North-Central India

RTI के माध्यम से सूचना देने में यहां की पुलिस फिसड्डी!

आरटीआई

लखनऊ। जन सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के अन्तर्गत राजधानी की पुलिस सूचना देने में बहुत फिसड्डी साबित हो रही है। पहले तो पुलिस विभाग सूचना देना ही नहीं चाहता है, लेकिन जब बार-बार सूचना मांगी जाती है तो जो सूचना देती है वह भी अपूर्ण रहती है।





वरिष्ठ अधिवक्ता मृणाल चक्रवर्ती ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने जन सूचनाधिकार के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जन सूचना​ अधिकारी से 3 सितम्बर 2016 को सूचना मांगी लेकिन सूचना नहीं दी गई। इसके बाद 21 नवम्बर और 31 दिसम्बर को सूचना मांगी तो भी नहीं दी गई। इसके बाद मजबूर होकर सूचना के लिए अपील दाखिल की तो अलग-अलग कुछ थानों से अपूर्ण सूचना दी गई, लेकिन जिले के सभी थानों से अभी भी सूचना नहीं दी गई है।

उन्होंने बताया​ कि जो सूचना कुछ थानों से भेजी गई है वह अधूरी है उसमें अपराध संख्या, मुकदमा किस धारा में पंजीकृत है, कौन-कौन से मुकदमे किस धारा में विचाराधीन है व किस न्यायालय द्वारा निर्णीत किए गए हैं इसका कही उल्लेख नहीं किया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि लखनऊ की पुलिस सूचना देने में फिसड्डी है। पुलिस सूचना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। वहीं पारदर्शिता न होने की वजह से समाज में अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर और बूथ पर पुलिस अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय अपराधियों और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर सुलह करवा रही है।

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