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पंजाब में पुलिस बॉस को खुश करने के लिए पार्क के नामकरण से खड़ा हुआ विवाद

जलंधर पुलिस

जलंधर। आपको यह खबर पढ़कर गुस्सा, तरस या हँसी कुछ भी आ सकती है। मामला ही ऐसा है। अमूमन किसी गली-सड़क या पार्क का नाम समाजसेवी या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या फिर राजनेता के नाम पर रखा जाता है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि अपने बॉस को खुश करने के लिए एक पुलिस अफसर ने उनके नाम पर पार्क का नामकरण ही करवा दिया। बाकायदा पत्थर भी लग गया और पार्क के गेट पर चौड़ी प्लेट में बड़ा-बड़ा नाम भी लिखवा दिया। यह कारनामा जलंधर पुलिस ने किया है।





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दरअसल, जलंधर पुलिस लाइंस में एक पार्क का जीर्णोद्धार किया गया था। इस पार्क को नाम दिया गया ‘श्री सुरेश अरोड़ा पार्क’। वही सुरेश अरोड़ा जो इस समय पंजाब पुलिस के महानिदेशक हैं। यह सब हुआ था 6 मार्च को। इस पार्क का उद्घाटन जलंधर के पुलिस आयुक्त अर्पित शुक्ला ने बाकायदा एक समारोह में किया था। अगले दिन जब मीडिया में खबर आई तो हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में गेट के ऊपर लगी नामपट्टिका को सफ़ेद कपड़े से और उद्घाटन के काले पत्थर को एल्युमिनियम की फ्वाइल शीट ढक दिया गया। जानकारी के अनुसार पार्क का नाम DGP के नाम पर रखने का फैसला अर्पित शुक्ला का ही था। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या यह सम्भव है कि उन्होंने अपने बॉस (DGP) को बताए बिना ऐसा किया होगा?

जलंधर-पुलिस

6 मार्च को पार्क का उद्घाटन जलंधर के पुलिस आयुक्त अर्पित शुक्ला ने एक समारोह में किया था।

मीडिया से बातचीत में शुक्ला ने कहा था कि DGP के नाम पर पार्क का नाम रखने में मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता। शुक्ला के मुताबिक़, “सेना के जनरल और पूर्व पुलिस महानिदेशकों के नाम पर भी तो बिल्डिंगें हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य अधिकारियों और स्थानीय परिवारों की इच्छा थी कि DGP को इसके जारिए विशेष तौर पर धन्यवाद दिया जाए। पहली नजर में यह बहस का मुद्दा हो सकता है कि सेवारत डीजीपी को इस तरह का सम्मान दिया जाना चाहिए या नहीं।

मीडिया में खबर आने के बाद पुलिस मुख्यालय से जलंधर पुलिस को फटकार मिली और शाम होते-होते पट्टिका और पत्थर को ढकने के आदेश दिए गए। अतिरिक्त महानिदेशक (प्रशासन) दिनकर गुप्ता ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि श्री अरोड़ा इस तरह से खुद की पब्लिसिटी में विश्वास नहीं रखते। उधर शुक्ला का कहना था कि वैसे पार्क के विकास का आदेश खुद श्री अरोड़ा ने दिया था जब कुछ माह पूर्व वह यहाँ निरीक्षण के लिए आए थे। वह इस पार्क के विकास के लिए हमारी प्रेरणा रहे हैं। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि पार्क का नाम श्री अरोड़ा के नाम पर रखने के लिए उनसे (श्री अरोड़ा) या पुलिस मुख्यालय से कोई इजाजत नहीं ली गई थी।

मुख्यालय के हस्तक्षेप के बाद पार्क का नाम ‘शहीद पार्क’ के तौर पर कर दिया गया।

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