा जाएगा। पंजाब का शांतिपूर्ण माहौल गिल की देन है। कैप्टन ने कहा कि प्रदेश में जब कलेक्टर शाम होते ही दरवाजा बंद कर देते थे तो गिल रात्रि अभियान पर निकलते थे।

भाजपा की वरिष्ठ नेत्री एवं आतंकवाद विरोधी संगठनों में सक्रिय रहने वाली लक्ष्मीकांता चावला के अलावा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसएस विर्क, हरियाणा के पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी, आल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा, पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा के अलावा पुलिस विभाग के कई आला अधिकारियों ने गिल को श्रद्धांजलि दी। लक्ष्मीकांता चावला नेे कहा कि श्री गिल महान राष्ट्रवादी थे। पंजाब उनका योगदान कभी नहीं भुला पाएगा।

इस मौके पर बड़ी संख्या में पंजाब पुलिस के पूर्व और वर्तमान अफसर मौजूद थे। चूंकि स्व. गिल केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में भी रहे थे इसलिए उस समय के तमाम अफसरों के अलावा वर्तमान अधिकारी भी मौजूद थे।

  • करियर पर एक दाग भी

केपीएस गिल ‘सुपर कॉप’ तो कहे जाते थे लेकिन उनके करियर पर एक दाग भी था। दरअसल, एक वरिष्ठ महिला आईएएस अफसर के साथ एक पार्टी में छेड़खानी का आरोप गिल पर लगा था। घटना के 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में उन्हें तीन माह की सजा सुनाते हुए दो लाख का जुर्माना लगाया था। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से यह सजा मुल्तवी कर दी गई थी।

केपीएस गिल

केपीएस गिल की याद में रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में गुरुग्रंथ साहिब के पाठ का ‘भोग’ किया गया

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केपीएस गिल की याद में रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में गुरुग्रंथ साहिब के पाठ के दौरान कीर्तन किया गया

केपीएस गिल

केपीएस गिल की याद में रफी मार्ग स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में गुरुग्रंथ साहिब के पाठ के ‘भोग’ के दौरान मौजूद लोग

केपीएस गिल का 26 मई को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। गिल लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण परेशान थे।

29 दिसंबर 1934 को लुधियाना में जन्मे गिल 1958 बैच के असम और मेघालय कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी थे। वह 1995 में पुलिस सेवा से रिटायर हुए थे। खासतौर से पंजाब को आतंकवाद से मुक्त करने में उनके आक्रामक योगदान के लिए याद किया जाता है। वह पंजाब के दो बार पुलिस महानिदेशक रहे।

2006 में सुरक्षा सलाहकार रहते हुये उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार को बस्तर की तीन सड़कों के निर्माण की अनुशंसा की थी। केपीएस गिल ने अफगानिस्तान के मामले में भी काम किया था। वहां युद्ध के माहौल में भी 218 किलोमीटर देलारम-ज़रंज हाईवे का निर्माण चार साल में कराया था। वह इंडियन हाकी फेडरेशन (IHF) के अध्यक्ष के अलावा इन्स्टीट्यूट ऑफ कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के भी मुखिया रहे। उनकी सेवाओं को देखते हुए 1989 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था।

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